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भूजल रीचार्ज का देशी उपाय
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 10 Jun 2016 12:32 AM IST
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सहारनपुर के गांवों में बारिश का पानी अब नालियों में नहीं बहेगा। बारिश के पानी को स्टोर करने के लिए प्रशासन ने ग्राम पंचायतों में बड़े-बड़े गड्ढे खुदवाने शुरू कर दिए हैं।
पहले चरण में प्रत्येक ब्लाक में 20-20 गड्ढे खुदवाए जा रहे हैं। जिनसे भूजल को भी रीचार्ज किया जा सकेगा और जरूरत के समय पानी का उपयोग भी हो सकेगा।
सहारनपुर के आसपास नदियों और नहरों का जाल होते हुए भी यहां की धरती सूखती जा रही है। जलस्तर लगातार गिर रहा है और सभी ब्लॉक डार्क जोन में चले गए हैं। पीने के साथ सिंचाई का संकट भी गहराता जा रहा है।
लाख प्रयासों के बावजूद जलस्तर बढ़ नहीं पा रहा है और पानी की कमी बढ़ती जा रही है। जबकि हर साल हो रही बारिश का लाखों क्यूसेक पानी नालियों में ही बह रहा है। इस बार बारिश के पानी को नालियों में न बहने देने के लिए प्रशासन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
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मनरेगा योजना से प्रत्येक विकास खंड में 20-20 गड्ढे खुदवाए जा रहे हैं। पहले चरण में 200 गड्ढे खुदवाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम पंचायत की भूमि पर ही फिलहाल ये गड्ढे तैयार किए जा रहे हैं और बारिश के पानी का ढलान गड्ढों की ओर किया जा रहा है।
इसमें चारों ओर से नालियां बनाई जा रहीं हैं। जिससे बारिश का पानी सीधे गड्ढे में जाए। इस पानी का प्रयोग आवश्यक कार्यों के लिए भी किया जा सकेगा और सिंचाई के लिए भी पानी काम आ सकेगा।
गड्ढों की खुदाई का कार्य ग्राम पंचायतों के सहयोग से मनरेगा योजना के तहत कराया जा रहा है। जिससे मजदूरों को काम भी मिलेगा और बरसात के पानी को एकत्रित करने के लिए गड्ढे भी तैयार हो जाएंगे।
प्रत्येक गांव में तालाब हैं, तालाब में मनरेगा योजना के तहत सफाई कराने का भी प्रावधान है, लेकिन मजदूर तालाब में घुसने से कतराते हैं। इससे तालाबों की खुदाई नहीं हो पा रही है और न ही सफाई हो रही है। मशीनों द्वारा मनरेगा योजना में कार्य नहीं कराया जा सकता।
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पहले चरण में प्रत्येक ब्लाक में 20-20 गड्ढे खुदवाए जा रहे हैं। जिनसे भूजल को भी रीचार्ज किया जा सकेगा और जरूरत के समय पानी का उपयोग भी हो सकेगा।
सहारनपुर के आसपास नदियों और नहरों का जाल होते हुए भी यहां की धरती सूखती जा रही है। जलस्तर लगातार गिर रहा है और सभी ब्लॉक डार्क जोन में चले गए हैं। पीने के साथ सिंचाई का संकट भी गहराता जा रहा है।
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लाख प्रयासों के बावजूद जलस्तर बढ़ नहीं पा रहा है और पानी की कमी बढ़ती जा रही है। जबकि हर साल हो रही बारिश का लाखों क्यूसेक पानी नालियों में ही बह रहा है। इस बार बारिश के पानी को नालियों में न बहने देने के लिए प्रशासन ने प्रयास शुरू कर दिए हैं।
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मनरेगा योजना से प्रत्येक विकास खंड में 20-20 गड्ढे खुदवाए जा रहे हैं। पहले चरण में 200 गड्ढे खुदवाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्राम पंचायत की भूमि पर ही फिलहाल ये गड्ढे तैयार किए जा रहे हैं और बारिश के पानी का ढलान गड्ढों की ओर किया जा रहा है।
इसमें चारों ओर से नालियां बनाई जा रहीं हैं। जिससे बारिश का पानी सीधे गड्ढे में जाए। इस पानी का प्रयोग आवश्यक कार्यों के लिए भी किया जा सकेगा और सिंचाई के लिए भी पानी काम आ सकेगा।
गड्ढों की खुदाई का कार्य ग्राम पंचायतों के सहयोग से मनरेगा योजना के तहत कराया जा रहा है। जिससे मजदूरों को काम भी मिलेगा और बरसात के पानी को एकत्रित करने के लिए गड्ढे भी तैयार हो जाएंगे।
प्रत्येक गांव में तालाब हैं, तालाब में मनरेगा योजना के तहत सफाई कराने का भी प्रावधान है, लेकिन मजदूर तालाब में घुसने से कतराते हैं। इससे तालाबों की खुदाई नहीं हो पा रही है और न ही सफाई हो रही है। मशीनों द्वारा मनरेगा योजना में कार्य नहीं कराया जा सकता।