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एनजीटी की रोक के बाद भी अवैध खनन
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 25 Oct 2016 01:43 AM IST
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राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने भले ही सहारनपुर में खनन पर पूरी तरह रोक लगा रखी हो, मगर यहां कागजों में खेल कर धड़ल्ले से अवैध खनन कराया जा रहा है। जिला पंचायत के खनन अभिवहन शुल्क में जिले में चल रहे खनन का खुलासा हो रहा है।
हर महीने सैकड़ों खान वाहनों से जिला पंचायत को लाखों रुपये का राजस्व होता है। अवैध खनन पर परदा डालने के लिए प्रशासन ने अब जिला पंचायत के अभिवहन शुल्क पर ही रोक लगा दी गई है। हालांकि मंडलायुक्त ने अब इस पूरे मामले में डीएम से रिपोर्ट मांगी है।
दरअसल, जिला पंचायत जिले में खनन अभिवहन वाहनों से शुल्क लेता है। अभिवहन वाहनों से शुल्क वसूली से अवैध खनन का खुलासा होने पर प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का ही आदेश जारी कर दिया। हालांकि मंडलायुक्त के पास पूरा मामला पहुंचने के बाद अवैध खनन पर रोक के आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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आपको बता दें जिला पंचायत ने टेंडर किया और इसका ठेका छोड़ दिया गया था। मगर, उच्च न्यायालय ने इस मामले में जिला पंचायत को अपने कर्मचारियों से वसूली करने का आदेश दिया। 16 दिसंबर 2015 से जिला पंचायत ने विभागीय वसूली शुरू कर दी। इसमें हर महीने जिला पंचायत को हर महीने लाखों रुपये का राजस्व मिलने लगा। मई 2016 में एक भी वाहन से जिला पंचायत की वसूली नहीं हो पाई है।
मगर, इसके बाद हर महीने सैकड़ों वाहनों से खनन अभिवहन शुल्क वसूला जा रहा है। सितंबर 2016 में चार हजार 680 वाहनों से करीब साढ़े सात लाख रुपये वसूला गया। इससे जिले में चल रहे अवैैध खनन का खुलासा हो रहा है। यह बात भी साफ है कि अवैध खनन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। यही कारण है महीने में तीन हजार से पांच हजार वाहनों से खनन का परिवहन किया गया।
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हर महीने सैकड़ों खान वाहनों से जिला पंचायत को लाखों रुपये का राजस्व होता है। अवैध खनन पर परदा डालने के लिए प्रशासन ने अब जिला पंचायत के अभिवहन शुल्क पर ही रोक लगा दी गई है। हालांकि मंडलायुक्त ने अब इस पूरे मामले में डीएम से रिपोर्ट मांगी है।
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दरअसल, जिला पंचायत जिले में खनन अभिवहन वाहनों से शुल्क लेता है। अभिवहन वाहनों से शुल्क वसूली से अवैध खनन का खुलासा होने पर प्रशासन ने इस पर रोक लगाने का ही आदेश जारी कर दिया। हालांकि मंडलायुक्त के पास पूरा मामला पहुंचने के बाद अवैध खनन पर रोक के आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
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आपको बता दें जिला पंचायत ने टेंडर किया और इसका ठेका छोड़ दिया गया था। मगर, उच्च न्यायालय ने इस मामले में जिला पंचायत को अपने कर्मचारियों से वसूली करने का आदेश दिया। 16 दिसंबर 2015 से जिला पंचायत ने विभागीय वसूली शुरू कर दी। इसमें हर महीने जिला पंचायत को हर महीने लाखों रुपये का राजस्व मिलने लगा। मई 2016 में एक भी वाहन से जिला पंचायत की वसूली नहीं हो पाई है।
मगर, इसके बाद हर महीने सैकड़ों वाहनों से खनन अभिवहन शुल्क वसूला जा रहा है। सितंबर 2016 में चार हजार 680 वाहनों से करीब साढ़े सात लाख रुपये वसूला गया। इससे जिले में चल रहे अवैैध खनन का खुलासा हो रहा है। यह बात भी साफ है कि अवैध खनन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। यही कारण है महीने में तीन हजार से पांच हजार वाहनों से खनन का परिवहन किया गया।