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पूर्व प्राचार्य की भूमिका पर शासन स्तर से होगा फैसला

Fri, 24 Jul 2020 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2020 11:21 PM IST
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The role of the former principal will be decided from the government level
सहारनपुर। शेखुल हिन्द मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज में स्टेशनरी खरीद घोटाले में शुरू हुई कार्रवाई से हड़कंप की स्थिति है। पूर्व प्राचार्य भी जांच के घेरे में है, लिहाजा अब वह कह रहे हैं कि जांच कमेटी को मेरा और क्रय समिति का पक्ष भी लेना चाहिए था।
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16 नवंबर 2018 को जब मेडिकल कॉलेज के केंद्रीय भंडारण के लिए 51 लाख रुपये की स्टेशनरी और कंटीजेंसी खरीदी गई थी, उस समय डॉ. अरविंद त्रिवेदी यहां के प्राचार्य थे। वर्तमान में वह मेरठ मेडिकल कॉलेज में तैनात हैं। स्टेशनरी खरीद घोटाले का खुलासा होने पर कमिश्नर संजय कुमार ने जांच बैठाई थी। कमेटी में एडीएम-प्रशासन, एडिशनल कमिश्नर और एसडीएम को शामिल किया था। कमेटी ने जांच सौंपी है, जिसके आधार पर दो संविदा लिपिकों की सेवा समाप्त की जा चुकी है। अन्य लिपिकों के निलंबन की संस्तुति की गई थी, साथ ही क्रय समिति शामिल लोगों पर विभागीय कार्रवाई के लिए लिखा, जिसमें तत्कालीन प्राचार्य भी फंसते नजर आ रहे हैं।
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मेरा पक्ष भी तो लेना चाहिए था : त्रिवेदी
पूर्व प्राचार्य डॉ. अरविंद त्रिवेदी का कहना है कि स्टेशनरी खरीद के समय वह प्राचार्य थे। ऐसे में जांच समिति को उनसे और क्रय समिति सदस्यों का पक्ष भी लेना चाहिए था। उनका कहना है कि जब उन्हें गड़बड़ी का पता चला था तो जांच कराते हुए संबंधित लिपिकों के पटल परिवर्तन कर दिए थे। साथ ही कंपनी का भुगतान रोक दिया था। राजस्व की हानि नहीं होने दी थी, इसके प्रमाण उनके पास हैं।
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निलंबित किए गए दोनों लिपिक
सहारनपुर। स्टेशनरी खरीद घोटाले में जिन दो लिपिकों के निलंबन की संस्तुति की गई थी। मेडिकल कॉलेज के एक अधिकारी ने बताया कि दोनों लिपिकों को निलंबित कर दिया गया है।

मंडलायुक्त संजय कुमार का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में स्टेशनरी खरीद घोटाले के संबंध में शासन को रिपोर्ट भेज दी गई है। पूर्व प्राचार्य की क्या भूमिका थी, उस बारे में शासन स्तर से भी जांच होगी और उनका पक्ष भी लिया जाएगा।
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