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सोचा नहीं था ऐसी होगी पहली तीज
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सोचा नहीं था ऐसी होगी पहली तीज
सहारनपुर। कोरोना काल में त्योहारों का रंग फीका हो गया है। तीज पर सामूहिक कार्यक्रम में झूला झूलने और तीज के गीत गाने का नवविवाहिताओं का अरमान भी अधूरा रह गया। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि पहली तीज ऐसी होगी, जिसमें वह बाजार में मन पसंद सामान तक नहीं खरीद पाएंगी। कोरोना काल में शहर से लेकर देहात तक तीज पर्व का उत्साह कम नजर आ रहा है। महानगर में ऑनलाइन तीज महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन सामूहिक रूप से झूला झूलने और कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं।
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सहेलियों संग पर्व मनाने का था मन
पहली बार तीज मना रही बिहारीगढ़ निवासी नवविवाहिता स्वाति पाल ने का कहना है कि कोरोना काल में तीज बिल्कुल फीकी हो गई। हालात सामान्य होते तो वह सहेलियों संग कहीं बाहर घूमने जाती और सजधज कर सामूहिक रूप से झूला झूलती। सोचा नहीं था कि पहली तीज ऐसी होगी।
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नहीं मिल सका मनपसंद का सामान
सरसावा निवासी शैली शर्मा का कहना है कि वह शापिंग भी नहीं कर सकी है। तीज की तैयारी के लिए शहर में बाजार गई थीं, लेकिन वहां न तो मनपसंद रंग के कंगन मिले और न ही अन्य सामान। तीज के लिए साड़ी भी वह नहीं खरीद पाईं। उन्हें पहली तीज की खुशी तो बहुत है, लेकिन पर्व में उल्लास नजर नहीं आ रहा है।
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घर में ही सिमट कर रह गया तीज का उत्साह
छुटमलपुर निवासी सोनिया का कहना है कि ब्यूटी पार्लर बंद हैं। दुकानों पर भी मनपसंद सामान नहीं मिल सका है। कोरोना के चलते पहली तीज की तैयारियों का उत्साह घर में ही सिमट कर रह गया है। उनकी बहुत इच्छा थी कि सहेलियों के साथ झूला झूलेंगी, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के चलते घर में अकेले ही झूला झुलना पड़ रहा है।
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घर में ही मनाएंगी पर्व
देवबंद निवासी पूनम शर्मा ने बताया कि पहली तीज को लेकर ढेरों उमंगें और उल्लास मन में था, लेकिन कोरोना से बचना है तो अभी मन मार कर ही त्योहार मनाना पड़ेगा। वह घर के अंदर ही रह कर परिवार के सदस्यों के साथ पर्व को मनाएंगी।
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भारतीय संस्कृति का प्रतीत है त्योहार
सहारनपुर। हरियाली तीज बड़े ही धूमधाम से मनाया जाती रही है। इसको लेकर महिलाओं के ग्रुप एक साथ झूला झूलते थे और गीत गाते थे, लेकिन कोरोना काल में सब कुछ प्रभावित हुआ है। रामपुर मनिहारान निवासी 75 वर्षीय श्रीमती शकुंतला देवी का कहना है कि बदलते समय के साथ त्योहारों की चमक भी फीकी पड़ गई है। हरियाली तीज भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। इन दिनों धरती-हरी भरी हो जाती है। यह पर्व भगवान शिव और मां पार्वती से जुड़ा है। तीज का पर्व आने से 15 दिन पूर्व ही पेड़ों पर झूले पड़ जाते थे। ग्रुप में एकत्र होकर महिलाएं मेंहदी लगाकर श्रृंगार कर नवविवाहिता के संग गीत गाकर आनंद लेती थी। बुजुर्ग शकुंतला देवी ने बताया कि उनके जमाने में तीज का गीत गाया जाता था, बाग हिंडोले, भइया मेरे पड़ रहे जी। अजी कोई झुल्लो सारा संसार जी। कोर्ट रोड निवासी 80 वर्षीय संतोष गुप्ता बताती है कि तीज की रौनक अलग ही होती थी। गीत गया जाता था कि मदहोश कर देती है तीज की यह बहार, गाता है दिल जब झूमकर झूलों में सखियों के साथ।
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सहारनपुर। कोरोना काल में त्योहारों का रंग फीका हो गया है। तीज पर सामूहिक कार्यक्रम में झूला झूलने और तीज के गीत गाने का नवविवाहिताओं का अरमान भी अधूरा रह गया। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि पहली तीज ऐसी होगी, जिसमें वह बाजार में मन पसंद सामान तक नहीं खरीद पाएंगी। कोरोना काल में शहर से लेकर देहात तक तीज पर्व का उत्साह कम नजर आ रहा है। महानगर में ऑनलाइन तीज महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन सामूहिक रूप से झूला झूलने और कार्यक्रम नहीं हो रहे हैं।
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सहेलियों संग पर्व मनाने का था मन
पहली बार तीज मना रही बिहारीगढ़ निवासी नवविवाहिता स्वाति पाल ने का कहना है कि कोरोना काल में तीज बिल्कुल फीकी हो गई। हालात सामान्य होते तो वह सहेलियों संग कहीं बाहर घूमने जाती और सजधज कर सामूहिक रूप से झूला झूलती। सोचा नहीं था कि पहली तीज ऐसी होगी।
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नहीं मिल सका मनपसंद का सामान
सरसावा निवासी शैली शर्मा का कहना है कि वह शापिंग भी नहीं कर सकी है। तीज की तैयारी के लिए शहर में बाजार गई थीं, लेकिन वहां न तो मनपसंद रंग के कंगन मिले और न ही अन्य सामान। तीज के लिए साड़ी भी वह नहीं खरीद पाईं। उन्हें पहली तीज की खुशी तो बहुत है, लेकिन पर्व में उल्लास नजर नहीं आ रहा है।
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घर में ही सिमट कर रह गया तीज का उत्साह
छुटमलपुर निवासी सोनिया का कहना है कि ब्यूटी पार्लर बंद हैं। दुकानों पर भी मनपसंद सामान नहीं मिल सका है। कोरोना के चलते पहली तीज की तैयारियों का उत्साह घर में ही सिमट कर रह गया है। उनकी बहुत इच्छा थी कि सहेलियों के साथ झूला झूलेंगी, लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के चलते घर में अकेले ही झूला झुलना पड़ रहा है।
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घर में ही मनाएंगी पर्व
देवबंद निवासी पूनम शर्मा ने बताया कि पहली तीज को लेकर ढेरों उमंगें और उल्लास मन में था, लेकिन कोरोना से बचना है तो अभी मन मार कर ही त्योहार मनाना पड़ेगा। वह घर के अंदर ही रह कर परिवार के सदस्यों के साथ पर्व को मनाएंगी।
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भारतीय संस्कृति का प्रतीत है त्योहार
सहारनपुर। हरियाली तीज बड़े ही धूमधाम से मनाया जाती रही है। इसको लेकर महिलाओं के ग्रुप एक साथ झूला झूलते थे और गीत गाते थे, लेकिन कोरोना काल में सब कुछ प्रभावित हुआ है। रामपुर मनिहारान निवासी 75 वर्षीय श्रीमती शकुंतला देवी का कहना है कि बदलते समय के साथ त्योहारों की चमक भी फीकी पड़ गई है। हरियाली तीज भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। इन दिनों धरती-हरी भरी हो जाती है। यह पर्व भगवान शिव और मां पार्वती से जुड़ा है। तीज का पर्व आने से 15 दिन पूर्व ही पेड़ों पर झूले पड़ जाते थे। ग्रुप में एकत्र होकर महिलाएं मेंहदी लगाकर श्रृंगार कर नवविवाहिता के संग गीत गाकर आनंद लेती थी। बुजुर्ग शकुंतला देवी ने बताया कि उनके जमाने में तीज का गीत गाया जाता था, बाग हिंडोले, भइया मेरे पड़ रहे जी। अजी कोई झुल्लो सारा संसार जी। कोर्ट रोड निवासी 80 वर्षीय संतोष गुप्ता बताती है कि तीज की रौनक अलग ही होती थी। गीत गया जाता था कि मदहोश कर देती है तीज की यह बहार, गाता है दिल जब झूमकर झूलों में सखियों के साथ।