{"_id":"66427b92a7354c8547025914","slug":"sdo-and-clerks-office-has-to-be-closed-during-rains-saharanpur-news-c-30-1-smrt1014-123545-2024-05-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: बारिश में बंद करना पड़ता है एसडीओ और क्लर्क का दफ्तर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: बारिश में बंद करना पड़ता है एसडीओ और क्लर्क का दफ्तर
Tue, 14 May 2024 02:14 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Tue, 14 May 2024 02:14 AM IST
विज्ञापन
फतेहपुर बिजलीघर में जर्जर कार्यालय की निकली पड़ी खिड़की। संवाद
छुटमलपुर। यह जानकर शायद आप भी हैरान होंगे कि बरसात शुरू होते ही एक बिजलीघर में एसडीओ और क्लर्क का कार्यालय चार माह के लिए बंद करना पड़ जाता है। इसकी वजह है कि बिजलीघर की इमारत जर्जर होना। यहां बात कर रहे हैं छुटमलपुर नगर पंचायत के 64 साल पहले बने बिजलीघर की।
वर्ष 1970 में उस वक्त की फतेहपुर भादो ग्राम पंचायत में इस बिजलीघर की स्थापना हुई थी। कंट्रोल रूम और कर्मचारियों के लिए आधा दर्जन आवास बनाए गए थे। समय के साथ आबादी बढ़ी तो यहां उप खंड कार्यालय भी बना दिया गया। इससे जीवाला, मथाना, फतेहपुर, खुशहालीपुर और तोता टांडा विद्युत उप केंद्र जुड़े हैं, जबकि 33 केवीए बिजलीघर से आठ फीडरों छुटमलपुर, अल्लीवाला, गणेशपुर, वर्ल्ड बैंक, औरंगाबाद, अस्पताल, कमेशपुर और फतेहपुर से जुड़े पचास गांवों को सप्लाई यहीं से होती है। करीब 16 हजार उपभोक्ता इस बिजलीघर से जुड़े हैं।
बिजलीघर पर बने आवासों के खिड़की दरवाजे दीमक चट कर गई है। लिंटर बरसात में टपकता है। जिन दो आवासों को साफ सफाई करके एसडीओ कार्यालय और लिपिक कक्ष बना रखा है। उनके हालात भी ठीक नहीं है। दरवाजे खिड़की जर्जर होने के कारण कई बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। बारिश के चार महीने इन दोनों कार्यालय को कर्मचारी खाली कर देते हैं। ऐसे में जीवाला गांव में बने बिजलीघर पर अस्थायी रूप में कार्यालय चलता है। बदहाली का आलम यह है कि बिजलीघर के शौचालय तक ध्वस्त हो चुके हैं।
विज्ञापन
उपखंड अधिकारी सुरेंद्र यादव बताते हैं कि जर्जर इमारत की वीडियो भेजने के साथ ही अफसरों को पत्र लिखकर यहां की बदहाली से अवगत करा चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट बता दिया कि आने वाली बरसात में यहां नहीं बैठेंगे। क्योंकि इमारत का लिंटर कभी भी गिर सकता है। ऐसे में कौन अपनी जान जोखिम में डालेगा।
रिकार्ड रुम में निकल आते हैं सांप
परिसर में ऊंची घास और जंगली पेड़ खड़े हैं। रात की बात तो दूर दिन में भी कर्मचारी उनमें जाने से डरते हैं। रिकार्ड रूम और बिल जमा करने वाले कार्यालय में अक्सर सांप निकल आते हैं। इस कारण कर्मचारी उसमें नहीं बैठते हैं। कैशियर प्रभात कुमार का कहना है कि कई बार उसमें सांप निकल चुके हैं। ऐसे में वह कंट्रोल रूम के बरामदे में ही बैठ कर बिल जमा करते हैं।
सभी जर्जर इमारतों के नवीनीकरण के प्रस्ताव बना कर उच्चाधिकारियों को भेज रखे हैं। स्वीकृत होते ही काम शुरु करा दिया जाएगा।
- नवी सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड बेहट
विज्ञापन
वर्ष 1970 में उस वक्त की फतेहपुर भादो ग्राम पंचायत में इस बिजलीघर की स्थापना हुई थी। कंट्रोल रूम और कर्मचारियों के लिए आधा दर्जन आवास बनाए गए थे। समय के साथ आबादी बढ़ी तो यहां उप खंड कार्यालय भी बना दिया गया। इससे जीवाला, मथाना, फतेहपुर, खुशहालीपुर और तोता टांडा विद्युत उप केंद्र जुड़े हैं, जबकि 33 केवीए बिजलीघर से आठ फीडरों छुटमलपुर, अल्लीवाला, गणेशपुर, वर्ल्ड बैंक, औरंगाबाद, अस्पताल, कमेशपुर और फतेहपुर से जुड़े पचास गांवों को सप्लाई यहीं से होती है। करीब 16 हजार उपभोक्ता इस बिजलीघर से जुड़े हैं।
विज्ञापन
बिजलीघर पर बने आवासों के खिड़की दरवाजे दीमक चट कर गई है। लिंटर बरसात में टपकता है। जिन दो आवासों को साफ सफाई करके एसडीओ कार्यालय और लिपिक कक्ष बना रखा है। उनके हालात भी ठीक नहीं है। दरवाजे खिड़की जर्जर होने के कारण कई बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। बारिश के चार महीने इन दोनों कार्यालय को कर्मचारी खाली कर देते हैं। ऐसे में जीवाला गांव में बने बिजलीघर पर अस्थायी रूप में कार्यालय चलता है। बदहाली का आलम यह है कि बिजलीघर के शौचालय तक ध्वस्त हो चुके हैं।
विज्ञापन
उपखंड अधिकारी सुरेंद्र यादव बताते हैं कि जर्जर इमारत की वीडियो भेजने के साथ ही अफसरों को पत्र लिखकर यहां की बदहाली से अवगत करा चुके हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट बता दिया कि आने वाली बरसात में यहां नहीं बैठेंगे। क्योंकि इमारत का लिंटर कभी भी गिर सकता है। ऐसे में कौन अपनी जान जोखिम में डालेगा।
रिकार्ड रुम में निकल आते हैं सांप
परिसर में ऊंची घास और जंगली पेड़ खड़े हैं। रात की बात तो दूर दिन में भी कर्मचारी उनमें जाने से डरते हैं। रिकार्ड रूम और बिल जमा करने वाले कार्यालय में अक्सर सांप निकल आते हैं। इस कारण कर्मचारी उसमें नहीं बैठते हैं। कैशियर प्रभात कुमार का कहना है कि कई बार उसमें सांप निकल चुके हैं। ऐसे में वह कंट्रोल रूम के बरामदे में ही बैठ कर बिल जमा करते हैं।
सभी जर्जर इमारतों के नवीनीकरण के प्रस्ताव बना कर उच्चाधिकारियों को भेज रखे हैं। स्वीकृत होते ही काम शुरु करा दिया जाएगा।
- नवी सिंह, अधिशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड बेहट