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किसान दिवस में भड़के किसान, हंगामा
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 18 Aug 2016 12:56 AM IST
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किसान दिवस में हंगामा करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में यहां फोटो खिंचवाने के लिए नहीं आए हैं किसान। जो मुख्यमंत्री से किसानों की समस्याओं का समाधान करा सके, उसे ही किसान दिवस में बुलाया जाए।
न तो सक्षम अधिकारी ही किसान दिवस में आ रहे हैं और न ही उनकी समस्याओं का समाधान हो रहा है। किसानों की समस्याएं हल नहीं कर सकते, तो उन्हें इतनी दूर परेशान करने के लिए क्यों बुलाया गया।
विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी दीपक मीणा की अध्यक्षता में आयोजित किसान दिवस में समस्याओं का समाधान न होने एवं अधिकारियों के न पहुंचने पर जमकर भड़के।
यहां तक कि किसानों ने विकास भवन सभागार में ही अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की औरसमस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया। गन्ना भुगतान और शुगर मिलों के संचालन को लेकर भी किसानों ने जमकर हंगामा किया।
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दया शुगर मिल एवं टोडरपुर मिल चलवाने एवं पुराना भुगतान दिलवाने की मांग की गई। किसानों ने चेतावनी दी कि पुराना भुगतान नहीं कराया गया तो वह मिल का ताला नहीं खुलने देंगे।
सबसे अधिक हंगामा बैंकों द्वारा फसल बीमा काटने और बिजली को लेकर हुआ। किसानों ने बैंकों पर उनके बिना पूछे, बिना मर्जी के ही जबरन फसल बीमा की धनराशि काट ली। पिछले वर्ष की ऐसा ही हुआ।
किसी किसान को बीमा का कोई कागज नहीं दिया गया। फिर जब फसल का नुकसान हुआ तो एक भी किसान को फूटी कौड़ी नहीं मिली। जब बिना पूछे फसल बीमा की धनराशि उनके खातों से काट रहे हैं तो फसल का नुकसान भी उनके खातों में जमा कराएं।
किसान चिल्लाते रह गए, किसी को कुछ नहीं मिला। किसानों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने स्वेच्छा से फसल बीमा काटने की मांग की। विद्युत निगम पर किसानों ने जमकर भड़ास निकाली।
किसानों ने कहा एक गांव में 9 माह में 9 ट्रांसफार्मर फुंक गए। 9 माह में 15 दिन भी बिजली नहीं आई। जबकि 9 ट्रांसफार्मर का खर्च भी किसानों को ही उठाना पड़ा।
एक और दो माह में बनी सड़कें टूट जाने पर किसानों ने अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। किसान दिवस में कुल 59 शिकायतें प्राप्त हुईं। एडीएम वित्त हरीश चंद्र, जिला विकास अधिकारी विक्रम सिंह, उप कृषि निदेशक अखिलेश चंद शर्मा के अलावा किसान प्रवीन कुमार, राकेश पुंडीर, चंद्रवीर सिंह, चौधरी चरण सिंह, मदन लाल सैनी, नरेश कुमार स्वामी, रविन्द्र तोगड़िया, पहल सिंह, कुलदीप सिंह मौजूद रहे
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न तो सक्षम अधिकारी ही किसान दिवस में आ रहे हैं और न ही उनकी समस्याओं का समाधान हो रहा है। किसानों की समस्याएं हल नहीं कर सकते, तो उन्हें इतनी दूर परेशान करने के लिए क्यों बुलाया गया।
विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी दीपक मीणा की अध्यक्षता में आयोजित किसान दिवस में समस्याओं का समाधान न होने एवं अधिकारियों के न पहुंचने पर जमकर भड़के।
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यहां तक कि किसानों ने विकास भवन सभागार में ही अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की औरसमस्याओं की अनदेखी का आरोप लगाया। गन्ना भुगतान और शुगर मिलों के संचालन को लेकर भी किसानों ने जमकर हंगामा किया।
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दया शुगर मिल एवं टोडरपुर मिल चलवाने एवं पुराना भुगतान दिलवाने की मांग की गई। किसानों ने चेतावनी दी कि पुराना भुगतान नहीं कराया गया तो वह मिल का ताला नहीं खुलने देंगे।
सबसे अधिक हंगामा बैंकों द्वारा फसल बीमा काटने और बिजली को लेकर हुआ। किसानों ने बैंकों पर उनके बिना पूछे, बिना मर्जी के ही जबरन फसल बीमा की धनराशि काट ली। पिछले वर्ष की ऐसा ही हुआ।
किसी किसान को बीमा का कोई कागज नहीं दिया गया। फिर जब फसल का नुकसान हुआ तो एक भी किसान को फूटी कौड़ी नहीं मिली। जब बिना पूछे फसल बीमा की धनराशि उनके खातों से काट रहे हैं तो फसल का नुकसान भी उनके खातों में जमा कराएं।
किसान चिल्लाते रह गए, किसी को कुछ नहीं मिला। किसानों का लगातार उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने स्वेच्छा से फसल बीमा काटने की मांग की। विद्युत निगम पर किसानों ने जमकर भड़ास निकाली।
किसानों ने कहा एक गांव में 9 माह में 9 ट्रांसफार्मर फुंक गए। 9 माह में 15 दिन भी बिजली नहीं आई। जबकि 9 ट्रांसफार्मर का खर्च भी किसानों को ही उठाना पड़ा।
एक और दो माह में बनी सड़कें टूट जाने पर किसानों ने अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। किसान दिवस में कुल 59 शिकायतें प्राप्त हुईं। एडीएम वित्त हरीश चंद्र, जिला विकास अधिकारी विक्रम सिंह, उप कृषि निदेशक अखिलेश चंद शर्मा के अलावा किसान प्रवीन कुमार, राकेश पुंडीर, चंद्रवीर सिंह, चौधरी चरण सिंह, मदन लाल सैनी, नरेश कुमार स्वामी, रविन्द्र तोगड़िया, पहल सिंह, कुलदीप सिंह मौजूद रहे