फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   There are three generations divyanga, surprised everyone

तीन पीढ़िया हैं दिव्यांग, हर कोई हैरान

Sun, 12 Jun 2016 01:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 12 Jun 2016 01:02 AM IST
विज्ञापन
There are three generations divyanga, surprised everyone
एक ही परिवार के दिव्यांग। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
इसे कुदरत का खेल कहें या कि अनुवांशिक बीमारी कि एक ही परिवार में तीन पीढ़ियों से दिव्यांग बच्चे पैदा हो रहे हैं। यहां बात पहाड़ी कॉलोनी निवासी अब्दुल रहमान के परिवार की हो रही है, जिसमें तीन पीढ़ियों से दिव्यांग बच्चे पैदा हो रहे हैं। परिवार के सामान्य लोग दिव्यांगों की भावनाओं और बात को बिना कहे समझ लेते हैं और अपनी बात को इशारों में समझा देते हैं। इतना ही नहीं, दिव्यांग आपस में भी इशारों में बातें करते हैं। 
विज्ञापन

जैन कॉलेज रोड स्थित जैन मंदिर के सामने स्थित पहाड़ी कॉलोनी निवासी तालिब और बतूल के यहां एक बेटा अब्दुल रहमान और तीन बेटी रिहाना, हुस्नबानो और वरीसा पैदा हुईं। हैरत की बात यह है कि इनमें अब्दुल रहमान, हुस्नबानो और रिहाना दिव्यांग पैदा हुईं।
विज्ञापन


यानी वह बोल और सुन नहीं सकती थीं। अब्दुल रहमान के दिव्यांग होने की वजह से पिता ने उसकी शादी दिव्यांग शाहजहां के साथ कर दी। अब्दुल रहमान के घर तीन बेटे शहजाद, आबाद और आशु एवं बेटी यासमीन पैदा हुईं। इनमें शहजाद और आशु दिव्यांग पैदा हुए, जबकि आबाद और यासमीन सामान्य हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर, अब्दुल रहमान की बहन रिहाना के यहां सात बच्चे पैदा हुए, जिनमें से तीन बच्चे बेटा तालिब, बेटी मीर जहां और खुर्शीदा दिव्यांग हैं। दूसरी बहन हुस्नबानो के यहां दो बेटियां गुलशाना और मरजीना पैदा हुईं, जो कि दिव्यांग हैं।

इनमें गुलसाना के यहां तीन बच्चे गुलनाज, रिहान और मनीषा भी दिव्यांग ही हैं। तीसरी बहन वरीसा के यहां तीन बेटियां अंजुम, तरन्नुम और खुशनुमा पैदा हैं। इनमें अंजुम और तरन्नुम दिव्यांग हैं। इस प्रकार तीन पीढ़ियों से इस परिवार में दिव्यांग बच्चे पैदा हो रहे हैं, जो मूक-बधिर हैं। वर्तमान में परिवार में तीन पीढ़ियों के 13 लोग दिव्यांग हैं। 

...जब अनुवादक बन गया शाहबाज 
अमर उजाला की टीम जैसे ही अब्दुल रहमान के घर पहुंची तो बाहर 10 वर्षीय शाहबाज मिला, जो सामान्य है। वह टीम को परिवार के पास ले गया। उसने इशारों में बताया कि यह लोग अखबार से आए हैं।

इसके बाद तरन्नुम ने इशारों में कुछ कहना शुरू किया, जिसे समझ पाना हमारे लिए मुश्किल ही नहीं, बल्कि नामुमकिन था। ऐसे में शाहबाज फटाफट उसके इशारों को हमारी भाषा में कहता चला गया। तरन्नुम का कहना था कि आज तक कई मीडिया वाले अपनी खबर बनाने के लिए उनके पास आए हैं, मगर आज तक उनके हालत नहीं बदले हैं। वह अपने दिव्यांग होने के साथ ही शासन और प्रशासन की उदासीनता से भी आहत दिखी। 

इशारों में कहते-सुनते हैं  
अब्दुल रहमान के परिवार के 13 सदस्य भले ही जुबान से कुछ कह न सकते हों और कानों से कुछ सुन न सकते हों, मगर उनका मन पूरी तरह मस्त है। वह इशारों में हर बात कहते और सुनते हैं। कई बच्चे दिव्यांगों के लिए बने संकल्प स्कूल के छात्र हैं। जब अमर उजाला की टीम परिवार के बीच पहुंची तो सभी खुश हो गए। 


क्या कहते हैं डॉक्टर
कुछ बीमारियां अनुवांशिक होती हैं। अब्दुल रहमान के परिवार के मामले को यदि मेडिकल की भाषा में कहें तो यह मेनडेलियन ट्रेट के तहत पैदा हुआ जीनिक इफेक्ट यानी अनुवांशिक अवगुण है। यदि इस बीमारी को बढ़ने से रोकना है तो ऐसे दिव्यांग लोगों की शादी परिवार के लोगों के साथ न कर दूर के लोगों के साथ करनी चाहिए। इससे जीन मल्टीप्लाई होगा। इसके अलावा इसका इलाज भी संभव है। 
- डॉ. मोहन सिंह, नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed