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Saharanpur News: शरीर से खून निकलने पर नहीं टूटेगा रोजा
Thu, 20 Mar 2025 12:38 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 20 Mar 2025 12:38 AM IST
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देवबंद। जमीयत दावतुल मुसलीमीन की ओर से आरंभ हेल्पलाइन पर बुधवार को एक सवाल के जवाब में उलमा ने कहा कि अगर रोजे की हालत में शरीर से खून निकल जाए तो इससे रोजे पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा और रोजा सलामत रहेगा।
प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि रोजा खोलने के लिए किसी भी हलाल चीज का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन खजूर से रोजा खोलना सुन्नत है। मुसलमानों को चाहिए कि वे हर अमल को सुन्नत के मुताबिक अदा करें।
सवाल: नगीना निवासी बिलाल ने पूछा कि आपने पहले बताया था कि रोजे की हालत में टूथपेस्ट करना सही नहीं है, तो क्या मिस्वाक (दातून) करना जायज होगा, क्या इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
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जवाब: रोजे की हालत में मिस्वाक करना न सिर्फ जायज है, बल्कि सुन्नत भी है। इससे रोजा नहीं टूटेगा। शरीयत में मिस्वाक करने की बहुत फजीलत (महत्ता) है और अगर कोई रोजेदार इसे सुन्नत समझकर करता है, तो उसका सवाब और बढ़ जाता है।
सवाल: गंगोह की बरीराह ने पूछा कि उनके पास सोने-चांदी के जेवरात हैं, लेकिन वह घरेलू महिला हैं और कमाई का जरिया उनके शौहर हैं। ऐसी स्थिति में जकात की जिम्मेदारी किस पर होगी, उन पर या उनके शौहर पर।
जवाब: शरीयत के मुताबिक किसी महिला के पास इतना जेवर या नकद रुपये हैं कि उस पर जकात वाजिब हो जाती है, तो उसे अपनी जकात खुद अदा करनी चाहिए।
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प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन मौलाना कारी इस्हाक गोरा ने कहा कि रोजा खोलने के लिए किसी भी हलाल चीज का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन खजूर से रोजा खोलना सुन्नत है। मुसलमानों को चाहिए कि वे हर अमल को सुन्नत के मुताबिक अदा करें।
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सवाल: नगीना निवासी बिलाल ने पूछा कि आपने पहले बताया था कि रोजे की हालत में टूथपेस्ट करना सही नहीं है, तो क्या मिस्वाक (दातून) करना जायज होगा, क्या इससे रोजा तो नहीं टूटेगा।
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जवाब: रोजे की हालत में मिस्वाक करना न सिर्फ जायज है, बल्कि सुन्नत भी है। इससे रोजा नहीं टूटेगा। शरीयत में मिस्वाक करने की बहुत फजीलत (महत्ता) है और अगर कोई रोजेदार इसे सुन्नत समझकर करता है, तो उसका सवाब और बढ़ जाता है।
सवाल: गंगोह की बरीराह ने पूछा कि उनके पास सोने-चांदी के जेवरात हैं, लेकिन वह घरेलू महिला हैं और कमाई का जरिया उनके शौहर हैं। ऐसी स्थिति में जकात की जिम्मेदारी किस पर होगी, उन पर या उनके शौहर पर।
जवाब: शरीयत के मुताबिक किसी महिला के पास इतना जेवर या नकद रुपये हैं कि उस पर जकात वाजिब हो जाती है, तो उसे अपनी जकात खुद अदा करनी चाहिए।