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Saharanpur News: पटेला विधि से धान की फसल में होता है बढि़या फुटाव
Sun, 23 Jun 2024 03:28 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 23 Jun 2024 03:28 AM IST
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सहारनपुर। धान की फसल में फुटाव को बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिक किसानों को पटेला विधि अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। इस विधि में बिना किसी अतिरिक्त लागत के धान की फसल में अधिक फुटाव होता है।
जिले में करीब 55 से 60 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होती है। धान के बढि़या उत्पादन में फसल के अच्छे फुटाव की बड़ी भूमिका रहती है। धान की फसल का अधिकतम फुटाव के लिए किसान विभिन्न पोषक तत्वों के साथ ही उर्वरकों का प्रयोग करते हैं, लेकिन धान की फसल में अच्छे फुटाव के लिए बासमती निर्यात प्रतिष्ठान मेरठ द्वारा विकसित की गई पटेला विधि अधिक कारगर साबित हो रही है। इस विधि में किसान एक हल्के पटेला को धान की रोपाई के 15 से 25 दिनों के बीच फसल के ऊपर चलाते हैं। जिससे धान की फसल में अधिक कल्ले निकलते हैं।
इससे धान की फसल की लागत कम होने के साथ ही उत्पादन भी बढि़या होता है। इसके अलावा भूमि में वायु संचार भी बढ़ता है, जिससे पौधों की जड़ों का बेहतर विकास होता है। इस तकनीक का प्रयोग करने पर भूमि में दरार भी नहीं पड़ती, इसके चलते पानी की बचत होती है। इसके अलावा धान में लगने वाले पत्ती लपेटक और तनाछेदक कीट प्राथमिक अवस्था में ही नष्ट हो जाते हैं। इस तकनीक का प्रयोग करने से कम लागत में धान की अच्छी पैदावार होती है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को इस विधि का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
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-- वर्जन --
पटेला विधि में धान की रोपाई के 15 से 25 दिनों के अंदर खेत में पानी भरकर करीब 15 किलो वजन एवं दो से तीन मीटर लंबे लकड़ी के पटेला को फसल के ऊपर रस्सी की सहायता से एक से दो बार चलाया जाता है। बासमती निर्यात प्रतिष्ठान मेरठ द्वारा विकसित यह विधि धान की फसल के फुटाव में कारगर साबित हो रही है।
- डॉ. आईके कुशवाह, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र
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जिले में करीब 55 से 60 हजार हेक्टेयर में धान की खेती होती है। धान के बढि़या उत्पादन में फसल के अच्छे फुटाव की बड़ी भूमिका रहती है। धान की फसल का अधिकतम फुटाव के लिए किसान विभिन्न पोषक तत्वों के साथ ही उर्वरकों का प्रयोग करते हैं, लेकिन धान की फसल में अच्छे फुटाव के लिए बासमती निर्यात प्रतिष्ठान मेरठ द्वारा विकसित की गई पटेला विधि अधिक कारगर साबित हो रही है। इस विधि में किसान एक हल्के पटेला को धान की रोपाई के 15 से 25 दिनों के बीच फसल के ऊपर चलाते हैं। जिससे धान की फसल में अधिक कल्ले निकलते हैं।
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इससे धान की फसल की लागत कम होने के साथ ही उत्पादन भी बढि़या होता है। इसके अलावा भूमि में वायु संचार भी बढ़ता है, जिससे पौधों की जड़ों का बेहतर विकास होता है। इस तकनीक का प्रयोग करने पर भूमि में दरार भी नहीं पड़ती, इसके चलते पानी की बचत होती है। इसके अलावा धान में लगने वाले पत्ती लपेटक और तनाछेदक कीट प्राथमिक अवस्था में ही नष्ट हो जाते हैं। इस तकनीक का प्रयोग करने से कम लागत में धान की अच्छी पैदावार होती है। कृषि वैज्ञानिक किसानों को इस विधि का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।
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पटेला विधि में धान की रोपाई के 15 से 25 दिनों के अंदर खेत में पानी भरकर करीब 15 किलो वजन एवं दो से तीन मीटर लंबे लकड़ी के पटेला को फसल के ऊपर रस्सी की सहायता से एक से दो बार चलाया जाता है। बासमती निर्यात प्रतिष्ठान मेरठ द्वारा विकसित यह विधि धान की फसल के फुटाव में कारगर साबित हो रही है।
- डॉ. आईके कुशवाह, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र