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Saharanpur News: निगम की कर प्रणाली में गड़बड़झाला, ऑडिट में लगी आपत्ति

Wed, 19 Feb 2025 11:49 PM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Wed, 19 Feb 2025 11:49 PM IST
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Irregularities in the corporation's tax system, objections raised in audit
सहारनपुर। नगर निगम कर प्रणाली में गड़बड़झाला सामने आया है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक ने कर प्रणाली पर विशेष आपत्ति लगाई है। ऑडिट में प्रथम दृष्टया पाया गया है कि नगर निगम सहारनपुर के कर अनुभाग द्वारा नगर निगम अधिनियम की धाराओं का अनुपालन नहीं किया जा रहा है और मनमर्जी से कर वसूला जा रहा है।
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गृहकर नगर निगम की आय का सबसे बड़ा स्रोत है, लेकिन ऑडिट में नगर निगम की कर प्रणाली कटघरे में आ गई है। ऑडिट में पाया गया है कि निगम का कर अनुभाग नियमानुसार काम नहीं कर रहा है। मुख्य नगर लेखा परीक्षक सच्चिदानंद त्रिपाठी की ओर से लगाई गई विशेष आपत्ति के अनुसार, कर अनुभाग द्वारा प्रमाणिक कर निर्धारण सूची तैयार न किए जाने से कर मांग, नामांतरण, नकल जारी करने की प्रक्रियाओं के विधिक रूप से अमान्य स्थिति है। इसमें एक नहीं, बल्कि कई सवाल उठाए गए हैं। इससे साबित होता है कि नगर निगम अधिनियम की धारा 207 से 213 तक का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। उधर, मामले को गंभीरता से लेते हुए महापौर डॉ. अजय कुमार द्वारा 11 फरवरी को नगरायुक्त संजय चौहान को पत्र लिखकर संबंधित अधिकारियों को उचित दिशा निर्देश देने को कहा गया है।
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विशेष आपत्ति में ऑडिटर ने उठाए ये सवाल
- नगर निगम सहारनपुर के गठन की तिथि के बाद से कब-कब कर निर्धारण पुनरीक्षित किया गया।
-नगर निगम अधिनियम 1969 की धारा 207 से 210 के अंतर्गत कर निर्धारण सूची कब-कब तैयार कराई गई।
-कर निर्धारण सूची तैयार करने से पहले क्या माननीय सदन की स्वीकृति प्राप्त की गई है या नहीं।
-क्या इस समय करों का पुनरीक्षण किया जा रहा है। यदि करों का पुनरीक्षण किया जा रहा है तो संपूर्ण नगर निगम क्षेत्र की कर निर्धारण सूची कब तक तैयार हो जाएंगी।
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-करों का पुनरीक्षण किस अधिकारी के अधीन और किस अधिकारी के द्वारा किया जा रहा है और ऐसे भवनों पर लगाए करों पर आपत्तियां कब तक मांगी जाएंगी।
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महानगर में भवनों की संख्या
महानगर में वर्ष 2015 में भवनों का सर्वे हुआ था, जिसके आधार पर अभी तक करीब 1.45 लाख भवनों से कर वसूला जा रहा था। अब जीआईएस सर्वे (जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम यानी भौगोलिक सूचना प्रणाली) के बाद भवनों की संख्या बढ़कर 2,13,035 हो गई है, जिनमें करीब 32 हजार प्लॉट हैं।

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सर्वे के बाद लिस्ट जारी होनी चाहिए, जिसमें लोगों से आपत्तियां मांगी जानी चाहिए। केवल एक नहीं दो या तीन बार आपत्ति मांगी जानी चाहिए। अभी तक मनमर्जी से चीजें चल रही हैं, जिस पर विशेष आपत्ति लगी है। इसी संबंध में जवाब देने को कहा गया है।
- डॉ. अजय कुमार, महापौर
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