{"_id":"58d172b84f1c1b8a591a1234","slug":"hindan-dhamola-panodhoi-to-live-life","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिंडन, ढमोला, पांवधोई को जीवन मिलने की आस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिंडन, ढमोला, पांवधोई को जीवन मिलने की आस
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Wed, 22 Mar 2017 12:09 AM IST
विज्ञापन
सहारनपुर में ढमोला नदी की स्थिति।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर में अस्तित्व खत्म होने के कगार पर पहुंच चुकी नदियों की अब जीवन की उम्मीद जगी है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और नए निजाम की नदियों के प्रति सकारात्मक भावनाओं ने हिंडन, ढमोला और पांवधोई नदियों के एक बार फिर पुनर्जीवित होने की संभावनाएं बढ़ा दी हैं।
योगी राज के बाद लोगों की आस भी बढ़ी है। सहारनपुर से गाजियाबाद तक के क्षेत्र को लहलहा देने वाली हिंडन, सहारनपुर की जीवनदायिनी ढमोला एवं पांवधोई को किसी और ने नहीं यहां ही लालफीताशाही की उदासीनता ने ही समाप्ति की कगार पर खड़ा कर दिया है।
कभी जीवनदायिनी मानी जाने वाली ये नदियों का पानी अब नाले के पानी से भी अधिक खराब और खतरनाक हो गया है। जिन नदियों में लोग कभी नहाते थे, उन नदियों के पानी को अब छू भी नहीं सकते। इन नदियों में न सिर्फ गंदे नालों का पानी बह रहा है, बल्कि खतरनाक रसायन युक्त पानी भी छोड़ा जा रहा है।
विज्ञापन
खासकर हिंडन नदी जो सहारनपुर, शामली, बागपत से होकर गाजियाबाद तक पहुंचती है, उसमें इतने खतरनाक केमिकल पहुंच रहे हैं जिस कारण इसमें मछलियां तक समाप्त हो चुकीं हैं।
फसलों को लहलहाने वाली इस नदी का पानी किसी खेत में पहुंच जाए तो उस खेत की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर रही है। इस पानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गलती से कोई किसान उगाई हुईं सब्जियां इस पानी में धो ले तो सब्जियों का रंग तक बदल जाता है।
शहर के बीचों बीच से बह रही पांवधोई और ढमोला नदी को तो सहारनपुर के प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी ने ही खत्म होने के कगार पर पहुंचा दिया है। अफसरों की शह पर नदियों पर कब्जा करा दिया गया और शहर के गंदे नालों के पानी को शोधन किए बगैर की सीधे नदियों में डाल दिया गया।
जिससे नदियां अब नाले का रूप लेती जा रही हैं। हाईकोर्ट द्वारा गंगा, यमुना नदियों को जीवित व्यक्ति का अधिकार और दर्जा दिए जाने एवं अधिकारियों की क्लास लिए जाने से इन नदियों को भी पुनर्जीवन की आस बंधने लगी है।
नदियों को स्वच्छ करने के मुद्दे को लेकर केंद्र में आई भाजपा सरकार अब प्रदेश में भी आ चुकी है और महंत आदित्यनाथ प्रदेश के मुखिया बने हैं तो यहां की नदियों के जीवन की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
डीएम एम शफकत कमाल का कहना है कि नदियों को लेकर वह काफी गंभीर हैं और बुधवार को ही एक बैठक में इस विषय में अधिकारियों के समक्ष वार्ता की जाएगी। एक सप्ताह में ही नदियों के लिए अभियान शुरू करा दिया जाएगा। सबसे पहले ढमोला नदी से अतिक्रमण हटवाकर उसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा।
विज्ञापन
योगी राज के बाद लोगों की आस भी बढ़ी है। सहारनपुर से गाजियाबाद तक के क्षेत्र को लहलहा देने वाली हिंडन, सहारनपुर की जीवनदायिनी ढमोला एवं पांवधोई को किसी और ने नहीं यहां ही लालफीताशाही की उदासीनता ने ही समाप्ति की कगार पर खड़ा कर दिया है।
विज्ञापन
कभी जीवनदायिनी मानी जाने वाली ये नदियों का पानी अब नाले के पानी से भी अधिक खराब और खतरनाक हो गया है। जिन नदियों में लोग कभी नहाते थे, उन नदियों के पानी को अब छू भी नहीं सकते। इन नदियों में न सिर्फ गंदे नालों का पानी बह रहा है, बल्कि खतरनाक रसायन युक्त पानी भी छोड़ा जा रहा है।
विज्ञापन
खासकर हिंडन नदी जो सहारनपुर, शामली, बागपत से होकर गाजियाबाद तक पहुंचती है, उसमें इतने खतरनाक केमिकल पहुंच रहे हैं जिस कारण इसमें मछलियां तक समाप्त हो चुकीं हैं।
फसलों को लहलहाने वाली इस नदी का पानी किसी खेत में पहुंच जाए तो उस खेत की फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर रही है। इस पानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गलती से कोई किसान उगाई हुईं सब्जियां इस पानी में धो ले तो सब्जियों का रंग तक बदल जाता है।
शहर के बीचों बीच से बह रही पांवधोई और ढमोला नदी को तो सहारनपुर के प्रशासन की लापरवाही और अनदेखी ने ही खत्म होने के कगार पर पहुंचा दिया है। अफसरों की शह पर नदियों पर कब्जा करा दिया गया और शहर के गंदे नालों के पानी को शोधन किए बगैर की सीधे नदियों में डाल दिया गया।
जिससे नदियां अब नाले का रूप लेती जा रही हैं। हाईकोर्ट द्वारा गंगा, यमुना नदियों को जीवित व्यक्ति का अधिकार और दर्जा दिए जाने एवं अधिकारियों की क्लास लिए जाने से इन नदियों को भी पुनर्जीवन की आस बंधने लगी है।
नदियों को स्वच्छ करने के मुद्दे को लेकर केंद्र में आई भाजपा सरकार अब प्रदेश में भी आ चुकी है और महंत आदित्यनाथ प्रदेश के मुखिया बने हैं तो यहां की नदियों के जीवन की उम्मीदें और बढ़ गई हैं।
डीएम एम शफकत कमाल का कहना है कि नदियों को लेकर वह काफी गंभीर हैं और बुधवार को ही एक बैठक में इस विषय में अधिकारियों के समक्ष वार्ता की जाएगी। एक सप्ताह में ही नदियों के लिए अभियान शुरू करा दिया जाएगा। सबसे पहले ढमोला नदी से अतिक्रमण हटवाकर उसे पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जाएगा।