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Saharanpur News: झपट्टा मारकर पकड़ लेता था कौवा, नाम पड़ गया कग्गा
Fri, 24 Jan 2025 12:36 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 24 Jan 2025 12:36 AM IST
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सहारनपुर। शामली में चार बदमाशों के एनकाउंटर के बाद से ही मुस्तफा उर्फ कग्गा का नाम सुर्खियों में है। साल 2011 में कग्गा भले ही एनकाउंटर में मारा गया हो, लेकिन उसके कुछ कारनामें ऐसे हैं, जिसकी अक्सर चर्चाएं होती हैं। मुस्तफा कौवा पकड़ने में माहिर था। इसीलिए उसका नाम कग्गा पड़ गया। वह कभी शूटिंग रेंज में नहीं गया, लेकिन उसका निशाना अचूक था।
मूलरूप से गंगोह के बाढ़ी माजरा गांव का रहने वाला मुस्तफा 10वीं फेल था, जैसे ही उसने किशोर अवस्था में कदम रखा तो उसकी राह बदल गई और अपराध की तरफ बढ़ता चला गया। मुस्तफा कग्गा (कौवा) पकड़ने में माहिर था। ग्रामीण बताते हैं कि मुस्तफा इतना फुर्तीला था कि वह कौवे को झपट्टा मारकर पकड़ लेता था। इसके बाद उसके पैर में घुंघरू बांध देता था। पहली बार एक पड़ोसन के कहने पर कौवा पकड़ा था। इसीलिए मुस्तफा का नाम कग्गा पड़ गया और अपराध की दुनिया में उतरने के बाद गैंग का नाम भी कग्गा के नाम से जाना जाने लगा। कग्गा के एनकाउंटर के बाद मुकीम काला ने गिरोह की कमान संभाल ली थी। एनकाउंटर के समय कग्गा की उम्र करीब 24 साल थी।
मुस्तफा उर्फ कग्गा के बड़े भाई अब्दुल कय्यूम बताते हैं कि उसका निशाना अचूक था। वह कभी शूटिंग रेंज में गया ही नहीं। फिर भी निशाना ऐसा था कि देखने वाला हैरान रह जाए। वह बचपन में घर में रखी एयरगन से निशाना लगाता था। 2009 में अपराध की दुनिया में उतरा और तीतरों के पास पहली लूट की। इसके बाद उसने पिस्टल समेत अत्याधुनिक हथियार उठा लिए और ताबड़तोड़ आपराधिक वारदात को अंजाम देकर जरायम की दुनिया में चर्चित हो गया। कग्गा अविवाहित था, जिसकी एक महिला मित्र थी। परिजनों का कहना है कि वह भी एक साजिश के तहत मुस्तफा के साथ शामिल की गई थी।
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13 दिन के अंदर पाकिस्तान में हो गया था माता-पिता का निधन
अब्दुल कय्यूम ने बताया कि उनकी रिश्तेदारी पाकिस्तान के गुजरांवाला जिले में है। 17 मार्च 2020 को पिता जाहिर हसन और मां बिल्किस पाकिस्तान रिश्तेदारी में गए थे। दोनों हार्ट के मरीज थे। 23 मार्च को लॉकडाउन लग गया था। इसके बाद वह वापस नहीं आ सके। दोनों की दवाई भी खत्म हो गई थी। लॉकडाउन की वजह से दवाई उन तक नहीं पहुंची और पाकिस्तान में वह दवाई नहीं मिली। दवाई नहीं मिलने के कारण तीन जून 2020 को पिता और 16 जून को मां का निधन हो गया था।
मुस्तफा और अरशद लगते थे रिश्ते में भाई
मुस्तफा उर्फ कग्गे के एनकाउंटर के बाद गैंग मुकीम काला ने संभाला। मुकीम काला एनकाउंटर के बाद अरशद चर्चा में आ गया था। अरशद की दादी मुस्तफा के दादी की सगी बहन थी। इस रिश्ते में अरशद और मुस्तफा भाई-भाई लगते हैं। दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे। इसलिए अरशद उसके गैंग में शामिल हो गया था।
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मूलरूप से गंगोह के बाढ़ी माजरा गांव का रहने वाला मुस्तफा 10वीं फेल था, जैसे ही उसने किशोर अवस्था में कदम रखा तो उसकी राह बदल गई और अपराध की तरफ बढ़ता चला गया। मुस्तफा कग्गा (कौवा) पकड़ने में माहिर था। ग्रामीण बताते हैं कि मुस्तफा इतना फुर्तीला था कि वह कौवे को झपट्टा मारकर पकड़ लेता था। इसके बाद उसके पैर में घुंघरू बांध देता था। पहली बार एक पड़ोसन के कहने पर कौवा पकड़ा था। इसीलिए मुस्तफा का नाम कग्गा पड़ गया और अपराध की दुनिया में उतरने के बाद गैंग का नाम भी कग्गा के नाम से जाना जाने लगा। कग्गा के एनकाउंटर के बाद मुकीम काला ने गिरोह की कमान संभाल ली थी। एनकाउंटर के समय कग्गा की उम्र करीब 24 साल थी।
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मुस्तफा उर्फ कग्गा के बड़े भाई अब्दुल कय्यूम बताते हैं कि उसका निशाना अचूक था। वह कभी शूटिंग रेंज में गया ही नहीं। फिर भी निशाना ऐसा था कि देखने वाला हैरान रह जाए। वह बचपन में घर में रखी एयरगन से निशाना लगाता था। 2009 में अपराध की दुनिया में उतरा और तीतरों के पास पहली लूट की। इसके बाद उसने पिस्टल समेत अत्याधुनिक हथियार उठा लिए और ताबड़तोड़ आपराधिक वारदात को अंजाम देकर जरायम की दुनिया में चर्चित हो गया। कग्गा अविवाहित था, जिसकी एक महिला मित्र थी। परिजनों का कहना है कि वह भी एक साजिश के तहत मुस्तफा के साथ शामिल की गई थी।
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13 दिन के अंदर पाकिस्तान में हो गया था माता-पिता का निधन
अब्दुल कय्यूम ने बताया कि उनकी रिश्तेदारी पाकिस्तान के गुजरांवाला जिले में है। 17 मार्च 2020 को पिता जाहिर हसन और मां बिल्किस पाकिस्तान रिश्तेदारी में गए थे। दोनों हार्ट के मरीज थे। 23 मार्च को लॉकडाउन लग गया था। इसके बाद वह वापस नहीं आ सके। दोनों की दवाई भी खत्म हो गई थी। लॉकडाउन की वजह से दवाई उन तक नहीं पहुंची और पाकिस्तान में वह दवाई नहीं मिली। दवाई नहीं मिलने के कारण तीन जून 2020 को पिता और 16 जून को मां का निधन हो गया था।
मुस्तफा और अरशद लगते थे रिश्ते में भाई
मुस्तफा उर्फ कग्गे के एनकाउंटर के बाद गैंग मुकीम काला ने संभाला। मुकीम काला एनकाउंटर के बाद अरशद चर्चा में आ गया था। अरशद की दादी मुस्तफा के दादी की सगी बहन थी। इस रिश्ते में अरशद और मुस्तफा भाई-भाई लगते हैं। दोनों एक ही गांव के रहने वाले थे। इसलिए अरशद उसके गैंग में शामिल हो गया था।