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टेक्नीशियन हैं नहीं, कौन चलाए जांच मशीनें
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जिला अस्पताल में ईसीजी मशीन
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) देवबंद में करीब 15 वर्ष पहले करीब ढाई लाख रुपये कीमत की अल्ट्रासाउंड मशीन खरीदी गई थी। उस समय यहां पर तैनात रहे रेडियोलोजिस्ट डॉ. वाईडी शर्मा ने कुछ दिन इसे चलाया भी लेकिन उनका स्थानांतरण होते मशीन को कमरे में रख ताले में बंद कर रख दिया। तब से यह कमरे में ही बंद रही और अब कंडम घोषित कर दी गई। यह उदाहरण है लोगों की जांच और इलाज के लिए उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का, सरकार का पैसा बर्बाद हो गया और लोगों को सुविधा मिली नहीं।
स्वास्थ्य सेवाएं लचर होने की एक वजह स्थानीय और शासन स्तर के अधिकारियों का लापरवाही भरा रवैया भी है। जिला अस्पतालों और सीएचसी व पीएचसी में जांच के लिए मशीनें तो हैं, लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने की वजह से मशीनें किसी के काम नहीं आ रही हैं। ऐसे में मरीजों को निजी सेंटरों और लैब में महंगी जांचें करानी पड़ रही हैं। सीएचसी बेहट में एक्स-रे की मशीन लंबे समय से आई हुई है, लेकिन टेक्नीशियन की तैनाती नहीं होने की वजह से मशीन बंद पड़ी है। सीएचसी रामपुर मनिहारान में एक्स-रे मशीन कई माह से खराब पड़ी है। प्रभारी चिकित्सक डॉ. अजीत राठी का कहना है कि मशीन को ठीक करने के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। एक सप्ताह में मशीन ठीक होने की संभावना है।
खराब हुई थायराइड जांच मशीन तो
तीन माह लग जाते हैं ठीक होने में
एसबीडी जिला अस्पताल में करीब दो करोड़ रुपये की थायराइड जांच मशीन है, जो अक्सर खराब रहती है। मशीन अमेरिकी कंपनी की है, जिसका पुर्जा खराब होने पर अमेरिका ही से आता है। मशीन को ठीक करने के लिए टेक्नीशियन भी बाहर से ही आता है। ऐसे में मशीन को ठीक होने में तीन माह तक लग जाते हैं। जिला अस्पताल ही में हृदय रोग विभाग में ईसीजी टेक्नीशियन नहीं है। यहां संविदाकर्मी से काम लिया जा रहा है।
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भवन तैयार, लेकिन एमआरआई मशीन नहीं
लोगों को एमआरआई (मैग्नेटिक रोसोनेंस इमेजिंग स्कैन) सुविधा उपलब्ध कराने के लिए के लिए जिला अस्पताल में भवन बनाया गया। तीन साल से भवन बनकर तैयार लेकिन मशीन नहीं आई है। भवन निर्माण पर खर्च किया गया पैसा किसी काम नहीं आया।
ज्यादातर सीएचसी पर सुविधा नहीं
एक तरफ जहां सुविधा है, वहां जांच नहीं हो रही है, वहीं कुछ अस्पताल ऐसे भी हैं, जहां जांच सुविधा नहीं है। सीएचसी चिलकाना, सीएचसी सरसावा, सीएचसी साढ़ौली कदीम, सीएचसी हरौड़ा, सीएचसी सुन्हेटी खड़खड़ी, सीएचसी नानौता और सीएचसी गंगोह में ना तो एक्स-रे की सुविधा है, ना ही अल्ट्रासाउंड की।
-जहां भी जांच मशीनें हैं, लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में बंद पड़ी हैं। टेक्नीशियन की तैनाती के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा यदि कहीं मशीन खराब है तो उसके संबंध में संबंधित अधिकारी से बात करेंगे। यदि कहीं सुविधा है तो उसका लाभ आम नागरिक को मिलना ही चाहिए।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।
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स्वास्थ्य सेवाएं लचर होने की एक वजह स्थानीय और शासन स्तर के अधिकारियों का लापरवाही भरा रवैया भी है। जिला अस्पतालों और सीएचसी व पीएचसी में जांच के लिए मशीनें तो हैं, लेकिन टेक्नीशियन नहीं होने की वजह से मशीनें किसी के काम नहीं आ रही हैं। ऐसे में मरीजों को निजी सेंटरों और लैब में महंगी जांचें करानी पड़ रही हैं। सीएचसी बेहट में एक्स-रे की मशीन लंबे समय से आई हुई है, लेकिन टेक्नीशियन की तैनाती नहीं होने की वजह से मशीन बंद पड़ी है। सीएचसी रामपुर मनिहारान में एक्स-रे मशीन कई माह से खराब पड़ी है। प्रभारी चिकित्सक डॉ. अजीत राठी का कहना है कि मशीन को ठीक करने के लिए अधिकारियों को पत्र लिखा गया है। एक सप्ताह में मशीन ठीक होने की संभावना है।
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खराब हुई थायराइड जांच मशीन तो
तीन माह लग जाते हैं ठीक होने में
एसबीडी जिला अस्पताल में करीब दो करोड़ रुपये की थायराइड जांच मशीन है, जो अक्सर खराब रहती है। मशीन अमेरिकी कंपनी की है, जिसका पुर्जा खराब होने पर अमेरिका ही से आता है। मशीन को ठीक करने के लिए टेक्नीशियन भी बाहर से ही आता है। ऐसे में मशीन को ठीक होने में तीन माह तक लग जाते हैं। जिला अस्पताल ही में हृदय रोग विभाग में ईसीजी टेक्नीशियन नहीं है। यहां संविदाकर्मी से काम लिया जा रहा है।
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भवन तैयार, लेकिन एमआरआई मशीन नहीं
लोगों को एमआरआई (मैग्नेटिक रोसोनेंस इमेजिंग स्कैन) सुविधा उपलब्ध कराने के लिए के लिए जिला अस्पताल में भवन बनाया गया। तीन साल से भवन बनकर तैयार लेकिन मशीन नहीं आई है। भवन निर्माण पर खर्च किया गया पैसा किसी काम नहीं आया।
ज्यादातर सीएचसी पर सुविधा नहीं
एक तरफ जहां सुविधा है, वहां जांच नहीं हो रही है, वहीं कुछ अस्पताल ऐसे भी हैं, जहां जांच सुविधा नहीं है। सीएचसी चिलकाना, सीएचसी सरसावा, सीएचसी साढ़ौली कदीम, सीएचसी हरौड़ा, सीएचसी सुन्हेटी खड़खड़ी, सीएचसी नानौता और सीएचसी गंगोह में ना तो एक्स-रे की सुविधा है, ना ही अल्ट्रासाउंड की।
-जहां भी जांच मशीनें हैं, लेकिन टेक्नीशियन के अभाव में बंद पड़ी हैं। टेक्नीशियन की तैनाती के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अलावा यदि कहीं मशीन खराब है तो उसके संबंध में संबंधित अधिकारी से बात करेंगे। यदि कहीं सुविधा है तो उसका लाभ आम नागरिक को मिलना ही चाहिए।
डॉ. संजीव मांगलिक, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।

जिला अस्पताल में थाईराइड की मशीन- फोटो : SAHARANPUR

जिला अस्पताल की पेथोलॉजी- फोटो : SAHARANPUR