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अहंकार को त्याग कर ही होगा उद्घार
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साऊथ सिटी मैदान पर प्रभु जी का परिवार की ओर से आयोजित अष्टोत्तर शत के दौरान गऊमाता स्थल और यज्ञशा?
- फोटो : SAHARANPUR
अहंकार को त्याग कर ही होगा उद्धार
सहारनपुर। प्रभु जी का परिवार के तत्वावधान में चल रहे अष्टोत्तर शत, नवकुंडीय यज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा और गऊ पूजन में बृहस्पतिवार देव भूमि हरिद्वार से दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज, महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद भी कार्यक्रम शामिल हुए। कैलाशानंद महाराज, स्वामी ज्ञानानंद महाराज और कथा व्यास जगतगुरु राघवाचार्य ने कहा कि अहंकार को त्याग कर ही मनुष्य का कल्याण होगा।
साउथ सिटी में चल रहे नौ दिवसीय धार्मिक उत्सव में बृहस्पतिवार को हरिद्वार से दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज और महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रभु जी का परिवार के अध्यक्ष पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय और आचार्य संजीव शास्त्री ने अंग वस्त्र भेंटकर संतों का स्वागत किया। अयोध्या से कथा व्यास जगतगुरु राघवाचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने बचपन से ही उद्धार करना शुरू कर दिया था। उन्होंने बचपन में ही पूतना का उद्धार किया। उन्होंने गिरिराज धारण की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने सात दिन तक पर्वत को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाए रखा था। एक दिन में आठ प्रहर होते हैं और यहीं से भगवान श्री कृष्ण को 56 भोग लगाए जाने की प्रथा शुरू हुई।
इस दौरान मुख्य रूप से जिला जज सर्वेश कुमार, वाणिज्य कर अधिकारी वीरेंद्र कुमार पांडेय, पुष्पेंद्र चौधरी, पूर्व विधायक राजीव गुंबर, सुरेंद्र कपिल, विश्वजीत पुंडीर, राहुल चौधरी, उदयवीर शर्मा, नेहा जिंदल, आरपी जिंदल, प्रोफेसर राघवेंद्र स्वामी, राजकुमार राजू, राकेश जैन, सुधाकर अग्रवाल, विवेक गुप्ता, केजी अग्रवाल, विकास मित्तल, आचार्य जय प्रकाश, वीणा बजाज, उदयवीर शर्मा, अमित जैन, मानव अग्रवाल, ओमप्रकाश फुटेला, पंडित दीपक अग्निहोत्री, डाक्टर गोपाल शर्मा उपस्थित रहे।
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श्रीमद्भागवत स्वयं में भगवान: ज्ञानानंद
सहारनपुर। महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की प्रत्येक लीला अपने आप में श्रीमद्भागवत गीता है और श्रीमद्भागवत गीता स्वयं भगवान हैं। श्रीमद्भागवत हमें जीवन जीने कला सिखाती है। प्रत्येक मनुष्य को श्रीमद्भागवत का अनुसरण करना चाहिए। इसके साथ ही अहंकार को त्यागना होगा। अहंकार से जीवन में बुराइयां आती हैं, जो मनुष्य की असफलता का कारण बनती है।
सीखने के लिए बालक बने रहना जरूरी: कैलाशानंद
सहारनपुर। दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत में छठे दिन प्रभु श्रीकृष्ण की बाल लीला आती है। बाल लीला के महत्व का पता इसी से लगाया जा सकता है कि गोस्वामी जी ने लिखा था कि जो बालक बना, उसी ने जीवन में सीखा। अगर आपके अंदर अहंकार आ जाएगा तो जीवन में कुछ भी नहीं सीख पाएंगे। सीखने और ज्ञान पाने के लिए बालक बना रहना होगा।
दी आहुति, की परिक्रमा
सहारनपुर। बृहस्पतिवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला और गऊमाता की परिक्रमा की और इसके साथ भंडारे मेें प्रसाद ग्रहण किया। सुबह के समय श्रीमद्भागवत यजमानों ने मूल पाठ किया और इसके पश्चात यज्ञ में आहुति डाली।
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सहारनपुर। प्रभु जी का परिवार के तत्वावधान में चल रहे अष्टोत्तर शत, नवकुंडीय यज्ञ, श्रीमद्भागवत कथा और गऊ पूजन में बृहस्पतिवार देव भूमि हरिद्वार से दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज, महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद भी कार्यक्रम शामिल हुए। कैलाशानंद महाराज, स्वामी ज्ञानानंद महाराज और कथा व्यास जगतगुरु राघवाचार्य ने कहा कि अहंकार को त्याग कर ही मनुष्य का कल्याण होगा।
साउथ सिटी में चल रहे नौ दिवसीय धार्मिक उत्सव में बृहस्पतिवार को हरिद्वार से दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज और महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। प्रभु जी का परिवार के अध्यक्ष पंडित अभिषेक कृष्णात्रेय और आचार्य संजीव शास्त्री ने अंग वस्त्र भेंटकर संतों का स्वागत किया। अयोध्या से कथा व्यास जगतगुरु राघवाचार्य महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने बचपन से ही उद्धार करना शुरू कर दिया था। उन्होंने बचपन में ही पूतना का उद्धार किया। उन्होंने गिरिराज धारण की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने सात दिन तक पर्वत को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाए रखा था। एक दिन में आठ प्रहर होते हैं और यहीं से भगवान श्री कृष्ण को 56 भोग लगाए जाने की प्रथा शुरू हुई।
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इस दौरान मुख्य रूप से जिला जज सर्वेश कुमार, वाणिज्य कर अधिकारी वीरेंद्र कुमार पांडेय, पुष्पेंद्र चौधरी, पूर्व विधायक राजीव गुंबर, सुरेंद्र कपिल, विश्वजीत पुंडीर, राहुल चौधरी, उदयवीर शर्मा, नेहा जिंदल, आरपी जिंदल, प्रोफेसर राघवेंद्र स्वामी, राजकुमार राजू, राकेश जैन, सुधाकर अग्रवाल, विवेक गुप्ता, केजी अग्रवाल, विकास मित्तल, आचार्य जय प्रकाश, वीणा बजाज, उदयवीर शर्मा, अमित जैन, मानव अग्रवाल, ओमप्रकाश फुटेला, पंडित दीपक अग्निहोत्री, डाक्टर गोपाल शर्मा उपस्थित रहे।
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श्रीमद्भागवत स्वयं में भगवान: ज्ञानानंद
सहारनपुर। महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण की प्रत्येक लीला अपने आप में श्रीमद्भागवत गीता है और श्रीमद्भागवत गीता स्वयं भगवान हैं। श्रीमद्भागवत हमें जीवन जीने कला सिखाती है। प्रत्येक मनुष्य को श्रीमद्भागवत का अनुसरण करना चाहिए। इसके साथ ही अहंकार को त्यागना होगा। अहंकार से जीवन में बुराइयां आती हैं, जो मनुष्य की असफलता का कारण बनती है।
सीखने के लिए बालक बने रहना जरूरी: कैलाशानंद
सहारनपुर। दक्षिण काली पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत में छठे दिन प्रभु श्रीकृष्ण की बाल लीला आती है। बाल लीला के महत्व का पता इसी से लगाया जा सकता है कि गोस्वामी जी ने लिखा था कि जो बालक बना, उसी ने जीवन में सीखा। अगर आपके अंदर अहंकार आ जाएगा तो जीवन में कुछ भी नहीं सीख पाएंगे। सीखने और ज्ञान पाने के लिए बालक बना रहना होगा।
दी आहुति, की परिक्रमा
सहारनपुर। बृहस्पतिवार को भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु कार्यक्रम शामिल हुए। श्रद्धालुओं ने यज्ञशाला और गऊमाता की परिक्रमा की और इसके साथ भंडारे मेें प्रसाद ग्रहण किया। सुबह के समय श्रीमद्भागवत यजमानों ने मूल पाठ किया और इसके पश्चात यज्ञ में आहुति डाली।

साऊथ सिटी मैदान पर प्रभु जी का परिवार की ओर से आयोजित अष्टोत्तर शत में पहुंचने पर कैलाशानंद महारा- फोटो : SAHARANPUR

साऊथ सिटी मैदान पर प्रभु जी का परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के दौरान मंच पर विराजमान क?- फोटो : SAHARANPUR

साऊथ सिटी मैदान पर प्रभु जी का परिवार की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रद्घालु और दंडी स्- फोटो : SAHARANPUR

साऊथ सिटी मैदान पर प्रभु जी का परिवार की ओर से आयोजित अष्टोत्तर शत में पूजा अर्चना करते यजमान।- फोटो : SAHARANPUR