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Saharanpur News: सब्जियों सहित अन्य फसलों में दिखाई दे रहा निमेटोड का प्रकोप

Sun, 04 Jun 2023 12:14 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Jun 2023 12:14 AM IST
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Outbreak of nematode visible in other crops including vegetables
प्रभावित फसल की जड़ों में बन जाती हैं गांठें
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। जनपद में सब्जियों सहित अन्य फसलों में निमेटोड (सूत्र कृमि) का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इससे प्रभावित फसल की जड़ों में गांठें बन जाती हैं। जिससे पौधे की भूमि से पानी और पोषक तत्व ग्रहण करने की क्षमता कम हो जाती है। इससे प्रभावित पौधे की बढ़वार रुक जाती है और फसल की उत्पादकता घट जाती है।
कृषि विज्ञान केंद्र में सब्जियों में सूत्र कृमि कीट के प्रकोप की समस्या को लेकर किसान आ रहे हैं। पनियाली के किसान ओमवीर एवं नवाब सिंह, कबीरपुर के अश्वनी, समसपुर के नरेंद्र शर्मा और देवला के आशीष आदि किसान इस समस्या को लेकर कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचे। यह सूत्र कृमि बेहद पतले आकार का होता है। जो मृदा से पौधों के उत्तकों में प्रवेश कर जाता है। इसे सूक्ष्म दर्शी के माध्यम से ही देखा जा सकता है। प्रभावित पौधे में इसके लक्षण दिखाई देते हैं। इससे प्रभावित पौधा बौना रहता है, पत्तियां पीली पडकर पौधा मुरझाने लगता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. आईंके कुशवाहा ने बताया कि जनपद में पिछले एक दशक से ही सूत्र कृमि का प्रकोप बढ़ा है। कृषि यंत्रों के माध्यम से सूत्र कृमि एक से दूसरे खेत में पहुंच जाते हैं। जनपद में सब्जियों में सूत्र कृमि कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है। इससे खीरा, कददू, लौकी, टमाटर, बैंगन, मिर्च आदि फसलें प्रभावित हाे रही हैं।
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ऐसे करें रोकथाम

सूत्र कृमि के प्रकोप से बचाव के लिए किसानों को फसल चक्र में राजमा, मटर, गेहूं, ग्वार एवं पालक को शामिल करना चाहिए। बुवाई से पहले खेत में नीम, सरसों, महुआ, मूंगफली आदि की खली का प्रयोग करें। फसल के बीच में गेंदा लगाएं। रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर खेत से बाहर डाल दें। ग्रीष्मकालीन जुताई करके खेत को खाली छोड़ दें।
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निमेटोड से प्रभावित खेत में पेसीलोकाइसेंस मित्र फफूंदी की 500 मिली लीटर मात्रा को प्रति एकड़ खेत में एक-एक महीने के अंतराल पर दो बार छिड़काव करके सिंचाई कर दें। या गोबर की सड़ी खाद में मिलाकर नमीदार खेत में बिखेर दें। इससे सूत्र कृमि से बचाव में सहायता मिलेगी।
- डॉ. आईके कुशवाहा, प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र
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