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कोरोना काल में पड़ी मार, अब श्राद्ध पक्ष में और घटेगा कारोबार
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कोरोना काल में पड़ी मार, अब श्राद्ध पक्ष में और घटेगा कारोबार
सहारनपुर। कोरोना काल में हर तरह का कारोबार घटा है। श्राद्ध पक्ष बुधवार से शुरू हो रहा है। श्राद्ध पक्ष में कोई शुभ काम नहीं होता है। इसलिए कारोबार और प्रभावित होगा। इस बार नवरात्र भी एक माह की देरी से शुरू होंगे, ऐसे में व्यापारियों के सामने संकट खड़ा है।
कोरोना काल में वाहनों, कपड़ों, सराफा और प्रॉपर्टी कारोबार में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। दिल्ली रोड स्थित टू और फोर व्हीलर एजेंसी के स्वामी निपुण जैन ने बताया कि कोरोना से पहले हर माह 500 टू व्हीलर और 30 से अधिक फोर व्हीलर बिकते थे। मगर, कोरोना काल में खरीदारी में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। अब 300 से 350 टू व्हीलर और 20 फोर व्हीलर वाहन ही बिक रहे हैं। इसी तरह अन्य वाहनों की एजेंसियों पर भी फर्क पड़ा है।
कोर्ट रोड के सराफा कारोबारी नितिन जैन का कहना है कि सराफा कारोबार कोरोना में पूरी तरह प्रभावित हुआ है। शादियों के कार्यक्रम स्थगित हुए हैं, जिस वजह से आर्डर नहीं मिल पाए। कोरोना व लॉकडाउन की वजह से लोगों के सामने आर्थिक संकट भी आया है। इसका असर सोना-चांदी के कारोबार पर पड़ा है। श्राद्ध पक्ष में खरीदारी भी नहीं होती है। रायवाला बाजार के कपड़ा कारोबारी भजन लाल का कहना है कि काम 30 से 40 प्रतिशत तक घटा है। श्राद्ध पक्ष में रिटेल की बिक्री तो 20 से 30 प्रतिशत ही रह जाती है। हालांकि, थोक के कारोबार में ज्यादा कमी नहीं आती है।
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अधिमास की वजह से एक माह देरी से आएंगे नवरात्र
ब्रह्मपुरी कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि बुधवार को साढ़े दस बजे तक पूर्णिमा है। उसके बाद पहला श्राद्ध शुरू हो जाएगा। लेकिन मंगलवार 9.38 से ही इसकी तिथि आरंभ हो जाती है, तो कुछ लोग इस तिथि में भी पहला श्रद्धा कर सकते हैं। इस बार अधिमास होने की वजह से नवरात्र एक महीना देरी से आएंगे। पहला नवरात्र 17 अक्तूबर को होगा। हर वर्ष श्राद्ध पक्ष खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्र शुरू होते थे, लेकिन इस बार एक सितंबर से 17 सितंबर तक श्राद्ध पक्ष रहेगा। 18 सितंबर से 16 अक्तूबर तक अधिमास रहेगा, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
विधिपूर्वक श्राद्ध करने से होगी पितरों की तृप्ति
विधिपूर्वक किए श्राद्ध से पितरों की तृप्ति होती है। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को यश और कीर्ति प्राप्त होती है, लेकिन अगर सावधानी न बरती गई तो कष्ट भी भोगना पड़ता है। आचार्य रोहित वशिष्ठ बताते हैं कि देश काल में पात्र में विधि पूर्वक श्रद्धा से पितरों के लिए जो कार्य किया जाए, वह श्राद्ध कहलाता है। देश का अर्थ स्थान है, काल का अर्थ समय है, पात्र का अर्थ ब्राह्मण है, जिसे हम श्राद्ध की सामग्री दे रहे हैं। इन तीनों को भली-भांति समझकर ही श्राद्ध करना चाहिए। इस बार कोरोना की वजह से घरों में रहकर ही श्राद्ध करना उत्तम होगा। संक्रमण को देखते हुए कच्चा राशन ही दान करें।
श्राद्ध में इन बातों का रखें ध्यान
ऐसे करें श्राद्ध
-- भोजन पत्ते पर रखकर गाय और कुत्ते को खिलाएं।
-- भोजन भूमि या छत पर डालकर कौवे को खिलाना चाहिए।
-- पत्ते पर रखकर देवताओं के लिए अन्न निकालें और गाय को खिलाएं।
-- चींटी के लिए भी भोजन निकालें।
-- अग्नि के लिए भोजन निकालकर थोड़ा अन्न अग्नि में डालकर शेष अन्न गाय को खिलाएं। इन सबके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं।
तिल और कुशा हाथ में लेकर लें संकल्प
सहारनपुर। तिल और कुशा हाथ में लेकर लेकर संकल्प लें। चांदी का दान, भगवान के नाम का जप करें। दूध, गंगाजल, शहद, फल, दही, धान, तिल, गेहूं, मूंग और सरसों का तेल शुभ माने गए हैं। तुलसी पत्र का प्रयोग भी श्राद्ध में अवश्य करना चाहिए। तुलसी की गंध से पितृगण प्रसन्न होते हैं। फलों में आम, बेल, अनार, आंवला, नारियल, खजूर, अंगूर और केले का इस्तेमाल करें। श्राद्ध में चंदन की सुगंध को भी शुभ माना गया है। ब्राह्मण को लोहे के बर्तन में भोजन न परोसें। सोना, चांदी, कांसा, तांबा धातु के बर्तनों अधिक महत्व है। मिट्टी के बर्तन में भोजन खिलाना भी उत्तम है।
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सहारनपुर। कोरोना काल में हर तरह का कारोबार घटा है। श्राद्ध पक्ष बुधवार से शुरू हो रहा है। श्राद्ध पक्ष में कोई शुभ काम नहीं होता है। इसलिए कारोबार और प्रभावित होगा। इस बार नवरात्र भी एक माह की देरी से शुरू होंगे, ऐसे में व्यापारियों के सामने संकट खड़ा है।
कोरोना काल में वाहनों, कपड़ों, सराफा और प्रॉपर्टी कारोबार में 30 से 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। दिल्ली रोड स्थित टू और फोर व्हीलर एजेंसी के स्वामी निपुण जैन ने बताया कि कोरोना से पहले हर माह 500 टू व्हीलर और 30 से अधिक फोर व्हीलर बिकते थे। मगर, कोरोना काल में खरीदारी में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। अब 300 से 350 टू व्हीलर और 20 फोर व्हीलर वाहन ही बिक रहे हैं। इसी तरह अन्य वाहनों की एजेंसियों पर भी फर्क पड़ा है।
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कोर्ट रोड के सराफा कारोबारी नितिन जैन का कहना है कि सराफा कारोबार कोरोना में पूरी तरह प्रभावित हुआ है। शादियों के कार्यक्रम स्थगित हुए हैं, जिस वजह से आर्डर नहीं मिल पाए। कोरोना व लॉकडाउन की वजह से लोगों के सामने आर्थिक संकट भी आया है। इसका असर सोना-चांदी के कारोबार पर पड़ा है। श्राद्ध पक्ष में खरीदारी भी नहीं होती है। रायवाला बाजार के कपड़ा कारोबारी भजन लाल का कहना है कि काम 30 से 40 प्रतिशत तक घटा है। श्राद्ध पक्ष में रिटेल की बिक्री तो 20 से 30 प्रतिशत ही रह जाती है। हालांकि, थोक के कारोबार में ज्यादा कमी नहीं आती है।
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अधिमास की वजह से एक माह देरी से आएंगे नवरात्र
ब्रह्मपुरी कॉलोनी निवासी ज्योतिषाचार्य रोहित वशिष्ठ ने बताया कि बुधवार को साढ़े दस बजे तक पूर्णिमा है। उसके बाद पहला श्राद्ध शुरू हो जाएगा। लेकिन मंगलवार 9.38 से ही इसकी तिथि आरंभ हो जाती है, तो कुछ लोग इस तिथि में भी पहला श्रद्धा कर सकते हैं। इस बार अधिमास होने की वजह से नवरात्र एक महीना देरी से आएंगे। पहला नवरात्र 17 अक्तूबर को होगा। हर वर्ष श्राद्ध पक्ष खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्र शुरू होते थे, लेकिन इस बार एक सितंबर से 17 सितंबर तक श्राद्ध पक्ष रहेगा। 18 सितंबर से 16 अक्तूबर तक अधिमास रहेगा, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।
विधिपूर्वक श्राद्ध करने से होगी पितरों की तृप्ति
विधिपूर्वक किए श्राद्ध से पितरों की तृप्ति होती है। श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को यश और कीर्ति प्राप्त होती है, लेकिन अगर सावधानी न बरती गई तो कष्ट भी भोगना पड़ता है। आचार्य रोहित वशिष्ठ बताते हैं कि देश काल में पात्र में विधि पूर्वक श्रद्धा से पितरों के लिए जो कार्य किया जाए, वह श्राद्ध कहलाता है। देश का अर्थ स्थान है, काल का अर्थ समय है, पात्र का अर्थ ब्राह्मण है, जिसे हम श्राद्ध की सामग्री दे रहे हैं। इन तीनों को भली-भांति समझकर ही श्राद्ध करना चाहिए। इस बार कोरोना की वजह से घरों में रहकर ही श्राद्ध करना उत्तम होगा। संक्रमण को देखते हुए कच्चा राशन ही दान करें।
श्राद्ध में इन बातों का रखें ध्यान
ऐसे करें श्राद्ध
-- भोजन पत्ते पर रखकर गाय और कुत्ते को खिलाएं।
-- भोजन भूमि या छत पर डालकर कौवे को खिलाना चाहिए।
-- पत्ते पर रखकर देवताओं के लिए अन्न निकालें और गाय को खिलाएं।
-- चींटी के लिए भी भोजन निकालें।
-- अग्नि के लिए भोजन निकालकर थोड़ा अन्न अग्नि में डालकर शेष अन्न गाय को खिलाएं। इन सबके बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं।
तिल और कुशा हाथ में लेकर लें संकल्प
सहारनपुर। तिल और कुशा हाथ में लेकर लेकर संकल्प लें। चांदी का दान, भगवान के नाम का जप करें। दूध, गंगाजल, शहद, फल, दही, धान, तिल, गेहूं, मूंग और सरसों का तेल शुभ माने गए हैं। तुलसी पत्र का प्रयोग भी श्राद्ध में अवश्य करना चाहिए। तुलसी की गंध से पितृगण प्रसन्न होते हैं। फलों में आम, बेल, अनार, आंवला, नारियल, खजूर, अंगूर और केले का इस्तेमाल करें। श्राद्ध में चंदन की सुगंध को भी शुभ माना गया है। ब्राह्मण को लोहे के बर्तन में भोजन न परोसें। सोना, चांदी, कांसा, तांबा धातु के बर्तनों अधिक महत्व है। मिट्टी के बर्तन में भोजन खिलाना भी उत्तम है।