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Saharanpur News: गन्ने की फसल में दिखाई दे रहा पोक्का बोईंग रोग
Mon, 08 Jul 2024 03:54 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Mon, 08 Jul 2024 03:54 AM IST
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सहारनपुर। जनपद में गन्ने की फसल में पोक्का बोईंग रोग का प्रकोप दिखाई देने लगा है। फफूंदी जनित इस रोग का समय पर उपचार नहीं हुआ तो प्रभावित फसल की उत्पादकता पर विपरीत असर पडे़गा।
बारिश के मौसम शुरू होते ही गन्ने की फसल पर पोक्का बोईंग रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। इसमें पौधे की चोटी के पास की पत्तियों में सिकुड़न आ जाती है। कोमल पत्तियां मुरझाकर काली पड़ जाती हैं और पत्ती का ऊपरी भाग सड़कर गिर जाता है। इससे प्रभावित फसल का विकास रुक जाता है। इसमें ग्रसित अगोला के ठीक नीचे की पोरियों की संख्या बढ़ जाती है और पोरियों पर चाकू से कटे जैसे निशान भी दिखाई देते हैं। कम बारिश होने और फिर धूप निकलने के कारण यह रोग बढ़ता है। फफूंदजनित यह रोग हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि यदि समय पर पोक्का बोईंग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो फसल की उत्पादकता को प्रभावित करता है। इस पर नियंत्रण के लिए कार्बेंडाजिम 50 डब्लूपी 0.1 प्रतिशत, 400 ग्राम फफूंदीनाशक या कॉपर आक्सीक्लोराइड 50 डब्लूपी 0.2 प्रतिशत, 800 ग्राम फफूंदीनाशक या कॉसुगामाइसिन पांच प्रतिशत एवं कॉपर आक्सीक्लोराइड 45 प्रतिशत का 0.1 प्रतिशत, 400 ग्राम फफूंदीनाशक का पानी में मिलाकर छिड़काव करना लाभकारी रहता है।
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बारिश के मौसम शुरू होते ही गन्ने की फसल पर पोक्का बोईंग रोग के लक्षण दिखाई देने लगे हैं। इसमें पौधे की चोटी के पास की पत्तियों में सिकुड़न आ जाती है। कोमल पत्तियां मुरझाकर काली पड़ जाती हैं और पत्ती का ऊपरी भाग सड़कर गिर जाता है। इससे प्रभावित फसल का विकास रुक जाता है। इसमें ग्रसित अगोला के ठीक नीचे की पोरियों की संख्या बढ़ जाती है और पोरियों पर चाकू से कटे जैसे निशान भी दिखाई देते हैं। कम बारिश होने और फिर धूप निकलने के कारण यह रोग बढ़ता है। फफूंदजनित यह रोग हवा के माध्यम से तेजी से फैलता है।
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कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईके कुशवाहा ने बताया कि यदि समय पर पोक्का बोईंग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो फसल की उत्पादकता को प्रभावित करता है। इस पर नियंत्रण के लिए कार्बेंडाजिम 50 डब्लूपी 0.1 प्रतिशत, 400 ग्राम फफूंदीनाशक या कॉपर आक्सीक्लोराइड 50 डब्लूपी 0.2 प्रतिशत, 800 ग्राम फफूंदीनाशक या कॉसुगामाइसिन पांच प्रतिशत एवं कॉपर आक्सीक्लोराइड 45 प्रतिशत का 0.1 प्रतिशत, 400 ग्राम फफूंदीनाशक का पानी में मिलाकर छिड़काव करना लाभकारी रहता है।
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