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Saharanpur News: कोषागार में रखे 30 करोड़ के फिजिकल स्टांप की होगी छानबीन
Thu, 18 Jan 2024 02:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Thu, 18 Jan 2024 02:18 AM IST
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सहारनपुर। कोषागार में रखे पांच हजार या उससे अधिक के स्टांप जांच के दायरे में आ गए हैं। मुख्यालय की तरफ से पत्र जारी होने के बाद सहारनपुर कोषागार में रखे करीब 30 करोड़ रुपये के स्टांप की जांच शुरू कर दी गई है। इन स्टांप के क्रमांक नंबर की सूची तैयार कर रजिस्ट्री कार्यालय में भेजी जाएगी, जहां पर इनका सत्यापन होगा और फर्जीवाड़ा हुआ है या फिर नहीं इसका पता चल सकेगा। मेरठ में स्टांप फर्जीवाड़े का मामला पकड़ में आने के बाद आशंका है कि अन्य जिलों में भी यह हो सकता है, इसलिए जांच शुरू की गई है।
दरअसल, कुछ साल पहले तक फिजिकल स्टांप का इस्तेमाल होता है, लेकिन बाद में सरकार ने फिजिकल स्टांप बंद कर ई-स्टांप की व्यवस्था शुरू कर दी थी। अब रजिस्ट्री से लेकर अन्य स्थानों पर ई-स्टांप का ही प्रयोग होता है। ऐसे में सभी जिलों में बचे हुए बड़े फिजिकल स्टांप कोषागार में सुरक्षित रख लिए गए हैं। आयुक्त स्टांप कंचन वर्मा की तरफ से जो पत्र जारी किया गया है उसके अनुसार, कुछ माह पहले मेरठ में स्टांप पत्रों पर कोषागार की फर्जी मोहर लगाकर उनके इस्तेमाल का मामला सामने आया था। अन्य जिलों में भी इसकी आशंका है।
ऐसे पकड़ में आएगा फर्जीवाड़ा
मुख्य कोषाधिकारी सूरज कुमार ने बताया कि इस समय कोषागार में करीब 30 करोड़ रुपये के फिजिकल स्टांप रखे हुए हैं, जो सभी पांच हजार या उससे ऊपर के हैं। सबसे महंगा स्टांप 25 हजार रुपये का है। कोषागार में रखे इन स्टांप का क्रमांक मिलान कर उसकी सूची तैयार की जाएगी। वह सूची को संबंधित रजिस्ट्री कार्यालय में भेजी जाएगी। रजिस्ट्री कार्यालय में उन क्रमांक और पहले रजिस्ट्री में इस्तेमाल हो चुके स्टांप के क्रमांक से मिलान किया जाएगा। किसी का क्रमांक इन सीरीज से अलग मिलता है तो स्पष्ट है कि वह स्टांप फर्जीवाड़ा कर इस्तेमाल किया गया है। जिसके बाद मामला पकड़ में आ जाएगा।
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पिछले साल बदल दी गई प्रक्रिया
सरकार ने ई-स्टांप को बढ़ावा देने के लिए फिजिकल स्टांप लेने की प्रक्रिया में पिछले साल बदलाव कर दिया था। पहले कोई भी व्यक्ति कोषागार में जाकर रुपये देकर स्टांप ले सकता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। यदि किसी को स्टांप चाहिए होता है तो वह पहले दिन कोषागार में आकर उतने ही रुपये का चालान पास कराएगा। फिर बैंक में जाकर रुपये जमा करने होंगे। दूसरे दिन दोबारा कोषागार में आकर वह स्टांप ले सकता है।
इसलिए रहती है फिजिकल स्टांप की मांग
अधिकारियों की मानें तो ई-स्टांप से कंप्यूटर जनरेट जो स्टांप निकलता है उसका कागज हल्का होता है। लोगों को मानना है कि वह जल्दी खराब हो जाता है, लेकिन कोषागार से मिलने वाले फिजिकल स्टांप का कागज नासिक प्रेस से आता है, उसी तरह का कागज नोटों में इस्तेमाल होता है। जो लंबे समय तक खराब नहीं होता।
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दरअसल, कुछ साल पहले तक फिजिकल स्टांप का इस्तेमाल होता है, लेकिन बाद में सरकार ने फिजिकल स्टांप बंद कर ई-स्टांप की व्यवस्था शुरू कर दी थी। अब रजिस्ट्री से लेकर अन्य स्थानों पर ई-स्टांप का ही प्रयोग होता है। ऐसे में सभी जिलों में बचे हुए बड़े फिजिकल स्टांप कोषागार में सुरक्षित रख लिए गए हैं। आयुक्त स्टांप कंचन वर्मा की तरफ से जो पत्र जारी किया गया है उसके अनुसार, कुछ माह पहले मेरठ में स्टांप पत्रों पर कोषागार की फर्जी मोहर लगाकर उनके इस्तेमाल का मामला सामने आया था। अन्य जिलों में भी इसकी आशंका है।
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ऐसे पकड़ में आएगा फर्जीवाड़ा
मुख्य कोषाधिकारी सूरज कुमार ने बताया कि इस समय कोषागार में करीब 30 करोड़ रुपये के फिजिकल स्टांप रखे हुए हैं, जो सभी पांच हजार या उससे ऊपर के हैं। सबसे महंगा स्टांप 25 हजार रुपये का है। कोषागार में रखे इन स्टांप का क्रमांक मिलान कर उसकी सूची तैयार की जाएगी। वह सूची को संबंधित रजिस्ट्री कार्यालय में भेजी जाएगी। रजिस्ट्री कार्यालय में उन क्रमांक और पहले रजिस्ट्री में इस्तेमाल हो चुके स्टांप के क्रमांक से मिलान किया जाएगा। किसी का क्रमांक इन सीरीज से अलग मिलता है तो स्पष्ट है कि वह स्टांप फर्जीवाड़ा कर इस्तेमाल किया गया है। जिसके बाद मामला पकड़ में आ जाएगा।
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पिछले साल बदल दी गई प्रक्रिया
सरकार ने ई-स्टांप को बढ़ावा देने के लिए फिजिकल स्टांप लेने की प्रक्रिया में पिछले साल बदलाव कर दिया था। पहले कोई भी व्यक्ति कोषागार में जाकर रुपये देकर स्टांप ले सकता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। यदि किसी को स्टांप चाहिए होता है तो वह पहले दिन कोषागार में आकर उतने ही रुपये का चालान पास कराएगा। फिर बैंक में जाकर रुपये जमा करने होंगे। दूसरे दिन दोबारा कोषागार में आकर वह स्टांप ले सकता है।
इसलिए रहती है फिजिकल स्टांप की मांग
अधिकारियों की मानें तो ई-स्टांप से कंप्यूटर जनरेट जो स्टांप निकलता है उसका कागज हल्का होता है। लोगों को मानना है कि वह जल्दी खराब हो जाता है, लेकिन कोषागार से मिलने वाले फिजिकल स्टांप का कागज नासिक प्रेस से आता है, उसी तरह का कागज नोटों में इस्तेमाल होता है। जो लंबे समय तक खराब नहीं होता।