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मातृभाषा मनुष्य की सामाजिक और भाषाई पहचान- अंजू
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मातृभाषा मनुष्य की सामाजिक और भाषाई पहचान - अंजू
नागल। राजकीय महिला महाविद्यालय कोटा में बृहस्पतिवार को मातृभाषा दिवस मनाया। इसका शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजू सिंह ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप जलाकर किया।
कार्यक्रम में मातृभाषा आधारित पुस्तकों की प्रदर्शनी, भाषण प्रतियोगिता, लघु नाटिका का प्रदर्शन एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। प्राचार्य प्रोफेसर अंजू सिंह ने कहा विश्व में भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने और मातृ भाषाओं के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर साल 21 फरवरी मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है। मातृभाषा मनुष्य की सामाजिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय एवं भाषाई पहचान है। यह मनुष्य की सभ्यता और संस्कारों की भाषा है, जिसके आधार पर व्यक्तित्व विकास एवं संस्कारों का निर्माण होता है। हम सभी को मातृभाषा का सम्मान करते हुए निरंतर इसके प्रचार-प्रसार के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। छात्रा स्वाति, दिव्या, साहिबा, सजो खातून, कविता, नाजिया आदि ने विचारों के माध्यम से मातृभाषा की उपयोगिता, महत्व, आवश्यकता तथा इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. पूनम यादव ने किया। इसमें प्रताप सिंह रावत, डॉ. संतोष चौधरी, डॉ. कल्पना राव, प्रदीप कुमार आदि रहे।
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नागल। राजकीय महिला महाविद्यालय कोटा में बृहस्पतिवार को मातृभाषा दिवस मनाया। इसका शुभारंभ महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजू सिंह ने मां सरस्वती के चित्र के सम्मुख दीप जलाकर किया।
कार्यक्रम में मातृभाषा आधारित पुस्तकों की प्रदर्शनी, भाषण प्रतियोगिता, लघु नाटिका का प्रदर्शन एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया। प्राचार्य प्रोफेसर अंजू सिंह ने कहा विश्व में भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने और मातृ भाषाओं के प्रति जागरूकता लाने के उद्देश्य से हर साल 21 फरवरी मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाता है। मातृभाषा मनुष्य की सामाजिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रीय एवं भाषाई पहचान है। यह मनुष्य की सभ्यता और संस्कारों की भाषा है, जिसके आधार पर व्यक्तित्व विकास एवं संस्कारों का निर्माण होता है। हम सभी को मातृभाषा का सम्मान करते हुए निरंतर इसके प्रचार-प्रसार के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। छात्रा स्वाति, दिव्या, साहिबा, सजो खातून, कविता, नाजिया आदि ने विचारों के माध्यम से मातृभाषा की उपयोगिता, महत्व, आवश्यकता तथा इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। संचालन डॉ. पूनम यादव ने किया। इसमें प्रताप सिंह रावत, डॉ. संतोष चौधरी, डॉ. कल्पना राव, प्रदीप कुमार आदि रहे।
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