{"_id":"5883b7b24f1c1b632af003dc","slug":"watch-what-bigadhegi-ciragon-of-storms","type":"story","status":"publish","title_hn":"...देखिये क्या बिगाड़ेगी आंधियां चिरागों का ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
...देखिये क्या बिगाड़ेगी आंधियां चिरागों का
ब्यूरो/अमर उजाला, देवबंद
Updated Sun, 22 Jan 2017 01:29 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दीवान दरवाजे में साहित्यिक एवं सामाजिक संस्था बज्मे अदब के योगदान में महफिल-ए-मुशायरा आयोजित किया गया, जिसमें शायरों ने अपने मनपसंद कलाम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन सपा नेता नकुल सिरोही एवं शमा रोशन सभासद सय्यद हारिस ने की। मुशायरे में रुड़की के शायर आफरीदी को साहित्य सेवा और नकुल सिरोही को समाजसेवा के क्षेत्र में स्मृति चिह्न, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आगाज सरवर उस्मानी की नाते पाक से हुआ।
हास्य व्यंग्य कवि एवं शायर डा. शमीम देवबंदी ने पढ़ा, ‘सिर्फ आंसु थे कोरे कागज पर, मेरे खत का जवाब अच्छा था’। महशर माफरीदी ने पढ़ा, ‘बनिये के पास गिरवी पड़ा है अमीरे शहर, कल चौक में उतर गई दस्तार कुछ सुना’। नाजिम अशरफ किरतपुरी ने कहा, ‘दिन के दिन वापसी करने का इरादा हो अगर, आज भी गांव के कुछ लोग बुरा मानते हैं’।
विज्ञापन
चांद देवबंदी ने पढ़ा, ‘जरूरत के मुताबिक तुम बदलना सीख लो खुद को, सुना है चांद मैने ये नगर बहरूपियों का है’। डा. सादिक देवबंदी ने पढ़ा, ‘फिर किस तरह से प्यार का पौधा जवान हो, घर का निजाम आप ने नौकर पे रख दिया’। शमीम किरतपुरी ने कहा, ‘खलिश तमाम हुई उम्र भर के लम्हों में, जो उसने लफ्जों का मरहम जबान पर रखा’। नूर देवबंदी ने पढ़ा, ‘रख दीये जलाकर के उल्फतों की राहों में, देखिये क्या बिगाडे़गी आंधियां चिरागों का’।
अब्दुल्ला राज ने पढ़ा, ‘मंजिल की जुस्तजू है तो जिंदा हूं आज तक, मर जाऊंगा जो अज्मे सफर टूट जाएगा’। इनके अलावा शम्स देवबंदी, डा. अदनान अनवर, चौकस देवबंदी, जुहेर अहमद, अब्दुल रहमान सैफ, वली वक्कास, मसरूर खां आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए।
इस मौके पर डा. एस ए अजीज, अंसार मसूदी, नजम उस्मानी, मुनीब अंसारी, फैसल नूर, पप्पू प्रधान, शोएब कुरैशी, हसीन अंसारी, आबिद तारिक, कारी शहजाद, सुभाष, उसामा अंसारी मौजूद रहे।
विज्ञापन
कार्यक्रम का उद्घाटन सपा नेता नकुल सिरोही एवं शमा रोशन सभासद सय्यद हारिस ने की। मुशायरे में रुड़की के शायर आफरीदी को साहित्य सेवा और नकुल सिरोही को समाजसेवा के क्षेत्र में स्मृति चिह्न, शॉल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आगाज सरवर उस्मानी की नाते पाक से हुआ।
विज्ञापन
हास्य व्यंग्य कवि एवं शायर डा. शमीम देवबंदी ने पढ़ा, ‘सिर्फ आंसु थे कोरे कागज पर, मेरे खत का जवाब अच्छा था’। महशर माफरीदी ने पढ़ा, ‘बनिये के पास गिरवी पड़ा है अमीरे शहर, कल चौक में उतर गई दस्तार कुछ सुना’। नाजिम अशरफ किरतपुरी ने कहा, ‘दिन के दिन वापसी करने का इरादा हो अगर, आज भी गांव के कुछ लोग बुरा मानते हैं’।
विज्ञापन
चांद देवबंदी ने पढ़ा, ‘जरूरत के मुताबिक तुम बदलना सीख लो खुद को, सुना है चांद मैने ये नगर बहरूपियों का है’। डा. सादिक देवबंदी ने पढ़ा, ‘फिर किस तरह से प्यार का पौधा जवान हो, घर का निजाम आप ने नौकर पे रख दिया’। शमीम किरतपुरी ने कहा, ‘खलिश तमाम हुई उम्र भर के लम्हों में, जो उसने लफ्जों का मरहम जबान पर रखा’। नूर देवबंदी ने पढ़ा, ‘रख दीये जलाकर के उल्फतों की राहों में, देखिये क्या बिगाडे़गी आंधियां चिरागों का’।
अब्दुल्ला राज ने पढ़ा, ‘मंजिल की जुस्तजू है तो जिंदा हूं आज तक, मर जाऊंगा जो अज्मे सफर टूट जाएगा’। इनके अलावा शम्स देवबंदी, डा. अदनान अनवर, चौकस देवबंदी, जुहेर अहमद, अब्दुल रहमान सैफ, वली वक्कास, मसरूर खां आदि ने भी कलाम प्रस्तुत किए।
इस मौके पर डा. एस ए अजीज, अंसार मसूदी, नजम उस्मानी, मुनीब अंसारी, फैसल नूर, पप्पू प्रधान, शोएब कुरैशी, हसीन अंसारी, आबिद तारिक, कारी शहजाद, सुभाष, उसामा अंसारी मौजूद रहे।