{"_id":"f7b8c27eb0512761eb02bfa979cf9dad","slug":"three-delivery-three-neonatal-death-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन डिलीवरी, तीनों नवजात की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन डिलीवरी, तीनों नवजात की मौत
Thu, 16 Apr 2020 06:55 PM IST
Anonymous User
रामपुर मनिहारन/ ब्यूरो/अमर उजाला
रामपुर मनिहारन/ ब्यूरो/अमर उजाला
Published by: Anonymous User
Updated Thu, 16 Apr 2020 06:55 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचएसी) में एक ही रात में हुई तीन डिलीवरी में तीनों ही नवजात की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात महिला चिकित्सक काफी देर में पहुंची। चिकित्सकों ने डिलीवरी के नाम पर उनसे रुप ये भी वसूले हैं।
सीएचसी में मंगलवार रात के समय भर्ती हुई तीन महिलाएं जिसमें लता पत्नी ईश्वरपाल निवासी गांव नाजिरपुरा, रेशमा निवासी गांव सोना अर्जुनपुर और बबीता पत्नी जोनी निवासी रामपुर मनिहारान की डिलीवरी हुई। तीनों ही नवजात को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
बबीता के मृत नवजात बच्चे के बारे में चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे में धड़कन नहीं थी। परिजन उसे झाड़ फूंक कराने के लिए घर ले गए, जबकि परिजनों का आरोप है कि बच्चे को देख चिकित्सकों ने उन्हें कहा था कि बच्चे को यहां से ले जाओ। उनका कहना है कि वह झाड़ फूंक में विश्वास नहीं करते। चिकित्सक झूठा आरोप लगा रहे हैं। बबीता के पति जोनी का यह भी आरोप है कि महिला चिकित्सकों ने उससे पांच सौ रुपये भी ले लिए हैं।
विज्ञापन
उधर, चिकित्सकों ने बताया कि लता को मृत लड़की पैदा हुई है, जो कि पेट में ही 15 दिन पूर्व मर चुकी थी, क्योंकि पैदा हुई बच्ची का शरीर सड़ चुका था। वहीं, रेशमा के बारे में यह बताया गया कि बच्चे की मां में खून की मात्रा काफी कम थी, जिससे बच्चे को बचाया नहीं जा सका है। भर्ती हुई तीनों महिलाओं के परिजनों ने डिलीवरी के नाम पर रुपये वसूलने का आरोप लगाया।
चिकित्सा अधीक्षक डा. सर्वेश का कहना है कि जिन महिलाओं की डिलीवरी हुई है, उसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है। तीनों महिलाओं के परिजन पहले तो गांव में दाई के चक्कर में पड़े रहे। जब उनकी हालत खराब हुई तो उन्हें केंद्र पर भेजा गया है। तीनों महिलाएं बच्चा होने के बाद ठीक है यदि उन्हें समय पर चिकित्सा मुहैया नहीं कराई जाती तो कुछ भी हो सकता था। उधर, महिला चिकित्सकों का कहना है कि डिलीवरी के नाम पर रुपये लेने का आरोप बिल्कुल निराधार है।
विज्ञापन
सीएचसी में मंगलवार रात के समय भर्ती हुई तीन महिलाएं जिसमें लता पत्नी ईश्वरपाल निवासी गांव नाजिरपुरा, रेशमा निवासी गांव सोना अर्जुनपुर और बबीता पत्नी जोनी निवासी रामपुर मनिहारान की डिलीवरी हुई। तीनों ही नवजात को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
विज्ञापन
बबीता के मृत नवजात बच्चे के बारे में चिकित्सकों का कहना है कि बच्चे में धड़कन नहीं थी। परिजन उसे झाड़ फूंक कराने के लिए घर ले गए, जबकि परिजनों का आरोप है कि बच्चे को देख चिकित्सकों ने उन्हें कहा था कि बच्चे को यहां से ले जाओ। उनका कहना है कि वह झाड़ फूंक में विश्वास नहीं करते। चिकित्सक झूठा आरोप लगा रहे हैं। बबीता के पति जोनी का यह भी आरोप है कि महिला चिकित्सकों ने उससे पांच सौ रुपये भी ले लिए हैं।
विज्ञापन
उधर, चिकित्सकों ने बताया कि लता को मृत लड़की पैदा हुई है, जो कि पेट में ही 15 दिन पूर्व मर चुकी थी, क्योंकि पैदा हुई बच्ची का शरीर सड़ चुका था। वहीं, रेशमा के बारे में यह बताया गया कि बच्चे की मां में खून की मात्रा काफी कम थी, जिससे बच्चे को बचाया नहीं जा सका है। भर्ती हुई तीनों महिलाओं के परिजनों ने डिलीवरी के नाम पर रुपये वसूलने का आरोप लगाया।
चिकित्सा अधीक्षक डा. सर्वेश का कहना है कि जिन महिलाओं की डिलीवरी हुई है, उसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई है। तीनों महिलाओं के परिजन पहले तो गांव में दाई के चक्कर में पड़े रहे। जब उनकी हालत खराब हुई तो उन्हें केंद्र पर भेजा गया है। तीनों महिलाएं बच्चा होने के बाद ठीक है यदि उन्हें समय पर चिकित्सा मुहैया नहीं कराई जाती तो कुछ भी हो सकता था। उधर, महिला चिकित्सकों का कहना है कि डिलीवरी के नाम पर रुपये लेने का आरोप बिल्कुल निराधार है।