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सालभर में आधे नमूनों की भी नहीं हो सकी जांच
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Mon, 02 Jan 2017 12:03 AM IST
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सैंपल लेते अधिकारी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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सहारनपुर में तीन राज्यों की सीमा से जुड़े जिले में मिलावटखोर पूरी तरह सक्रिय है। लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग केवल त्योहारी सीजन में महज कागजी अभियान चलाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो विभाग द्वारा साल भर में 191 नमूने लिये गए। इनमें साल बीत गया, लेकिन जांच आधे नमूनों की भी पूरी नहीं हो सकी। विभाग के इस रवैये के चलते मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हो रहे है।
बता दें कि जनपद में मिलावटखोरी का धंधा बड़े पैमाने पर होता है। मिल्क समेत अन्य खाद्य प्रोडक्ट में मिलावट कर मोटे मुनाफे के लिए जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।
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यह पूरा खेल खाद्य सुरक्षा विभाग के संरक्षण में खेला जाता है। विभागीय अधिकारी इस पर रोकथाम के लिए अभियान तो चलाते है, लेकिन यह अभियान सिर्फ त्यौहारी सीजन में चलाया जाता है। उसमें भी विक्रेताओं से सेटिंग कर केवल खानापूर्ति ही होती रही है।
वर्ष 2016 में विभाग की टीम ने साल भर छापामारी कर कुल 191 नमूने लिए। जिसमें 92 नमूने की जांच तक नहीं हो पाई। इनमें 42 नमूने फेल मिले। विभाग की ओर से 53 के खिलाफ मुकदमा दायर कराया गया। इनमें 44 वाद ऐसे है जिनको न्यायालय ने दोषी माना है।
ऐसे मामलों में लाखों रुपये का जुर्माना भी वसूला गया। विभाग की ओर से साल भर हुई कार्रवाई में 15 लाख 63 हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया गया है।
न्यायालय और विभाग द्वारा कार्रवाई के बाद भी जनपद में मिलावटखोरों का धंधा जारी है। विभाग द्वारा अभियान साल भर चलाया जाए तो मिलावटखोरी पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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आंकड़ों पर नजर डालें तो विभाग द्वारा साल भर में 191 नमूने लिये गए। इनमें साल बीत गया, लेकिन जांच आधे नमूनों की भी पूरी नहीं हो सकी। विभाग के इस रवैये के चलते मिलावटखोरों के हौसले बुलंद हो रहे है।
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बता दें कि जनपद में मिलावटखोरी का धंधा बड़े पैमाने पर होता है। मिल्क समेत अन्य खाद्य प्रोडक्ट में मिलावट कर मोटे मुनाफे के लिए जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है।
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यह पूरा खेल खाद्य सुरक्षा विभाग के संरक्षण में खेला जाता है। विभागीय अधिकारी इस पर रोकथाम के लिए अभियान तो चलाते है, लेकिन यह अभियान सिर्फ त्यौहारी सीजन में चलाया जाता है। उसमें भी विक्रेताओं से सेटिंग कर केवल खानापूर्ति ही होती रही है।
वर्ष 2016 में विभाग की टीम ने साल भर छापामारी कर कुल 191 नमूने लिए। जिसमें 92 नमूने की जांच तक नहीं हो पाई। इनमें 42 नमूने फेल मिले। विभाग की ओर से 53 के खिलाफ मुकदमा दायर कराया गया। इनमें 44 वाद ऐसे है जिनको न्यायालय ने दोषी माना है।
ऐसे मामलों में लाखों रुपये का जुर्माना भी वसूला गया। विभाग की ओर से साल भर हुई कार्रवाई में 15 लाख 63 हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया गया है।
न्यायालय और विभाग द्वारा कार्रवाई के बाद भी जनपद में मिलावटखोरों का धंधा जारी है। विभाग द्वारा अभियान साल भर चलाया जाए तो मिलावटखोरी पर अंकुश लगाया जा सकता है।