यूपी: उप जिलाधिकारी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद को भेजा नोटिस, 20 साल पुराना है मामला
उप जिलाधिकारी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद को नोटिस भेजा है। जानिए किस मामले में नोटिस भेजा गया है।
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उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद और अन्य लोगों पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगा है। उप जिलाधिकारी सदर की तरफ से उनको नोटिस भेजा है, जिसमें अंबाला रोड पर मेघछप्पर स्थित राजकीय आस्थान नलकूप विभाग की करीब 250 वर्गमीटर भूमि पर कब्जा करने का आरोप है।
उप जिलाधिकारी सदर अनिल कुमार सिंह ने बताया कि शासन के निर्देश पर सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त करने का अभियान चल रहा है। इसी के तहत राजस्व अभिलेखों की पड़ताल में पाया गया कि ग्राम मेघछप्पर के खसरा संख्या 264 की 794 वर्गमीटर भूमि राजकीय आस्थान के रूप में दर्ज है जो राजकीय संपत्ति है। मौके पर पाया गया कि कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद ने इस गाटे की लगभग 250 वर्गमीटर भूमि पर कब्जा करके कार्यालय बनाया हुआ है।
तहसील के अधिकारियों व कर्मचारियों ने भूमि खाली करने के लिए इमरान मसूद को कई बार सूचित किया, लेकिन कब्जा नहीं हटाया गया। इस पर एसडीएम द्वारा अपने न्यायालय में पीपी एक्ट की धारा 4 के अंतर्गत वाद दर्ज करके नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में कहा है कि दो अगस्त तक न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत करें। यदि इमरान मसूद अपना पक्ष नहीं रखते हैं और कब्जा नहीं हटाते हैं तो बलपूर्वक बेदखली की कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना भी वसूल किया जाएगा। एसडीएम के अनुसार इमरान मसूद के अलावा उनके परिजनों में सलमान मसूद, जीशान मसूद और फैजान मसूद ने भी राजकीय आस्थान की भूमि पर कब्जा किया हुआ है। उन्हें भी इसी प्रकार के नोटिस जारी किए गए हैं।
किला प्रकरण में भी इसी प्रावधान से हुआ आदेश
एसडीएम सदर ने बताया कि राजकीय संपत्ति से कब्जा हटवाने के लिए पीपी एक्ट के अंतर्गत सुनवाई करके कार्रवाई का प्रावधान है। गंगोह क्षेत्र में लखनौती के किले को खाली करने का आदेश भी इसी अधिनियम के तहत किया गया है।
हमने कोई अवैध कब्जा नहीं किया: मसूद
कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव इमरान मसूद का कहना है कि हमने किसी भी सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। जो भी निर्माण है वह 20 साल पुराना है और बैनामे के आधार पर ली गई जमीन पर ही निर्माण कराया है। प्रशासन पैमाइश कर ले और निष्पक्षता के साथ सीमांकन कर दे। नोटिस की जानकारी मिली है, उसका जवाब दिया जाएगा। प्रशासन बेवजह परेशान करने के लिए नोटिस भेज रहा है, जिससे हम डरने वाले नहीं हैं।