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Saharanpur News: विद्यालय को इमारत तो नई मिल गई, परिसर बदहाल ही रह गया
Wed, 15 Jul 2026 12:46 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Wed, 15 Jul 2026 12:46 AM IST
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सहारनपुर। स्कूलों में नया सत्र शुरू हो चुका है। स्कूलों के कायाकल्प के तमाम दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत आज भी इसकी विपरीत है। गांधी पार्क स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय भी इसका उदाहरण है। बदहाल परिसर दो साल पहले बनी इमारत की सुंदरता पर दाग लगा रहा है। जलभराव और कीचड़ के कारण बच्चे ही नहीं शिक्षक भी परेशान हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं हो रहा।
दरअसल, गांधी पार्क स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण विद्यालयों में से एक है, क्योंकि इसी परिसर में कभी नगर शिक्षा अधिकारी का कार्यालय हुआ करता था। करीब दो बीघा के परिसर वाले इस विद्यालय के लिए स्मार्ट सिटी योजना के तहत नया भवन बनाया गया है, जिसमें लगभग सभी बुनियादी सुविधाएं हैं, लेकिन विद्यालय का परिसर कच्चा ही है। बरसात के दिनों में विद्यालय का परिसर तालाब का रूप ले लेता है। उस स्थिति में बच्चों के साथ ही शिक्षकाें का भी विद्यालय जाना मुश्किल हो जाता है। तीन दिन पहले हुई बारिश के कारण परिसर में इस समय भी कीचड़ की स्थिति है। विद्यालय के मुख्य द्वार की गली भी बदहाल है। गेट के ठीक बाहर एक मलिन बस्ती है, जिनकी चारपाई और अन्य सामान सड़क पर रखा रहता है। मंगलवार को गेट के बाहर चारपाइयों पर गेहूं सूखते नजर आए। एक दुपहिया वाहन खड़ा हुआ था।
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स्वीमिंग पूल का पानी छोड़ते ही बन जाता है तालाब
विद्यालय डॉ. आंबेडकर स्टेडियम से सटा हुआ है। स्टेडियम में बने स्वीमिंग पूल का पानी जब भी बदला जाता है तो पुराने पानी को बाहर नाली में छोड़ा जाता है। निकासी ठीक नहीं होने की वजह से स्वीमिंग पूल का पानी विद्यालय परिसर में घुस जाता है, जिससे परिसर की स्थिति किसी तालाब जैसी बन जाती है।
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32 बच्चे और तीन शिक्षक
विद्यालय में मात्र 32 बच्चों का नामांकन है, जिन्हें पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक तैनात हैं। औसतन 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। यदि 30 के ऊपर एक भी बच्चा हो तो दो शिक्षक तैनात होने चाहिएं, लेकिन यहां तीन शिक्षक हैं। महानगर के अन्य विद्यालयों में भी छात्र संख्या कम और शिक्षक औसत से अधिक हैं। इसकी वजह शहरी क्षेत्र के ज्यादातर बच्चों का निजी स्कूलों में पढ़ना है।
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जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कोमल का कहना है कि गांधी पार्क स्थित विद्यालय का सर्वे कराया जाएगा। परिसर में पानी भरने से रोकने के लिए जो भी कार्य कराना संभव होगा कराया जाएगा।
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दरअसल, गांधी पार्क स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण विद्यालयों में से एक है, क्योंकि इसी परिसर में कभी नगर शिक्षा अधिकारी का कार्यालय हुआ करता था। करीब दो बीघा के परिसर वाले इस विद्यालय के लिए स्मार्ट सिटी योजना के तहत नया भवन बनाया गया है, जिसमें लगभग सभी बुनियादी सुविधाएं हैं, लेकिन विद्यालय का परिसर कच्चा ही है। बरसात के दिनों में विद्यालय का परिसर तालाब का रूप ले लेता है। उस स्थिति में बच्चों के साथ ही शिक्षकाें का भी विद्यालय जाना मुश्किल हो जाता है। तीन दिन पहले हुई बारिश के कारण परिसर में इस समय भी कीचड़ की स्थिति है। विद्यालय के मुख्य द्वार की गली भी बदहाल है। गेट के ठीक बाहर एक मलिन बस्ती है, जिनकी चारपाई और अन्य सामान सड़क पर रखा रहता है। मंगलवार को गेट के बाहर चारपाइयों पर गेहूं सूखते नजर आए। एक दुपहिया वाहन खड़ा हुआ था।
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स्वीमिंग पूल का पानी छोड़ते ही बन जाता है तालाब
विद्यालय डॉ. आंबेडकर स्टेडियम से सटा हुआ है। स्टेडियम में बने स्वीमिंग पूल का पानी जब भी बदला जाता है तो पुराने पानी को बाहर नाली में छोड़ा जाता है। निकासी ठीक नहीं होने की वजह से स्वीमिंग पूल का पानी विद्यालय परिसर में घुस जाता है, जिससे परिसर की स्थिति किसी तालाब जैसी बन जाती है।
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32 बच्चे और तीन शिक्षक
विद्यालय में मात्र 32 बच्चों का नामांकन है, जिन्हें पढ़ाने के लिए तीन शिक्षक तैनात हैं। औसतन 30 बच्चों पर एक शिक्षक होना चाहिए। यदि 30 के ऊपर एक भी बच्चा हो तो दो शिक्षक तैनात होने चाहिएं, लेकिन यहां तीन शिक्षक हैं। महानगर के अन्य विद्यालयों में भी छात्र संख्या कम और शिक्षक औसत से अधिक हैं। इसकी वजह शहरी क्षेत्र के ज्यादातर बच्चों का निजी स्कूलों में पढ़ना है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कोमल का कहना है कि गांधी पार्क स्थित विद्यालय का सर्वे कराया जाएगा। परिसर में पानी भरने से रोकने के लिए जो भी कार्य कराना संभव होगा कराया जाएगा।