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पुलिस की भूमिका पर उठने लगे सवाल

Tue, 03 May 2016 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर Updated Tue, 03 May 2016 12:32 AM IST
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Has raised questions on the role of police
shikaayat lekar jaate log. People are complaining. - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
सहारनपुर में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ने घड़कौली प्रकरण में राजपूतों का उत्पीड़न बर्दाश्त न करने की चेतावनी दी है। सोमवार को पत्रकार वार्ता करते हुए महासभा के अध्यक्ष डॉ. कुशल पाल सिंह पुंडीर ने प्रकरण में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
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साथ ही एक दलित संगठन पर मामले में लोगों को भड़काने और माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया। पुलिस से संगठन के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। अन्यथा की स्थिति में आंदोलन करने की चेतावनी दी। 
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पुंडीर ने कहा कि गांव घड़कौली में राजपूत और दलित वर्षों से साथ-साथ रहते आ रहे हैं। गांव में राजपूतों के केवल चार घर हैं, जबकि दलित बड़ी संख्या में हैं। ऐसे में गिनेचुने राजपूतों पर दलितों के उत्पीड़न करने का आरोप लगाया जाना गलत है।
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कहा कि गांव में जो भी मामला हुआ था उसे शांत कर दिया गया था। मगर बाद में दलितों के एक संगठन के युवक गांव पहुंचे, जिन्होंने लोगों को उकसाकर फसाद कराया।

आरोप है कि पुलिस ने दोषियों पर कार्रवाई करने की बजाय राजपूत समाज के निर्दोष लोगों पर कार्रवाई कर दी, जो निंदनीय है। उन्होंने कुछ दलों पर मामले में राजनीति करने का आरोप लगाया। नौ मई के बाद गांव बढेड़ी घोघू में राजपूत समाज की महापंचायत बुलाने का ऐलान भी किया।

अनिल ठाकुर ने गांव से पीएसी हटाने की मांग प्रशासन से की। पशिव कुमार राणा, अमित राणा, मोदी राणा, संजय राणा, मनोज राणा, सोनू राणा, जितेंद्र, पवन, विरेंद्र, अमर सिंह आदि थे। 

उधर, दलित नेता राहुल भारती के नेतृत्व में युवकों ने एसपी सिटी महेंद्र सिंह यादव से मुलाकात कर घड़कौली प्रकरण में दोषियों पर कार्रवाई करने की मांग की। आरोप लगाया कि पहले तो दबंगों ने बाबा साहब की प्रतिमा पर कालिख पोती।


जब दलित विरोध करने उतरे तो उन पर हमला कर दिया गया। उन्होंने गागलहेड़ी पुलिस पर दलित समाज के निर्दोष लोगों को गिरफ्तार करने का आरोप भी लगाया। 

महासभा के अध्यक्ष भिक्षु विजय घोष ने कहा कि 21वीं सदी में भी लोग अपनी दलित विरोधी मानसिकता से उबर नहीं पा रहे हैं। वह आज भी दलितों को दबाए रखना चाहते हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। धम्मा सागर, सुरेंद्र भाभरी, डॉ. एसपी सिंह, मीमचंद बौद्घ, हिमांशु बौद्घ, डॉ. अनिल गौतम आदि मौजूद रहे।
 
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