फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Saharanpur News ›   Scientists hope, can find more fossils

शिवालिक में पहली बार जीवाश्मों की तलाश करने आ रहे वैज्ञानिक

Fri, 19 Jun 2020 10:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 19 Jun 2020 10:45 PM IST
विज्ञापन
Scientists hope, can find more fossils
सहारनपुर: वनविभाग कार्यालय पर पत्रकार वार्ता में 50 लाख साल पुराना हाथी के दांत का जवड़ा दिखाते मु? - फोटो : SAHARANPUR
वैज्ञानिकों में जगी उम्मीद, मिल सकते हैं और जीवाश्म
विज्ञापन

सहारनपुर। शिवालिक के जंगलों में 50 लाख साल पुराना हाथी का जीवाश्म मिलने से वैज्ञानिकों और वन विभाग के चेहरे पर चमक आ गई है। वन्य जीव वैज्ञानिक और जीवाश्मों पर काम करने वाले वैज्ञानिकों ने शिवालिक में कई राज दफन होने की प्रबल संभावना जताई है। वन विभाग की ओर से जीवाश्मों की खोज के लिए शिवालिक में जीवाश्म वैज्ञानिकों को न्यौता दिया है। दरअसल, हाथी का जो जीवाश्म मिला है, वह हिप्पोपोटेमस, जिराफ, घोड़ा जैसे जीव के जीवाश्मों की मौजूदगी की ओर इशारा करता है। वैज्ञानिक और वन विशेषज्ञ शिवालिक के सीने में दफन ऐसे राज खोजने के लिए पहली बार आएंगे।
हाथी के पूर्वज का जो जीवाश्म मिला है, वह यह बताता है कि 50 लाख साल पहले ही हाथी की प्रजातियों की शुरुआत हो गई थी। जो कुछ समय बाद विलुप्त हो गईं। वैज्ञानिकों ने जीवाश्म की उम्र की सीमा तय की तो यह उसी वक्त मान लिया गया कि शिवालिक वन क्षेत्र में कई जीवाश्म वन्य जीवों के हो सकते हैं। अब वन विभाग सहारनपुर की ओर से वैज्ञानिकों के साथ सहमति सर्वे को लेकर बनी है। यह पहला अवसर होगा, जब जीवाश्म पर काम करने वाले वैज्ञानिक शिवालिक की पहाड़ियों की तलहटी सहित अन्य का सर्वे करेंगे। दरअसल, जीवाश्म पहाड़ियों के टूटने या दरकने के बाद जब तलहटी में गिर जाते हैं तो वैज्ञानिक इसकी पहचान करते हैं। कई बार तेज बहाव में बहकर ये जीवाश्म दूर भी निकल जाते हैं।
विज्ञापन

अन्य जीवाश्मों से की गई तुलना
हाथी के जीवाश्म के एक हिस्से की वाडिया इंस्टीट्यूट देहरादून के म्यूजियम में रखे गए जीवाश्मों के नमूने से तुलना की गई। जिसमें ये बात सामने आई कि जम्मू की तलहटी, चंडीगढ़ के करीब, हिमाचल प्रदेश के कालाअंब, साकेती में कुछ जीवों के जीवाश्म मिले हैं। ये स्टेगोडॉन नेपाल और पाकिस्तान की तलहटी में भी मिलते हैं। वाडिया के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि जहां इसकी उपस्थिति होती है, वहां संभवत: बहुत घना जंगल और नदी व नहरें रही होंगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

और पुख्ता हुई टाइगर रिजर्व की सोच
मुख्य वन संरक्षक वीके जैन ने बताया कि टाइगर रिजर्व को लेकर कवायद की जा रही है। कई दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीव मिले हैं। सभी का डेटा बैंक बनाकर डब्ल्यूडब्ल्यूआई देहरादून को भेज दिया है। सुझाव मिलते ही इस ओर काम शुरू कर दिया जाएगा।
क्या है स्टेगोडॉन
यह प्राचीन हाथियों की एक प्रजाति थी, जिसे स्टेगोडॉन कहा जाता है। इसका एक दांत 12 से 18 फीट का होता था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed