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खतरे में ऐतिहासिक धरोहर का अस्तित्व

Sun, 05 Jun 2016 11:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Sun, 05 Jun 2016 11:03 PM IST
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The existence of the historical heritage in danger
सिंधु घाटी सभ्यता के हुलास के टीले पर किया गया अतिक्रमण। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
 प्रशासनिक लापरवाही से जिले में ऐतिहासिक धरोहरों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। नानौता क्षेत्र के मनोहरा गांव के पास सिंधु कालीन सभ्यता का हुलास स्थल (टीला) है। इस भूमि पर पहले तो पट्टे काट दिए गए और अब कुछ ही दिन पहले विद्युत निगम ने विद्युत उप केंद्र भी बना दिया है। इससे इस प्राचीन स्थल को खासा नुकसान पहुंचा है। 
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महाभारत कालीन बरसी महादेव मंदिर के पास स्थित हुलास स्थल का उत्खनन का कार्य वर्ष 1978 से 1983 तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पुरातत्वविद् काशीनाथ दीक्षित के नेतृत्व में किया गया था। उत्खनन में इसका आंकलन सिंधु घाटी कालीन स्थली के रूप में हुआ। यहां से मिली ईंटों, सिल बट्टों, मिट्टी के बर्तनों, धातु के औजारों, चूल्हों में से मिला कुछ सामान साढ़े चार हजार साल पुराना आंका गया था।
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इस स्थल का ऐतिहासिक महत्व होने के बावजूद इस पर पट्टे काट दिए गए, जिसके बाद लोगों ने इस पर मकानों का निर्माण कर लिया है। अमर उजाला ने अपने नौ दिसंबर 2014 के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
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इस समाचार को तत्कालीन कमिश्नर तनवीर जफर अली ने गंभीरता से लेते हुए पुरातत्व विभाग से संपर्क कर इसके संरक्षण की बात कही थी। इसके बाद तत्कालीन डीएम डॉ. इंद्रवीर सिंह यादव ने भी स्थल के संरक्षण का आश्वासन दिया था। प्रशासन के हरकत में आने के बाद तहसीलदार उमेश शुक्ला ने जांच के बाद पट्टों को निरस्त करने की संस्तुति करते हुए उप जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपी थी। 

तत्कालीन एसडीएम इंदुमति ने भी पट्टों को गलत पाया था। मगर प्रशासन की ओर से इस ऐतिहासिक स्थल के अस्तित्व को बचाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि प्रशासन की देखरेख में स्थल के पास विद्युत निगम ने उप केंद्र का भवन बना दिया।

विद्युत निगम ने बाउंड्री वॉल बनाने के लिए स्थल को काफी नुकसान पहुंचाया है। ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने के लिए काम कर रहे राजीव उपाध्याय 'यायावर' ने मामले को जिला प्रशासन के संज्ञान में लाकर इस धरोहर को बचाने की बात कही है।  


जनपद के प्रमुख ऐतिहासिक स्थल 
- लखनौती का किला और हुजरे। 
- सढ़ौली का किला।
- सरसावा का टीला (प्राचीन कोट)।
- अंग्रेजों की कब्रगाह, सहारनपुर। 
- सर्किट हाउस के निकट मकबरा। 
- मल्हीपुर और सरसावा स्थित मकबरे। 

अधिकारी कहिन
ऐतिहासिक धरोहरों को बचाना सबकी जिम्मेदारी बनती है। यदि ऐसे स्थलों पर पट्टे काटे गए हैं या कब्जे हुए हैं तो उनकी जांच कराई जाएगी। धरोहरों को बचाने के लिए हरसंभव कदम उठाया जाएगा।   
  - पवन कुमार, जिलाधिकारी। 
 
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