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पराली जलाकर क्यों मार रहे मित्र कीट, खत्म कर रहे उर्वरा शक्ति

Thu, 07 Nov 2019 11:24 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Nov 2019 11:24 PM IST
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Friendly insects end by burning straw
पराली जलाने से खत्म हो जाते हैं मित्र कीट
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सहारनपुर। पराली को लेकर सुप्रीम कोर्ट बेहद सख्त है। सरकार पर आंखें तरेर रही है। किसानों पर पराली जलाने पर रिपोर्ट दर्ज होने के साथ जुर्माना भी लगाया जा रहा है। लेकिन जरा सी सोच को बदल दिया जाए तो यही पराली न तो प्रदूषण पैदा करेगी और न ही किसी तरह किसानों पर जुर्माना लेगा। बस, करना ये होगा कि पराली को जलाने की बजाय उसे किसान खेत में ही पूसा डिकम्पोजर के जरिये गलाकर वहीं खत्म कर सकते हैं। फायदे इसके ये होंगे कि पराली नहीं जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति बनी रहेगी। मित्र कीट नहीं जलेंगे। मृदा की स्थिति बेहतर होगी। मृदा में जीवांश कार्बन की मात्रा बढ़ जाएगी। जिससे जमीन की उर्वरा शक्ति में इजाफा होगा।
पराली सहित अन्य फसल अवशेेष जलाने से न सिर्फ पर्यावरण दूषित हो रहा है बल्कि भूमि की सेहत भी खराब हो रही है। इसके चलते फसल अवशेष प्रबंधन के लिए कृषि वैज्ञानिक पूसा डिकम्पोजर का प्रयोग करने के लिए किसानों को जागरूक कर रहे हैं। जनपद में सबसे अधिक पराली और गन्ने की पत्तियों को जलाया जाता है। फसल अवशेष को जलाने से पर्यावरण के साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति को भी नुकसान होता है। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी और फसल सुरक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉक्टर आईके कुशवाहा ने बताया कि फसल अवशेषों को कृषि यंत्रों की सहायता से मिट्टी में मिलाने के बाद पूसा डिकम्पोजर का प्रयोग करना चाहिए। पूसा डिकम्पोजर घोल की 500 लीटर मात्रा एक हेक्टेयर क्षेत्रफल के लिए पर्याप्त रहती है। जो फसल अवशेष को 30 से 40 दिनों में जैविक खाद में तब्दील कर देता है। इससे भूमि में जीवांश कार्बन की मात्रा में इजाफा होता है। जो मृदा की सेहत के लिए लाभकारी होता है। डिकम्पोजर के प्रयोग से खेत में दीमक, सफेद गिडार जैसी कीटों और मृदा रोगों के प्रकोप पर भी अंकुश लगता है। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को निशुल्क: पूसा वेस्ट डिकम्पोजर उपलब्ध करा रहा है।
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फसल अवशेष जलाने से होने वाला नुकसान
केवीके प्रभारी डा. आईके कुशवाह के अनुसार फसल अवशेष जलाने से न सिर्फ पर्यावरण दूषित होता है बल्कि भूमि के लिए भी नुकसानदेह रहता है। इससे भूमि में मौजूद पौषक तत्व नष्ट हो जाते हैं और कार्बनिक पदार्थों का भी ह्रास होता है। इसके अलावा जमीन की ऊपरी सतह पर रहने वाले मित्र कीट और केंचुआ आदि भी नष्ट हो जाते हैं। जो जमीन के लिए बेहद उपयोगी होते हैं।
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पूसा डिकम्पोजर बनाने की विधि
केवीके प्रभारी ने बताया कि पांच लीटर पानी में 150 ग्राम गुड डालकर अच्छी तरह उबालें और उसे ठंडा करके उसमें 50 ग्राम चने का आटा मिला लें। इसमें पूसा डिकम्पोजर के चार कैप्सूल तोड़कर डाल दें और उसे कपडे़ से ढककर रख दें। करीब दस दिनों में पूसा डिकम्पोजर का कल्चर तैयार हो जाएगा। इस घोल में सफेद और हरी फफूंद पैदा हो जाती है।
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