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दोस्त चीखते रहे, पर नहीं माना कार्तिक
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Sat, 16 Apr 2016 01:26 AM IST
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कर्तिक के परिजनों से पूछताछ करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ट्रेन जैसे-जैसे उसकी ओर बढ़ी तो दूर खड़े दोस्तों को खतरे का अंदेशा हो गया था और वह कार्तिक को दूर हटने के लिए चीखने लगे। मगर, कार्तिक ट्रैक के पास ही डटा रहा। चंद सेकेंड में हंसी, खुशी का माहौल वीभत्स हादसे में तब्दील हो गया। दूर खड़े दोस्तों और खेतों में काम कर रहे लोग इस हादसे के बाद स्तब्ध रह गए।
सुबह साइकिलिंग पर निकले चार दोस्तों ने शायद यह नहीं सोचा होगा कि जब उनकी वापसी होगी तो इनमें से एक शायद कभी वापस नहीं लौट पाएगा। गीता कालोनी से साइकिल लेकर कार्तिक सीधे दिल्ली रोड स्थित पैरामाउंट आया और वहां से चारों चुनहैटी फाटक तक गए।
अचानक ट्रेन का हार्न सुनाई देते ही कार्तिक ने ट्रैक की ओर इशारा करते हुए बोला कि चलो ट्रेन के साथ सेल्फी लेंगे। दोस्तों ने मना किया तो वह अकेले ही ट्रैक की ओर बढ़ गया। ट्रेन दूर से आती दिखाई देने लगी तो वह ट्रैक के पास खड़े होकर सेल्फी लेने लगा। इस बीच तेज रफ्तार ट्रेन तेजी से काल की तरह की आगे बढ़ने लगी, मगर कार्तिक पूरी तरह खतरे से अनजान ही रहा।
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हालांकि ट्रेन की रफ्तार देखकर दूर खड़े दोस्तों ने चीखना शुरू कर दिया और उसे दूर हटने का इशारा भी करने लगे। मगर, ट्रेन की आवाज के बीच दोस्तों की आवाज कार्तिक तक नहीं पहुंच पाई। चंद सेकेंड में खुशी का पल वीभत्स हादसे में तब्दील हो गया। जैसे ही ट्रेन कार्तिक से कुछ दूरी पर थी तो हवा के तेज झोके ने उसे पूरी तरह हिला दिया।
वह कुछ समझ पाता उससे पहले ही हवा के दबाव में वह ट्रैक की ओर झुका और ट्रेन ने उसे चपेट में ले लिया। पलक झपकते ही हुए इस हादसे के गवाह रहे उसके दोस्त और किसान कुछ समझ पाते, उससे पहले ट्रेन की रफ्तार धीरे होने लगी। ट्रेन के अगले हिस्से में फंसा कार्तिक के शरीर का टुकड़ा भी ट्रेन के साथ खिसकता जा रहा था।
करीब 100 मीटर दूर जाकर लोको पायलट ने ट्रेन रोकी और उसके शरीर को बाहर निकाला। शरीर के टुकड़ों बिखरे हुए थे और उसके मोबाइल का कवर, जूते दूर इस हादसे की कहानी बयां कर रहे थे। इंस्पेक्टर एसके दूबे ने बताया कि लोको पायलट के मुताबिक हार्न देने पर भी कार्तिक नहीं हटा था।
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सुबह साइकिलिंग पर निकले चार दोस्तों ने शायद यह नहीं सोचा होगा कि जब उनकी वापसी होगी तो इनमें से एक शायद कभी वापस नहीं लौट पाएगा। गीता कालोनी से साइकिल लेकर कार्तिक सीधे दिल्ली रोड स्थित पैरामाउंट आया और वहां से चारों चुनहैटी फाटक तक गए।
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अचानक ट्रेन का हार्न सुनाई देते ही कार्तिक ने ट्रैक की ओर इशारा करते हुए बोला कि चलो ट्रेन के साथ सेल्फी लेंगे। दोस्तों ने मना किया तो वह अकेले ही ट्रैक की ओर बढ़ गया। ट्रेन दूर से आती दिखाई देने लगी तो वह ट्रैक के पास खड़े होकर सेल्फी लेने लगा। इस बीच तेज रफ्तार ट्रेन तेजी से काल की तरह की आगे बढ़ने लगी, मगर कार्तिक पूरी तरह खतरे से अनजान ही रहा।
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हालांकि ट्रेन की रफ्तार देखकर दूर खड़े दोस्तों ने चीखना शुरू कर दिया और उसे दूर हटने का इशारा भी करने लगे। मगर, ट्रेन की आवाज के बीच दोस्तों की आवाज कार्तिक तक नहीं पहुंच पाई। चंद सेकेंड में खुशी का पल वीभत्स हादसे में तब्दील हो गया। जैसे ही ट्रेन कार्तिक से कुछ दूरी पर थी तो हवा के तेज झोके ने उसे पूरी तरह हिला दिया।
वह कुछ समझ पाता उससे पहले ही हवा के दबाव में वह ट्रैक की ओर झुका और ट्रेन ने उसे चपेट में ले लिया। पलक झपकते ही हुए इस हादसे के गवाह रहे उसके दोस्त और किसान कुछ समझ पाते, उससे पहले ट्रेन की रफ्तार धीरे होने लगी। ट्रेन के अगले हिस्से में फंसा कार्तिक के शरीर का टुकड़ा भी ट्रेन के साथ खिसकता जा रहा था।
करीब 100 मीटर दूर जाकर लोको पायलट ने ट्रेन रोकी और उसके शरीर को बाहर निकाला। शरीर के टुकड़ों बिखरे हुए थे और उसके मोबाइल का कवर, जूते दूर इस हादसे की कहानी बयां कर रहे थे। इंस्पेक्टर एसके दूबे ने बताया कि लोको पायलट के मुताबिक हार्न देने पर भी कार्तिक नहीं हटा था।