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पीएम आवास योजना में खुली जनगणना की पोल
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Tue, 23 Aug 2016 12:08 AM IST
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housing scheme
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सहारनपुर में प्रधानमंत्री आवास योजना के सत्यापन ने 2011 में हुई आर्थिक जनगणना की पोल खोल दी है। कर्मचारियों ने मनमाने तरीके से सर्वे किया और अच्छे संपन्न और रसूखदार लोगों को गरीब की श्रेणी में रख दिया।
पीएम आवास के लिए केंद्र सरकार से मिली सूची का सत्यापन किया गया तो अधिकारी भी हैरान रह गए। 15 प्रतिशत भी आर्थिक जनगणना के आंकड़े सही नहीं पाए गए।
शासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 2011 में हुई आर्थिक जनगणना के आधार पर सहारनपुर जिले के आर्थिक रूप से कमजोर आवासहीन अथवा कच्चे आवास वाले 3472 लोगों के आवास बनवाने के लिए सूची भेजी थी।
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के माध्यम से जब इस सूची का भौतिक सत्यापन आवास निर्माण के लिए कराया गया तो आर्थिक जनगणना के सर्वे की हकीकत सामने आ गई।
आर्थिक जनगणना के आधार पर भेजी गई 3472 पात्रों की सूची में से 3036 लोग अपात्र पाए गए। इन लोगों के पास न सिर्फ अपने पक्के आलीशान मकान, बल्कि कई लोगों के पास लग्जरी गाड़ियां भी मिलीं। कई लोग तो ऐसे मिले, जिनका शहरों में कारोबार चल रहा है।
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कुछ गांव में तो रसूखदार और रईस व्यक्ति को आर्थिक रूप से कमजोर दर्शाकर पीएम आवास सूची में शामिल कर लिया। सत्यापन के बाद 436 लोग ही वास्तव में गरीब पाए गए। सिर्फ इन लोगों को ही आवास दिए जाएंगे। जबकि अन्य के आवास निरस्त कर सूचना शासन को भेजी गई है।
पीएम आवास के लिए हुए सत्यापन के बाद जो लोग पात्र पाए गए हैं, उनको पीएम आवास की बजाय लोहिया आवास योजना के तहत लाभ दिया जाएगा। लोहिया आवास योजना के तहत लगभग 3.30 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। जबकि पीएम आवास के लिए मात्र 1.20 लाख ही मिलते।
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक चंद्रशेखर ने बताया कि मात्र 436 लोग ही ऐसे मिले हैं जिनकी वास्तव में आर्थिक स्थिति खराब है। उनके पास घर नहीं है। शेष के पास पक्का मकान से लेकर गाड़ियां तक हैं। इसलिए अन्य को निरस्त कर दिया गया है।
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पीएम आवास के लिए केंद्र सरकार से मिली सूची का सत्यापन किया गया तो अधिकारी भी हैरान रह गए। 15 प्रतिशत भी आर्थिक जनगणना के आंकड़े सही नहीं पाए गए।
शासन द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए 2011 में हुई आर्थिक जनगणना के आधार पर सहारनपुर जिले के आर्थिक रूप से कमजोर आवासहीन अथवा कच्चे आवास वाले 3472 लोगों के आवास बनवाने के लिए सूची भेजी थी।
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जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के माध्यम से जब इस सूची का भौतिक सत्यापन आवास निर्माण के लिए कराया गया तो आर्थिक जनगणना के सर्वे की हकीकत सामने आ गई।
आर्थिक जनगणना के आधार पर भेजी गई 3472 पात्रों की सूची में से 3036 लोग अपात्र पाए गए। इन लोगों के पास न सिर्फ अपने पक्के आलीशान मकान, बल्कि कई लोगों के पास लग्जरी गाड़ियां भी मिलीं। कई लोग तो ऐसे मिले, जिनका शहरों में कारोबार चल रहा है।
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कुछ गांव में तो रसूखदार और रईस व्यक्ति को आर्थिक रूप से कमजोर दर्शाकर पीएम आवास सूची में शामिल कर लिया। सत्यापन के बाद 436 लोग ही वास्तव में गरीब पाए गए। सिर्फ इन लोगों को ही आवास दिए जाएंगे। जबकि अन्य के आवास निरस्त कर सूचना शासन को भेजी गई है।
पीएम आवास के लिए हुए सत्यापन के बाद जो लोग पात्र पाए गए हैं, उनको पीएम आवास की बजाय लोहिया आवास योजना के तहत लाभ दिया जाएगा। लोहिया आवास योजना के तहत लगभग 3.30 लाख रुपये तक की सहायता मिलेगी। जबकि पीएम आवास के लिए मात्र 1.20 लाख ही मिलते।
जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के परियोजना निदेशक चंद्रशेखर ने बताया कि मात्र 436 लोग ही ऐसे मिले हैं जिनकी वास्तव में आर्थिक स्थिति खराब है। उनके पास घर नहीं है। शेष के पास पक्का मकान से लेकर गाड़ियां तक हैं। इसलिए अन्य को निरस्त कर दिया गया है।