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Saharanpur News: नगर में रह रहा नेपाली अपने परिवार के प्रति फिक्रमंद
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सरसावा। नगर में बीते 20 वर्षों से पहरेदारी का काम कर रहा दीपक गोरखा नेपाल में हो रही हिंसा को लेकर अपने परिवार के प्रति फ्रिकमंद है।
दीपक ने बताया कि उसका जिला अछाम कस्बा मस्टाभंडाली नेपाल के मध्य क्षेत्र में स्थित है, जबकि काठमांडू, नेपाल के अन्य बड़े शहर उनसे काफी दूर हैं। फिर भी हिंसा की आंच उनके जिले में तक भी पहुंच चुकी है। हालांकि अभी उनके कस्बे में कोई हंगामा प्रदर्शन नहीं हो रहा है, लेकिन तनाव की स्थिति बनी है। दीपक ने बताया कि वह अपने घर वालों से रोजाना बात कर रहा है। उसे फिक्र भी है, लेकिन मजबूर है कि इस हालत में घर जा नहीं सकता। दीपक ने बताया कि उसके गांव में इंटरनेट की फैसिलिटी थी, जिससे वह अपने पत्नी, आठ बच्चों से वीडियो कॉलिंग भी करता था, लेकिन जब से इंटरनेट सेवा बंद हुई है। केवल कॉल ही हो पा रही थी, लेकिन दो दिनों से कॉल भी नहीं हो पाई है। उसने बताया कि उसका कस्बा पहाड़ी क्षेत्र में है। इसलिए ज्यादा खेती-बाड़ी भी नहीं है, परिवार वाले सभी लोग मेहनत मजदूरी कर गुजारा करते हैं।
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दीपक ने बताया कि उसका जिला अछाम कस्बा मस्टाभंडाली नेपाल के मध्य क्षेत्र में स्थित है, जबकि काठमांडू, नेपाल के अन्य बड़े शहर उनसे काफी दूर हैं। फिर भी हिंसा की आंच उनके जिले में तक भी पहुंच चुकी है। हालांकि अभी उनके कस्बे में कोई हंगामा प्रदर्शन नहीं हो रहा है, लेकिन तनाव की स्थिति बनी है। दीपक ने बताया कि वह अपने घर वालों से रोजाना बात कर रहा है। उसे फिक्र भी है, लेकिन मजबूर है कि इस हालत में घर जा नहीं सकता। दीपक ने बताया कि उसके गांव में इंटरनेट की फैसिलिटी थी, जिससे वह अपने पत्नी, आठ बच्चों से वीडियो कॉलिंग भी करता था, लेकिन जब से इंटरनेट सेवा बंद हुई है। केवल कॉल ही हो पा रही थी, लेकिन दो दिनों से कॉल भी नहीं हो पाई है। उसने बताया कि उसका कस्बा पहाड़ी क्षेत्र में है। इसलिए ज्यादा खेती-बाड़ी भी नहीं है, परिवार वाले सभी लोग मेहनत मजदूरी कर गुजारा करते हैं।