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धुएं में उड़ाए जा रहे एनजीटी के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 16 Nov 2016 12:41 AM IST
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वाहन से उड़ता धुआं।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में एनजीटी (राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण) और हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने वायु प्रदूषण को कंट्रोल करने के आदेश दिए हुए हैं। इसके तहत शहर और नगरों से कचरा साफ करने के साथ ही सफाई करते समय धूल तक न उड़ने देने के आदेश हैं।
मगर सहारनपुर प्रशासन एनजीटी और कोर्ट के आदेशों को धुआं में उड़ा रहा है। चार दिन पहले मुख्य सचिव डॉ. अनिल कुमार सिंह ने एनजीटी और हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश का हवाला देते हुए सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और नगरायुक्तों को वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए कदम
उठाने के आदेश दिए थे। इसमें शहरों और नगरों में कचरा जमा न होने देने तथा सफाई के दौरान उठने वाली धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़काव तक करने की बात कही गई है।
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मंगलवार की दोपहर कलक्ट्रेट के बाहर कूड़े के बड़े ढेर में आग लगाकर उसे नष्ट करने का प्रयास किया गया। इससे पूरे जैन कॉलेज रोड पर धुआं था। यानी सीधी सी बात है कि विशेष सचिव से मिले आदेशों को जिला प्रशासन अभी तक गंभीरता से नहीं ले रहा है।
न इी प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई प्रचार या सर्कुलर जारी किया गया है। ऐसे में वायु प्रदूषण होना जारी है। जिले से भी डीजल के दस साल और पेट्रोल के 15 साल पुराने वाहनों को बाहर किया जाएगा।
मगर सहारनपुर का नंबर दूसरे चरण में है। पहले चरण में शामिल दस शहरों से पुुराने वाहन बाहर होने के बाद दूसरे चरण में 16 शहरों का नंबर आएगा।
इनमें सहारनपुर के साथ ही मरेठ, फैजाबाद, इलाहाबाद, अलीगढ़, संत रविदासनगर, मुरादाबाद, बरेली, मथुरा, मऊ, झांसी, देवरिया, फिरोजाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और मुजफ्फरनगर शामिल हैं। यह ऐसे शहर हैं, जिनमें वाहनों की संख्या तीन से पांच लाख है।
तीसरे चरण में बाकी के 52 शहरों का नंबर आएगा। जनपद में ओवरलोडिंग बड़ी समस्या है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में टैक्ट्रर-ट्रॉलियों को लकड़ी और अन्य सामग्री केे साथ ओवरलोड हालत में निकलती हैं।
इसके अलावा ट्रक्र, बस और टेंपो भी ओवरलोड होकर चलते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो ओवरलोड वाहन अधिक धुंआ छोड़ते हैं। यानी प्रदूषण बढ़ने की यह भी एक वजह है।
संभागीय परिवहन प्राधिकरण के सचिव ने सहारनपुर संभाग के मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर के ऐसे सभी राष्ट्रीय परमिट धारी ट्रक स्वामियों को जिनके प्राधिकार पत्र की अवधि समाप्त हो चुकी है को 31 दिसंबर तक प्राधिकार पत्र वैध कराने को कहा है।
प्राधिकार पत्र वैध न कराने वाले ट्रकों का संचालन 31 दिसंबर के बाद अवैध माना जाएगा। ऐसे वाहनों को ब्लैकलिस्ट कर अगली सूची में डाल दिया जाएगा। इसकी पूर्ण जिम्मेदार वाहन स्वामी की होगी।
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मगर सहारनपुर प्रशासन एनजीटी और कोर्ट के आदेशों को धुआं में उड़ा रहा है। चार दिन पहले मुख्य सचिव डॉ. अनिल कुमार सिंह ने एनजीटी और हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच के आदेश का हवाला देते हुए सभी मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और नगरायुक्तों को वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए कदम
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उठाने के आदेश दिए थे। इसमें शहरों और नगरों में कचरा जमा न होने देने तथा सफाई के दौरान उठने वाली धूल को रोकने के लिए पानी का छिड़काव तक करने की बात कही गई है।
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मंगलवार की दोपहर कलक्ट्रेट के बाहर कूड़े के बड़े ढेर में आग लगाकर उसे नष्ट करने का प्रयास किया गया। इससे पूरे जैन कॉलेज रोड पर धुआं था। यानी सीधी सी बात है कि विशेष सचिव से मिले आदेशों को जिला प्रशासन अभी तक गंभीरता से नहीं ले रहा है।
न इी प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई प्रचार या सर्कुलर जारी किया गया है। ऐसे में वायु प्रदूषण होना जारी है। जिले से भी डीजल के दस साल और पेट्रोल के 15 साल पुराने वाहनों को बाहर किया जाएगा।
मगर सहारनपुर का नंबर दूसरे चरण में है। पहले चरण में शामिल दस शहरों से पुुराने वाहन बाहर होने के बाद दूसरे चरण में 16 शहरों का नंबर आएगा।
इनमें सहारनपुर के साथ ही मरेठ, फैजाबाद, इलाहाबाद, अलीगढ़, संत रविदासनगर, मुरादाबाद, बरेली, मथुरा, मऊ, झांसी, देवरिया, फिरोजाबाद, हापुड़, बुलंदशहर और मुजफ्फरनगर शामिल हैं। यह ऐसे शहर हैं, जिनमें वाहनों की संख्या तीन से पांच लाख है।
तीसरे चरण में बाकी के 52 शहरों का नंबर आएगा। जनपद में ओवरलोडिंग बड़ी समस्या है। प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में टैक्ट्रर-ट्रॉलियों को लकड़ी और अन्य सामग्री केे साथ ओवरलोड हालत में निकलती हैं।
इसके अलावा ट्रक्र, बस और टेंपो भी ओवरलोड होकर चलते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो ओवरलोड वाहन अधिक धुंआ छोड़ते हैं। यानी प्रदूषण बढ़ने की यह भी एक वजह है।
संभागीय परिवहन प्राधिकरण के सचिव ने सहारनपुर संभाग के मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर के ऐसे सभी राष्ट्रीय परमिट धारी ट्रक स्वामियों को जिनके प्राधिकार पत्र की अवधि समाप्त हो चुकी है को 31 दिसंबर तक प्राधिकार पत्र वैध कराने को कहा है।
प्राधिकार पत्र वैध न कराने वाले ट्रकों का संचालन 31 दिसंबर के बाद अवैध माना जाएगा। ऐसे वाहनों को ब्लैकलिस्ट कर अगली सूची में डाल दिया जाएगा। इसकी पूर्ण जिम्मेदार वाहन स्वामी की होगी।