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प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व बनाने की तैयारी
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सहारनपुर। शिवालिक वन प्रभाग के आरक्षित वन क्षेत्रों में दुर्लभ प्रजातियों के जीव मिलने के बाद प्रदेश का चौथा टाइगर रिजर्व बनाने का रास्ता साफ होता जा रहा है। इसी के तहत मंडलायुक्त ने प्रस्ताव बनाकर प्रिंसिपल सेक्रेटरी वन विभाग को भेज दिया है।
पिछले दिनों विश्व प्रकृति निधि (डब्लयूडब्लयूएफ) की ओर से शिवालिक क्षेत्र में लगाए गए 312 कैमरों में दुर्लभ प्रजातियों के जीवों की तस्वीरें कैद हुई थी। इसके साथ 200 कैमरों में तेंदुए दिखे थे। इसके साथ ही जब 312 कैमरों की पड़ताल की गई तो येलो थ्रोटेड मार्टनंस और सीविट बिल्लियों की किस्में कॉमन, पाम, मास्कड, लेपर्ड कैट की तस्वीर भी सामने आई। यह सभी प्रजातियां बेहद संकटग्रस्त श्रेणी में है। यह प्रजातियां शिवालिक वन क्षेत्र के मोहंड और बड़कला रेंज में पाई गई। बाघों के लिए जरूरी चीतल, सांभर, जंगली सूकर आदि कई वन्य जीव यहां मौजूद मिले। राजाजी टाइगर रिजर्व उत्तराखंड से सटे होने की वजह से यह वन क्षेत्र प्राकृतिक तौर पर खास है। इसके साथ ही 50 लाख वर्ष पुराना हाथी का दांत भी मिल चुका है।
अब प्रदेश के चौथे टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर मंडलायुक्त संजय कुमार ने ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी वन विभाग को विस्तृत प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। सब कुछ सही रहा तो 33000 हेक्टेयर में शिवालिक टाइगर रिजर्व बनेगा। दुर्लभ प्रजातियां मिलने और टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर अमर उजाला पिछले दिनों समाचार प्रकाशित किया था। मंडलायुक्त संजय कुमार ने बताया कि इसके साथ ही प्रस्ताव स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड और एनटीसीए को भेजा जाएगा। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के चेयरमैन मुख्यमंत्री होते हैं। इन दो जगहों से मंजूरी मिलते टाइगर रिजर्व पर मुहर लग जाएगी।
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वन संरक्षक ने भेजी थी रिपोर्ट
सहारनपुर। कैमरों में दुर्लभ प्रजातियों के कैद पर होने पर मुख्य वन संरक्षक वीके जैन ने पूरी रिपोर्ट प्रमुख वन संरक्षक और मंडलायुक्त को भेजी थी। खास बात यह रही कि प्रस्तावित टाइगर रिजर्व का एक किनारे राजाजी टाइगर रिजर्व और दूसरे छोर पर कलेसर हरियाणा सेंचुरी है। गंगा और यमुना नदी नजदीक होने की वजह से यह जगह बेहद खास है।
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पिछले दिनों विश्व प्रकृति निधि (डब्लयूडब्लयूएफ) की ओर से शिवालिक क्षेत्र में लगाए गए 312 कैमरों में दुर्लभ प्रजातियों के जीवों की तस्वीरें कैद हुई थी। इसके साथ 200 कैमरों में तेंदुए दिखे थे। इसके साथ ही जब 312 कैमरों की पड़ताल की गई तो येलो थ्रोटेड मार्टनंस और सीविट बिल्लियों की किस्में कॉमन, पाम, मास्कड, लेपर्ड कैट की तस्वीर भी सामने आई। यह सभी प्रजातियां बेहद संकटग्रस्त श्रेणी में है। यह प्रजातियां शिवालिक वन क्षेत्र के मोहंड और बड़कला रेंज में पाई गई। बाघों के लिए जरूरी चीतल, सांभर, जंगली सूकर आदि कई वन्य जीव यहां मौजूद मिले। राजाजी टाइगर रिजर्व उत्तराखंड से सटे होने की वजह से यह वन क्षेत्र प्राकृतिक तौर पर खास है। इसके साथ ही 50 लाख वर्ष पुराना हाथी का दांत भी मिल चुका है।
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अब प्रदेश के चौथे टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर मंडलायुक्त संजय कुमार ने ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी वन विभाग को विस्तृत प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। सब कुछ सही रहा तो 33000 हेक्टेयर में शिवालिक टाइगर रिजर्व बनेगा। दुर्लभ प्रजातियां मिलने और टाइगर रिजर्व बनाने को लेकर अमर उजाला पिछले दिनों समाचार प्रकाशित किया था। मंडलायुक्त संजय कुमार ने बताया कि इसके साथ ही प्रस्ताव स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड और एनटीसीए को भेजा जाएगा। स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के चेयरमैन मुख्यमंत्री होते हैं। इन दो जगहों से मंजूरी मिलते टाइगर रिजर्व पर मुहर लग जाएगी।
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वन संरक्षक ने भेजी थी रिपोर्ट
सहारनपुर। कैमरों में दुर्लभ प्रजातियों के कैद पर होने पर मुख्य वन संरक्षक वीके जैन ने पूरी रिपोर्ट प्रमुख वन संरक्षक और मंडलायुक्त को भेजी थी। खास बात यह रही कि प्रस्तावित टाइगर रिजर्व का एक किनारे राजाजी टाइगर रिजर्व और दूसरे छोर पर कलेसर हरियाणा सेंचुरी है। गंगा और यमुना नदी नजदीक होने की वजह से यह जगह बेहद खास है।