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Saharanpur News: एक ही दिन में तीन किसानों की मौत से शोक में डूबा खैरसाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
गंगोह। खैरसाल गांव में मंगलवार का दिन दुखद समाचार लेकर आया। एक ही दिन में तीन किसानों की मृत्यु हो गई। अचानक हुई इन मौतों ने पूरे गांव में शोक की लहर व्याप्त है।
परिजनों ने बताया कि किसान जिले सिंह (82) हृदय रोगी थे, लेकिन हाल के दिनों में पूरी तरह स्वस्थ चल रहे थे।
मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे वह टीवी देख रहे थे। टीवी देखते समय अचानक वह कुर्सी से पीछे गिर पड़े। परिजनों ने जब उन्हें उठाया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उनकी मृत्यु के समय भी उनके हाथ में टीवी का रिमोट था। जिले सिंह के दो बेटे और दो बेटी हैं। सभी की शादी हो चुकी है।
इसके अलावा बाबूराम भाटी (50) पिछले सात आठ माह से कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। दोपहर दो बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।
इससे पहले की परिजन उन्हें चिकित्सक के पास ले जाते, उनकी मौत हो गई। उनके दो बेटे हैं। वहीं, गांव के ही विनोद कुमार (52) पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे उनकी भी मृत्यु हो गई।
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बताया जा रहा है कि इनकी भी माैत संभवत: हृदयाघात से ही हुई है। दोनों ही किसान खेतिहर मजदूर थे और अपने परिवार का भरण-पोषण मेहनत-मजदूरी से करते थे। गांव के श्मशान घाट पर जैसे ही एक साथ तीन चिताएं जलीं, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो उठीं। गांव के ज्यादातर घरों चूल्हा तक नहीं जला।
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गंगोह। खैरसाल गांव में मंगलवार का दिन दुखद समाचार लेकर आया। एक ही दिन में तीन किसानों की मृत्यु हो गई। अचानक हुई इन मौतों ने पूरे गांव में शोक की लहर व्याप्त है।
परिजनों ने बताया कि किसान जिले सिंह (82) हृदय रोगी थे, लेकिन हाल के दिनों में पूरी तरह स्वस्थ चल रहे थे।
मंगलवार को दोपहर करीब एक बजे वह टीवी देख रहे थे। टीवी देखते समय अचानक वह कुर्सी से पीछे गिर पड़े। परिजनों ने जब उन्हें उठाया, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि उनकी मृत्यु के समय भी उनके हाथ में टीवी का रिमोट था। जिले सिंह के दो बेटे और दो बेटी हैं। सभी की शादी हो चुकी है।
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इसके अलावा बाबूराम भाटी (50) पिछले सात आठ माह से कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। दोपहर दो बजे अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।
इससे पहले की परिजन उन्हें चिकित्सक के पास ले जाते, उनकी मौत हो गई। उनके दो बेटे हैं। वहीं, गांव के ही विनोद कुमार (52) पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। मंगलवार सुबह करीब 11 बजे उनकी भी मृत्यु हो गई।
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बताया जा रहा है कि इनकी भी माैत संभवत: हृदयाघात से ही हुई है। दोनों ही किसान खेतिहर मजदूर थे और अपने परिवार का भरण-पोषण मेहनत-मजदूरी से करते थे। गांव के श्मशान घाट पर जैसे ही एक साथ तीन चिताएं जलीं, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो उठीं। गांव के ज्यादातर घरों चूल्हा तक नहीं जला।