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समय के साथ दफन हो गए प्राधिकरण से जब्त की गई फाइलों के राज

Thu, 12 Dec 2019 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 12 Dec 2019 11:54 PM IST
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Secrets of the files seized from the buried authority over time
सहारनपुर। कागजों में वैध और धरातल पर अवैैध निर्माणों की शिकायत पर दो वर्ष पहले तत्कालीन कमिश्नर ने रात के समय विकास प्राधिकरण पर छापा मारा था। उन्होंने अभियंताओं की अलमारियों के ताले तुड़वाकर फाइलें जब्त की थी। कुछ समय बाद तत्कालीन उपाध्यक्ष रहे मनोज सिंह ने भी अभियंताओं की फाइलें जब्त की थी। फाइलें जब्त करने का मकसद निर्माणों की गड़बड़ियों को पकड़ना था। मगर उक्त फाइलों में क्या मिला, यह आज तक किसी को पता नहीं चला है।
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अवैध निर्माणों और कॉलोनियों को लेकर प्राधिकरण के जिम्मेदार लोगों की नीयत पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। वर्ष 2017 में तत्कालीन कमिश्नर को शिकायत मिली थी कि प्राधिकरण की फाइलों में अनेक ऐसे निर्माण वैध दर्ज हैं, जो कि धरातल पर अवैध हैं। शिकायतों के आधार पर कमिश्नर ने रात के समय अचानक से प्राधिकरण पर छापा मारा था। उन्होंने वीडियोग्राफी के साथ अभियंताओं की अलमारियों के ताले तुड़वाकर उनमें से निर्माणों से जुड़ी फाइलें जब्त की थी। इसके बाद अलमारियों को सील कर दिया गया था। उम्मीद थी कि उक्त फाइलों में अधिकारियों और अभियंताओं की गड़बड़ियां सामने आएंगी, मगर समय के साथ मामला दबता चला गया। आज तक पता नहीं चल सका है कि उक्त फाइलों की जांच में क्या मिला था और क्या नहीं। किसी अभियंता के खिलाफ कार्रवाई तक नहीं हुई। कमिश्नर के बाद तत्कालीन उपाध्यक्ष मनोज सिंह ने भी कुछ अभियंताओं की अलमारियों से जबरन फाइलें निकलवाई थीं। कहा गया था कि फाइलें अभियंताओं की कारगुजारियों को पकड़ने के लिए निकलवाई गई हैं। फाइलों के राज भी समय के साथ दफन हो गए। ऐसी स्थिति में उच्चाधिकारियों पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। इतना ही नहीं, एक मामले में तो प्राधिकरण के ही एक लिपिक ने उपाध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए शासन से शिकायत की थी।
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कमाई घटने पर उठ रहे सवाल
शहर लगातार बढ़ रहा है। नई कॉलोनियां और निर्माण लगातार चल रहे हैं। मगर हैरानी की बात यह है कि विकास प्राधिकरण की कमाई बढ़ने की बजाय कम रही है। विकास प्राधिकरण सूत्रों ने जो आंकड़े उपलब्ध कराए हैं वह तो यही साबित करते हैं। वर्ष 2016-17 में एसडीए की आय 24 करोड़ रुपये रही थी, जो वर्ष 2017-18 में घटकर मात्र 13 करोड़ रुपये रही। ऐसे में प्राधिकरण अधिकारियों और अभियंताओं की कार्यप्रणाली और नीयत पर सवाल उठना लाजिमी है। वर्ष 2018-19 और 2019-20 के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो सके हैं।
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पूर्व में क्या हुआ और क्या नहीं। इसके बारे में कुछ भी कहना ठीक नहीं है, मगर भविष्य में तमाम कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए व्यवस्था में सुधार किया जा रहा है। निर्माणों और कॉलोनियों से जुड़ी सभी फाइलों को अपडेट कराने के साथ ही ऑनलाइन किया जा रहा है, जिससे गड़बड़ी होने की गुंजाइश ही ना रहे।
ज्ञानेंद्र सिंह, कार्यवाहक उपाध्यक्ष, एसडीए।
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