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उफ ! ये धूल और धुआं, हवा में घुल रहा है जहर
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सहारनपुर की पोश कॉलोनी मिशन कंपाउंड में सड़क से उड़ती धूल से गुजरते वाहन
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। हवा में जहर घुल रहा है। प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद पराली जलाई जा रही है। निर्माण सामग्री खुले में छोड़ दी जा रही है। सड़कों पर खोदाई करके मिट्टी फैलने पर धूल का गुबार बना रहता है। ऐसे में खुली हवा में सांस तक लेना दूभर हो गया है। यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो प्रदूषण बढ़ने पर हालत बेहद खराब होने वाली है।
यह इसलिए भी बड़ी चिंता है, क्योंकि बीते एक सप्ताह में एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) लगातार बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को ही एक्यूआई 380 तक पहुंच गया है, जो बुधवार को करीब 360 था। सहारनपुर के साथ ही आसपास के जिलों में भी एक्यूआई इसी तरह तेजी से बढ़ रहा है। एक्यूआई में बढ़ोतरी की बड़ी वजह पराली जलाया माना जा रहा है तो अन्य भी कई कारण हैं। प्रशासन की तरफ से पराली जलाने वालों पर कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन फिर भी पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा है।
वाहनों पर जम जाती है धूल की परत
शहर के हकीकतनगर सहित विभिन्न इलाकों में निर्माण कार्य चल रहा है। कहीं सीवर लाइन का कार्य है तो कहीं सड़क निर्माण। रास्ते की खोदाई करने पर जो मिट्टी निकली वह सड़क पर छोड़ दी गई है। कुछ निर्माण अधूरे भी हैं। सड़क पर पड़ी मिट्टी के महीन कण धूल के रूप में हवा में तैरते रहते हैं। इससे दुकानदार भी परेशान हैं, क्योंकि धूल दुकानों में सामान पर चढ़ जाती है तो सड़क पर खड़े वाहनों पर भी कुछ ही देर में धूल चढ़ जाती है।
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अब तक 56 मामले पकड़े
जिले में फसल अवशेष जलाने के अब तक 56 मामले पकड़े जा चुके हैं, जबकि बीते साल 39 मामले पकड़े गए थे। इसके अलावा पराली जलाने के आरोप में 32 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई, जबकि 16 किसानों की गिरफ्तारी भी की गई। वहीं, करीब डेढ़ लाख रुपये जुर्माना के रूप में वसूली भी हो चुकी है। वहीं, करीब 200 क्विंटल पराली को गांवों से गोशाला पहुंचाया जा चुका है।
पराली प्रबंधन को कर रहे जागरूक : डीएम
जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए कार्रवाई भी हो रही है तो पराली प्रबंधन के लिए भी किसानों को जागरूक किया जा रहा है। जिले में गन्ना और सहकारी समितियों पर 65 मल्चर हैं, जो किसानों को किराए पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मल्चर से पराली को मिट्टी में मिला दिया जाता है।
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यह इसलिए भी बड़ी चिंता है, क्योंकि बीते एक सप्ताह में एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) लगातार बढ़ रहा है। बृहस्पतिवार को ही एक्यूआई 380 तक पहुंच गया है, जो बुधवार को करीब 360 था। सहारनपुर के साथ ही आसपास के जिलों में भी एक्यूआई इसी तरह तेजी से बढ़ रहा है। एक्यूआई में बढ़ोतरी की बड़ी वजह पराली जलाया माना जा रहा है तो अन्य भी कई कारण हैं। प्रशासन की तरफ से पराली जलाने वालों पर कार्रवाई भी हो रही है, लेकिन फिर भी पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगा है।
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वाहनों पर जम जाती है धूल की परत
शहर के हकीकतनगर सहित विभिन्न इलाकों में निर्माण कार्य चल रहा है। कहीं सीवर लाइन का कार्य है तो कहीं सड़क निर्माण। रास्ते की खोदाई करने पर जो मिट्टी निकली वह सड़क पर छोड़ दी गई है। कुछ निर्माण अधूरे भी हैं। सड़क पर पड़ी मिट्टी के महीन कण धूल के रूप में हवा में तैरते रहते हैं। इससे दुकानदार भी परेशान हैं, क्योंकि धूल दुकानों में सामान पर चढ़ जाती है तो सड़क पर खड़े वाहनों पर भी कुछ ही देर में धूल चढ़ जाती है।
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अब तक 56 मामले पकड़े
जिले में फसल अवशेष जलाने के अब तक 56 मामले पकड़े जा चुके हैं, जबकि बीते साल 39 मामले पकड़े गए थे। इसके अलावा पराली जलाने के आरोप में 32 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई, जबकि 16 किसानों की गिरफ्तारी भी की गई। वहीं, करीब डेढ़ लाख रुपये जुर्माना के रूप में वसूली भी हो चुकी है। वहीं, करीब 200 क्विंटल पराली को गांवों से गोशाला पहुंचाया जा चुका है।
पराली प्रबंधन को कर रहे जागरूक : डीएम
जिलाधिकारी अखिलेश सिंह ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए कार्रवाई भी हो रही है तो पराली प्रबंधन के लिए भी किसानों को जागरूक किया जा रहा है। जिले में गन्ना और सहकारी समितियों पर 65 मल्चर हैं, जो किसानों को किराए पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मल्चर से पराली को मिट्टी में मिला दिया जाता है।

सहारनपुर की हकीकत नगर में सड़क से उड़ती धूल में गुजरते वाहन और कार जमी धूल- फोटो : SAHARANPUR