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Saharanpur News: 35-35 लाख के बनाए थे सोलर पैनल, 35 माह भी नहीं चले
Sat, 18 Jan 2025 12:06 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sat, 18 Jan 2025 12:06 AM IST
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नगर निगम में लगा सोलर प्लांट
- फोटो : संवाद
सहारनपुर। बिजली और डीजल खर्च को कम करने के लिए नगर निगम द्वारा करीब आठ साल पहले लगाए गए सोलर पैनल कबाड़ बन चुके हैं। नगर निगम के अधिकारियों ने कभी भी इनको चलाने की जरूरत नहीं समझी। यह हालत तब है जब इन नलकूपों पर 35-35 लाख रुपये खर्च किए गए थे, जो 35 माह भी नहीं चले।
दरअसल, महानगर में पेयजल आपूर्ति के लिए नलकूप स्थापित किए गए हैं। नलकूपों को चलाकर पानी घरों तक पहुंचाया जाता है। करीब दस वर्ष पहले, जब बिजली कम आती थी तो नलकूपों का संचालन जनरेटर चलाकर किया जाता था। जनरेटर में प्रत्येक माह लाखों रुपये का डीजल खर्च दिखाया जाता था। इसीलिए नगर निगम के तत्कालीन निगम अधिकारियों ने डीजल खर्च को कम करने के लिए महानगर के तीन बड़े नलकूपों पर सोलर पैनल लगाए थे।
इनमें प्रत्येक पैनल करीब 35 लाख रुपये का था। इनमें से हकीकतनगर स्थित नलकूप पर दो, नुमाइश कैंप स्थित नलकूप पर एक और मातागढ़ स्थित नलकूप पर एक था। निगम सूत्रों ने बताया कि यह सोलर पैनल शुरू में करीब छह महीने चले, लेकिन उसके बाद से बंद पड़े हैं। यानी बंद हुए भी करीब आठ साल बीत चुके हैं। निगम अधिकारियों कर लापरवाही के कारण यह कबाड़ की स्थिति में पहुंच चुके हैं।
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निगम परिसर में भी लगा है पैनल
नगर निगम की पुरानी बिल्डिंग पर सोलर पैनल लगाया गया था। यह पैनल बिल्डिंग के बिजली खर्च को कम करने तथा बिल्डिंग में लगे फायर हाइड्रेंट सिस्टम के संचालन के लिए लगा था, लेकिन दुर्भाग्यवश न तो फायर हाइड्रेंट सिस्टम कभी चला न ही सोलर पैनल। कर्मचारियों ने बताया कि सोलर पैनल शुरू में जब चला तो अधिकारियों ने अपने दफ्तरों के एसी भी उसी से जोड़ लिए थे, जिसकी वजह से उसकी बैटरी खराब हो गई। तब से अधिकारियों ने इसके पुन: संचालन की जरूरत नहीं समझी।
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दरअसल, महानगर में पेयजल आपूर्ति के लिए नलकूप स्थापित किए गए हैं। नलकूपों को चलाकर पानी घरों तक पहुंचाया जाता है। करीब दस वर्ष पहले, जब बिजली कम आती थी तो नलकूपों का संचालन जनरेटर चलाकर किया जाता था। जनरेटर में प्रत्येक माह लाखों रुपये का डीजल खर्च दिखाया जाता था। इसीलिए नगर निगम के तत्कालीन निगम अधिकारियों ने डीजल खर्च को कम करने के लिए महानगर के तीन बड़े नलकूपों पर सोलर पैनल लगाए थे।
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इनमें प्रत्येक पैनल करीब 35 लाख रुपये का था। इनमें से हकीकतनगर स्थित नलकूप पर दो, नुमाइश कैंप स्थित नलकूप पर एक और मातागढ़ स्थित नलकूप पर एक था। निगम सूत्रों ने बताया कि यह सोलर पैनल शुरू में करीब छह महीने चले, लेकिन उसके बाद से बंद पड़े हैं। यानी बंद हुए भी करीब आठ साल बीत चुके हैं। निगम अधिकारियों कर लापरवाही के कारण यह कबाड़ की स्थिति में पहुंच चुके हैं।
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निगम परिसर में भी लगा है पैनल
नगर निगम की पुरानी बिल्डिंग पर सोलर पैनल लगाया गया था। यह पैनल बिल्डिंग के बिजली खर्च को कम करने तथा बिल्डिंग में लगे फायर हाइड्रेंट सिस्टम के संचालन के लिए लगा था, लेकिन दुर्भाग्यवश न तो फायर हाइड्रेंट सिस्टम कभी चला न ही सोलर पैनल। कर्मचारियों ने बताया कि सोलर पैनल शुरू में जब चला तो अधिकारियों ने अपने दफ्तरों के एसी भी उसी से जोड़ लिए थे, जिसकी वजह से उसकी बैटरी खराब हो गई। तब से अधिकारियों ने इसके पुन: संचालन की जरूरत नहीं समझी।