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Saharanpur News: पार्किंग की ठेका धनराशि के भुगतान में धोखाधड़ी, प्राथमिकी दर्ज, होगी वसूली

Sun, 21 Dec 2025 01:34 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर Updated Sun, 21 Dec 2025 01:34 AM IST
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Fraud in payment of parking contract amount, FIR registered, recovery will be done
पांवधोई नदी पर बनी निगम की पार्किंग
सहारनपुर। पार्किंग की ठेका धनराशि के भुगतान में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। नगर निगम की तरफ से ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इसके साथ ही ठेकेदार को ब्लैक लिस्ट करते हुए वसूली के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं।
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स्मार्ट सिटी योजना के तहत पांवधोई नदी पर दो पुल बनाकर पार्किंग तैयार की गई हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए दो अप्रैल 2025 को टेंडर की प्रक्रिया शुरू की गई थी। डीके कांट्रेक्टर नाम की फर्म, जो धर्मेंद्र कुमार निवासी औरंगाबाद उर्फ गंदेवड़ा गंगोह रोड शामली चलाते हैं को ठेका छोड़ा गया था। इनमें 420 वर्गमीटर में बनी पार्किंग का ठेका 6,61,000 रुपये, जबकि 525 वर्गमीटर में बनी दूसरी पार्किंग का ठेका भी 6,61,000 जीएसटी सहित दिया गया था। ठेका शर्त के अनुसार ठेकेदार द्वारा निर्धारित मूल्य का 50 फीसदी धनराशि आरटीजीएस के माध्यम से नगर निगम के खाते में जमा कराई गई थी। शेष 50 फीसदी धनराशि 6.61 लाख रुपये अगले तीन महीने के अंतराल पर 25-25 फीसदी कर दो बार में जमा कराई जानी थी, लेकिन ठेकेदार ने ऐसा नहीं किया।
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नगर निगम द्वारा नोटिस देने के बाद ठेकेदार ने पांच अक्तूबर को 1,25,000 रुपये चेक जमा कराया। दूसरा चेक संख्या 000006, जो 2,00,000 रुपये का था 15 अक्तूबर को जमा कराया, लेकिन खातों में पर्याप्त धनराशि न होने के कारण दोनों चेक बाउंस हो गए। इस पर नगर निगम ने प्रवर्तन दल की टीम के साथ पार्किंग बंद करा दी और 24 घंटे में शेष धनराशि जमा करने को कहा, जो अभी तक जमा नहीं कराई गई है। नगर निगम की ओर से राजस्व निरीक्षक मनीष कुमार द्वारा धर्मेंद्र के विरुद्ध कोतवाली मंडी में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। साथ ही ठेकेदार को काली सूची में डालते हुए दोनों ठेकों के 3,30,000 का वसूली प्रमाणपत्र जारी किया गया है, जबकि ठेकेदार पर नगर निगम का कुल 6.61 लाख बकाया है।
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कार्यकारिणी में भी उठा मामला
शुक्रवार 19 दिसंबर को हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में उप सभापति मयंक गर्ग ने पांवधोई नदी पर बनी पार्किंग का मामला उठाया। उन्होंने ठेकेदार द्वारा अधिक वसूली के आरोप लगाए थे। इस पर महापौर ने निर्धारित शुल्क के बोर्ड लगाने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे।

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ठेकेदार पहले भी झोंकते रहे हैं आंखों में धूल
ठेकेदार द्वारा नगर निगम के अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने का यह पहला वाकया नहीं है। जलकल अनुभाग में कई बार ठेकेदार फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र के आधार पर ठेका अपने नाम लेते पकड़े गए हैं। इनके अलावा एक ठेकेदार ने ई-स्टांप में कूटरचना कर दस रुपये के स्टांप को एक लाख और 80 रुपये के स्टांप को 80 लाख रुपये का दर्शाकर ठेके अपने नाम करा दिए थे।
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