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Saharanpur News: पूर्व एआर को-ऑपरेटिव को स्थानांतरण पर हाईकोर्ट से मिला स्टे
Fri, 02 Aug 2024 02:51 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Fri, 02 Aug 2024 02:51 AM IST
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सहारनपुर। जिले की 46 सहकारी समितियों में 90 नियुक्तियों के मामले में पूर्व एआर को-ऑपरेटिव सूर्य नारायण मिश्र को हाईकोर्ट से स्थानांतरण पर स्टे मिल गया है। आरोप लगा था कि आदर्श आचार संहिता के दौरान नियमों को ताक पर रखकर नियुक्तियां की गईं। इस मामले में पूर्व एआर को-ऑपरेटिव, चार एडीसीओ, चार एडीओ निलंबित भी हो चुके हैं।
इस मामले में सबसे पहली गाज पूर्व एआर को-ऑपरेटिव सूर्य नारायण मिश्र पर गिरी थी। उनका यहां से औरैया स्थानांतरण किया गया था। इसे लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। वहीं, जिलाधिकारी ने स्थानीय जांच कमेटी गठित की थी। इसके अलावा लखनऊ की टीम ने भी यहां आकर छानबीन की। इसके बाद पूर्व एआर को-ऑपरेटिव को निलंबित किया था। उनकी जगह नए एआर को-ऑपरेटिव रवि शंकर को भेजा गया।
पूर्व एआर को-ऑपरेटिव ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में दलील दी थी कि षड्यंत्र के तहत उनको फंसाकर तबादला किया गया है। इस मामले में उनको बृहस्पतिवार को स्थानांतरण पर स्टे मिल गया है। इस मामले में एडीओ राजपाल, आलोक, दिवाकर, परवेंद्र को निलंबित कर दिया था। इनसे पहले एडीसीओ दीपक त्रिपाठी, मेहरचंद, धर्मेद्र और शमशेर के निलंबित किया गया था।
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कई नेता भी जांच के दायरे में
इस मामले में सत्ता पक्ष के कई नेता भी जांच के दायरे में आए हैं। बताया जाता है कि इनकी शह पर ही आदर्श आचार संहिता के दौरान नियुक्तियां हुई थीं। इस मामले को लेकर शासन गंभीर है। क्योंकि, सहकारी समितियों के भाजपा से जुड़े सभापतियों ने भी मुख्यमंत्री से शिकायत की थी।
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इस मामले में सबसे पहली गाज पूर्व एआर को-ऑपरेटिव सूर्य नारायण मिश्र पर गिरी थी। उनका यहां से औरैया स्थानांतरण किया गया था। इसे लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। वहीं, जिलाधिकारी ने स्थानीय जांच कमेटी गठित की थी। इसके अलावा लखनऊ की टीम ने भी यहां आकर छानबीन की। इसके बाद पूर्व एआर को-ऑपरेटिव को निलंबित किया था। उनकी जगह नए एआर को-ऑपरेटिव रवि शंकर को भेजा गया।
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पूर्व एआर को-ऑपरेटिव ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से हाईकोर्ट में दलील दी थी कि षड्यंत्र के तहत उनको फंसाकर तबादला किया गया है। इस मामले में उनको बृहस्पतिवार को स्थानांतरण पर स्टे मिल गया है। इस मामले में एडीओ राजपाल, आलोक, दिवाकर, परवेंद्र को निलंबित कर दिया था। इनसे पहले एडीसीओ दीपक त्रिपाठी, मेहरचंद, धर्मेद्र और शमशेर के निलंबित किया गया था।
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कई नेता भी जांच के दायरे में
इस मामले में सत्ता पक्ष के कई नेता भी जांच के दायरे में आए हैं। बताया जाता है कि इनकी शह पर ही आदर्श आचार संहिता के दौरान नियुक्तियां हुई थीं। इस मामले को लेकर शासन गंभीर है। क्योंकि, सहकारी समितियों के भाजपा से जुड़े सभापतियों ने भी मुख्यमंत्री से शिकायत की थी।