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तीन तलाक पर पीएम निभाएं अपना वादा 

Sat, 18 Mar 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 18 Mar 2017 12:22 AM IST
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teen talaq par PM wada nibhayein
तीन तलाक मामला - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर। तीन तलाक के मामले में केंद्र सरकार के तीन मंत्रालयों और इस्लामिक तालीम के सबसे बड़े मरकज दारुल उलूम देवबंद के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने वाली आतिया साबरी ने प्रधानमंत्री से इस मामले में दखल देने की मांग की है। उनका कहना है कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में इसे मुद्दा बनाया और पार्टी को चार राज्यों में बड़ी जीत मिली है। उन्हें अपना वादा पूरा करना चाहिए।  
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विधानसभा चुनाव में भाजपा ने तीन तलाक के मुद्दे पर मुस्लिम महिलाओं के समर्थन का दावा किया था। यही कारण है वोट देने के बाद उन्हीं महिलाओं ने भाजपा को उनका वादा याद दिलाना शुरू कर दिया है। ऐसे में अब भाजपा के सामने इस वादे को निभाने की चुनौती हो सकती है। दरअसल, दो बेटियों को जन्म देने के कारण तलाक का दंश झेल रही आतिया साबरी अपनी लड़ाई को न्यायालय में लड़ रही है।  उनका दावा है कि चुनाव में भाजपा के किए वादे पर एतबार कर उन्होंने वोट दिया। अब केंद्र सरकार अपने वादे को पूरा कर तीन तलाक पर कानून बनाए। इतना ही नहीं, इस मामले में जारी होने वाले फतवों पर भी रोक की मांग करती हैँ। आतिया का कहना है कि तीन तलाक के नजरिए को देखते हुए मैंने भाजपा को वोट दिया है। 
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आपको बता दें कि सहारनपुर के मंडी कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला आली, तेली वाला चौक निवासी आतिया ने तीन तलाक के मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आतिया ने सुप्रीम कोर्ट में पति की अधूरी सूचना पर देवबंद दारुल उलूम पर फतवा जारी करने का आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की हुई है। इसमें आतिया ने अपने ससुरालियों, केंद्र सरकार के तीन मंत्रालयों कानून एवं न्याय मंत्रालय, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय एवं बाल कल्याण एवं महिला विकास मंत्रालय को भी प्रतिवादी बनाया है। 
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आतिया ने आरोप लगाया कि हरिद्वार के ग्राम जसोद्दरपुर निवासी ससुरालियों ने उसका दहेज के लिए उत्पीड़न किया। उसकी दो लड़कियां पैदा होने के कारण उसे जहर देकर मारने का प्रयास किया और उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया। उसके बाद उसके पति वाजिद ने एक कागज पर तीन तलाक लिखकर उसे बिना जानकारी लिए देवबंद दारुल उलूम से फतवा जारी कराकर उसे मान्य करा लिया। दारुल उलूम को पति ने पूरी और सही जानकारी भी नहीं दी, जबकि दारुल उलूम ने अधूरी जानकारी पर ही फतवा जारी कर दिया, जो गलत है।
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