{"_id":"63dff14fb856a15ce2248270","slug":"na-saharanpur-news-c-14-1-106399-2023-02-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Saharanpur News: मार्च तक तैयार हो जाएगा हर्बल गार्डन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Saharanpur News: मार्च तक तैयार हो जाएगा हर्बल गार्डन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। कंपनी बाग में बनाए जा रहे हर्बल गार्डन के कार्य ने तेजी पकड़ ली है। तीन हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल बनाए जा रहे इस हर्बल गार्डन पर करीब 12.80 लाख की लागत आने की संभावना है। इसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों को लगाया जाएगा। इसके मार्च के पहले सप्ताह में इसके पूरा होने की उम्मीद है।
औषधीय पौधे मनुष्य की विभिन्न बीमारियों के उपचार में प्रयोग किए जाते हैं। लेकिन आमजन इन औषधीय पौधों के महत्व बारे में न सिर्फ कम जानते हैं बल्कि उनके संरक्षण के प्रति भी सजग नहीं हैं। लोगों को औषधीय पौधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कंपनी बाग परिसर में हर्बल गार्डन स्थापित किया जा रहा है। तीन हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बन रहे इस हर्बल गार्डन के लिए चारों तरफ सड़क और दो द्वारों का कार्य पूरा हो चुका है। अब इसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे रोपे जाने शेष रह गए हैं।
हर्बल गार्डन में रोपे जाएंगे ये औषधीय पौधे
हर्बल गार्डन में शरीर के विभिन्न अंगों के रोगों के काम आने वाले औषधीय पौधों की रोपाई की जाएगी। इसमें बालों के लिए दोचुन्टी, घृतकुमारी, भृंगराज, गुडहल, मेंहदी, पेट के लिए विधारा, दंती, शादाब, अग्निमंथा, निशोथ, मस्तिष्क के लिए शंखपुष्पी, मंडूकपर्णी, ब्राह्मी, ज्योतिष्मति, मलकागनी और सौंदर्य प्रसाधन के लिए काम आने वाले जिरेनीयम, सिट्रोनेला और नींबू घास के पौधे लगाए जाएंगे। त्वचा रोग के उपचार में काम आने वाले कत्था, अपामर्ग, घृतकुमारी, गुल-बबुना एवं बाबची के पौधे लगेंगे।
विज्ञापन
वहीं सिर, आंख, नाक, कान एवं गले के रोगों लिए गंगा तुलसी, दारू हल्दी, कटसरइया, द्रोणपुष्पी एवं बबूल, श्वसन तंत्र के लिए मुलेठी, षालपर्णी, कुलंजन, गुल बकावली एवं अंतमूल, विशिष्ट रोगों के लिए कुंदरू, गुड़मार, हृदय संबंधी रोगों के लिए पीली कनेर, तातरा, बानहेनदा, अदपुष्पी, रुद्राक्ष के पौधे लगाए जाएंगे। यकृत संबंधी बीमारियों के उपचार में काम आने वाले लुरहुर, कुंदरू, भूम्यालकी, पुनर्नवा, कालमेघ और मूत्र संबंधी रोगों के लिए पाकरमूल, रीठा, गोरखगांजा, पत्थर चूर, गोखरू के पौधे लगाए जाएंगे।
-- वर्जन --
हर्बल गार्डन के मार्च के प्रथम सप्ताह तक तैयार हो जाएगा। इसमें चारों तरफ की सड़कों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब इसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों को रोपा जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को न सिर्फ औषधीय पौधों का महत्व बताया जाएगा बल्कि इनके संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।-- - सुरेश कुमार, संयुक्त निदेशक औद्यानिक प्रयोग एवे प्रशिक्षण केंद्र।
विज्ञापन
सहारनपुर। कंपनी बाग में बनाए जा रहे हर्बल गार्डन के कार्य ने तेजी पकड़ ली है। तीन हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल बनाए जा रहे इस हर्बल गार्डन पर करीब 12.80 लाख की लागत आने की संभावना है। इसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों को लगाया जाएगा। इसके मार्च के पहले सप्ताह में इसके पूरा होने की उम्मीद है।
औषधीय पौधे मनुष्य की विभिन्न बीमारियों के उपचार में प्रयोग किए जाते हैं। लेकिन आमजन इन औषधीय पौधों के महत्व बारे में न सिर्फ कम जानते हैं बल्कि उनके संरक्षण के प्रति भी सजग नहीं हैं। लोगों को औषधीय पौधों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कंपनी बाग परिसर में हर्बल गार्डन स्थापित किया जा रहा है। तीन हजार वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बन रहे इस हर्बल गार्डन के लिए चारों तरफ सड़क और दो द्वारों का कार्य पूरा हो चुका है। अब इसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधे रोपे जाने शेष रह गए हैं।
विज्ञापन
हर्बल गार्डन में रोपे जाएंगे ये औषधीय पौधे
हर्बल गार्डन में शरीर के विभिन्न अंगों के रोगों के काम आने वाले औषधीय पौधों की रोपाई की जाएगी। इसमें बालों के लिए दोचुन्टी, घृतकुमारी, भृंगराज, गुडहल, मेंहदी, पेट के लिए विधारा, दंती, शादाब, अग्निमंथा, निशोथ, मस्तिष्क के लिए शंखपुष्पी, मंडूकपर्णी, ब्राह्मी, ज्योतिष्मति, मलकागनी और सौंदर्य प्रसाधन के लिए काम आने वाले जिरेनीयम, सिट्रोनेला और नींबू घास के पौधे लगाए जाएंगे। त्वचा रोग के उपचार में काम आने वाले कत्था, अपामर्ग, घृतकुमारी, गुल-बबुना एवं बाबची के पौधे लगेंगे।
विज्ञापन
वहीं सिर, आंख, नाक, कान एवं गले के रोगों लिए गंगा तुलसी, दारू हल्दी, कटसरइया, द्रोणपुष्पी एवं बबूल, श्वसन तंत्र के लिए मुलेठी, षालपर्णी, कुलंजन, गुल बकावली एवं अंतमूल, विशिष्ट रोगों के लिए कुंदरू, गुड़मार, हृदय संबंधी रोगों के लिए पीली कनेर, तातरा, बानहेनदा, अदपुष्पी, रुद्राक्ष के पौधे लगाए जाएंगे। यकृत संबंधी बीमारियों के उपचार में काम आने वाले लुरहुर, कुंदरू, भूम्यालकी, पुनर्नवा, कालमेघ और मूत्र संबंधी रोगों के लिए पाकरमूल, रीठा, गोरखगांजा, पत्थर चूर, गोखरू के पौधे लगाए जाएंगे।
हर्बल गार्डन के मार्च के प्रथम सप्ताह तक तैयार हो जाएगा। इसमें चारों तरफ की सड़कों का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अब इसमें विभिन्न प्रकार के औषधीय पौधों को रोपा जाएगा। इसके माध्यम से लोगों को न सिर्फ औषधीय पौधों का महत्व बताया जाएगा बल्कि इनके संरक्षण के प्रति भी जागरूक किया जाएगा।