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प्रभु की रासलीला में सभी झूमे
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 09 Jun 2016 12:38 AM IST
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Lord Raasleela
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सहारनपुर में श्री विग्रह प्राण प्रतिष्ठा के चतुर्दश वार्षिकोत्सव के शुभ अवसर पर श्री भूतेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित भव्य रासलीला के प्रथम दिन श्रीकृष्ण जन्म एवं माखन चोरी लीला का मंचन किया गया।
मंगलवार रात धोबीघाट स्थित मंदिर में आयोजित रासलीला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं श्री गणेश वंदना से हुआ। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डा. स्वामी देवकी नंदन महाराज के निर्देशन में रास मंडली के कलाकारों द्वारा दिखाया गया।
जब दुष्ट राजा कंस दिग्विजय हुआ तो उसने अपने प्रचार प्रसार के लिए अपनी चचेरी बहन देवकी का विवाह महाराज वासुदेव के साथ किया। जब कंस देवकी को रथ में बैठाकर विदा के लिए ले जा रहा था तो उसी समय आकाशवाणी हुई कि जिंस देवकी को तू इतने जोर से ले जा रहा है।
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उसकी आठवीं संतान के द्वारा तेरा वध होगा। आकाशवाणी सुनकर कंस ने देवकी को मारने का निश्चय किया। इस पर महाराज वासुदेव ने कंस से कहा कि तुम देवकी को मत मारो, मै इसकी संतानों को आपको सौंप दूंगा।
इसके पश्चात दिखाया गया कि कैसे कंस ने देवकी की प्रथम छह संतानों को मार दिया। सातवीं संतान को योग माया ने अपनी माया से रोहिणी के गर्भ में स्थापित किया जो कि भगवान बलराम हुए।
देवकी की आठवीं संतान को वासुदेव गोकुल में माता यशोदा के पास छोड़कर आए जो कि भगवान श्रीकृष्ण हुए। श्रीकृष्ण जन्म की लीला के पश्चात बाल श्रीकृष्ण की माखन चोरी की अलग अलग लीलाओं का मंचन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सतीश सिंघल, संजीव गुप्ता रहे। व्यवस्था के श्री भूतेश्वर महादेव प्रबंधक समिति के प्रधान मुकेश गोयल, जगमोहन लाल, आलोक अग्रवाल, आशु अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, नवीन गर्ग, राधेश्याम, रामनाथ बिंदल, आमोद गोयल, अनिल गोयल, वरुण गुप्ता, रूपक सेठ, डा. वीरेंद्र आजम, दिनेश रहे।
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मंगलवार रात धोबीघाट स्थित मंदिर में आयोजित रासलीला का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं श्री गणेश वंदना से हुआ। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डा. स्वामी देवकी नंदन महाराज के निर्देशन में रास मंडली के कलाकारों द्वारा दिखाया गया।
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जब दुष्ट राजा कंस दिग्विजय हुआ तो उसने अपने प्रचार प्रसार के लिए अपनी चचेरी बहन देवकी का विवाह महाराज वासुदेव के साथ किया। जब कंस देवकी को रथ में बैठाकर विदा के लिए ले जा रहा था तो उसी समय आकाशवाणी हुई कि जिंस देवकी को तू इतने जोर से ले जा रहा है।
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उसकी आठवीं संतान के द्वारा तेरा वध होगा। आकाशवाणी सुनकर कंस ने देवकी को मारने का निश्चय किया। इस पर महाराज वासुदेव ने कंस से कहा कि तुम देवकी को मत मारो, मै इसकी संतानों को आपको सौंप दूंगा।
इसके पश्चात दिखाया गया कि कैसे कंस ने देवकी की प्रथम छह संतानों को मार दिया। सातवीं संतान को योग माया ने अपनी माया से रोहिणी के गर्भ में स्थापित किया जो कि भगवान बलराम हुए।
देवकी की आठवीं संतान को वासुदेव गोकुल में माता यशोदा के पास छोड़कर आए जो कि भगवान श्रीकृष्ण हुए। श्रीकृष्ण जन्म की लीला के पश्चात बाल श्रीकृष्ण की माखन चोरी की अलग अलग लीलाओं का मंचन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि सतीश सिंघल, संजीव गुप्ता रहे। व्यवस्था के श्री भूतेश्वर महादेव प्रबंधक समिति के प्रधान मुकेश गोयल, जगमोहन लाल, आलोक अग्रवाल, आशु अग्रवाल, दिनेश अग्रवाल, नवीन गर्ग, राधेश्याम, रामनाथ बिंदल, आमोद गोयल, अनिल गोयल, वरुण गुप्ता, रूपक सेठ, डा. वीरेंद्र आजम, दिनेश रहे।