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खाताखेड़ी में शहीद हुए थे इंस्पेक्टर ध्रुवलाल और एक सिपाही
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सहारनपुर। मुठभेड़ में पुलिसकर्मियों की शहादत के कई मामले सहारनपुर जिले में भी पहले हो चुके हैं। करीब दो दशक पूर्व हुई मुठभेड़ में तीन पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
वर्ष 1994 में जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को छुड़ाने के लिए आतंकियों ने सहारनपुर से ही साजिश रची थी। हापुड़ से अगवा किए गए विदेशी नागरिकों को सहारनपुर के खाताखेड़ी में रखा गया था। नवंबर 1994 में हुए इस मामले में विदेशी नागरिकों को छुड़ाने के लिए पुलिस की आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव और एक सिपाही शहीद हो गया था, जबकि एक आतंकी भी मारा गया था। इस मुठभेड़ में पुलिस को अंदाजा नहीं था कि खाताखेड़ी के जिस मकान में विदेशी नागरिकों को रखा गया है, वहां आतंकियों के पास किस तरह के असलहे हैं।
सतराना गिरोह से मुठभेड़ में शहीद हुए थे थानाध्यक्ष
सहारनपुर। जरनैल सिंह सतराना के गिरोह ने 90 के दशक में सहारनपुर में नेटवर्क खड़ा किया था। 1994 में सहारनपुर के अंबाला रोड से ढाबा मालिक का अपहरण किया था। 2 नवंबर 1996 को सहारनपुर के अपलाना गांव के व्यक्ति ने अपने डेरे पर आतंकियों के होने की सूचना पुलिस को दी थी। मौके पर पहुंची सरसावा पुलिस की आतंकियों से मुठभेड़ हुई, जिसमें तत्कालीन सरसावा थानाध्यक्ष इस्लामुलहक शहीद हो गए थे, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों को भागकर जान बचानी पड़ी थी।
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वर्ष 1994 में जैश ए मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को छुड़ाने के लिए आतंकियों ने सहारनपुर से ही साजिश रची थी। हापुड़ से अगवा किए गए विदेशी नागरिकों को सहारनपुर के खाताखेड़ी में रखा गया था। नवंबर 1994 में हुए इस मामले में विदेशी नागरिकों को छुड़ाने के लिए पुलिस की आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई, जिसमें इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव और एक सिपाही शहीद हो गया था, जबकि एक आतंकी भी मारा गया था। इस मुठभेड़ में पुलिस को अंदाजा नहीं था कि खाताखेड़ी के जिस मकान में विदेशी नागरिकों को रखा गया है, वहां आतंकियों के पास किस तरह के असलहे हैं।
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सतराना गिरोह से मुठभेड़ में शहीद हुए थे थानाध्यक्ष
सहारनपुर। जरनैल सिंह सतराना के गिरोह ने 90 के दशक में सहारनपुर में नेटवर्क खड़ा किया था। 1994 में सहारनपुर के अंबाला रोड से ढाबा मालिक का अपहरण किया था। 2 नवंबर 1996 को सहारनपुर के अपलाना गांव के व्यक्ति ने अपने डेरे पर आतंकियों के होने की सूचना पुलिस को दी थी। मौके पर पहुंची सरसावा पुलिस की आतंकियों से मुठभेड़ हुई, जिसमें तत्कालीन सरसावा थानाध्यक्ष इस्लामुलहक शहीद हो गए थे, जबकि अन्य पुलिसकर्मियों को भागकर जान बचानी पड़ी थी।
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