{"_id":"5762f4994f1c1b144311c28b","slug":"fir-infraction-would-be-removed-in-a-week","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक सप्ताह में नहीं हटा अतिक्रमण तो होगी एफआईआर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एक सप्ताह में नहीं हटा अतिक्रमण तो होगी एफआईआर
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Fri, 17 Jun 2016 12:29 AM IST
विज्ञापन
Dmola is encroaching on the river
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहारनपुर शहर के बीच से गुजर रही ढमोला नदी पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए प्रशासन अब अपनी तैयारियों में जुट गया है। पहले चरण में सिंचाई विभाग ने 152 कब्जाधारियों की सूची जारी कर दी है।
इन्हें बाकायदा सार्वजनिक नोटिस के जरिए सूचित कर दिया गया है कि एक सप्ताह में अतिक्रमण नहीं हटा तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके बाद ध्वस्तीकरण कार्रवाई के लिए भी चेतावनी दी गई है।
कभी जीवनदायिनी रही ढमोला नदी की जमीन पर निजी हितों में सिंचाई विभाग और प्रशासन के अधिकारियों की सांठगांठ पर कब्जे हो गए। वर्ष 2013 में पहाड़ों पर हुई जोरदार बारिश के चलते ढमोला नदी में उफान आ गया और पूरा शहर बाढ़ की चपेट में आ गया।
विज्ञापन
उस दौरान हुई जांच में यह बात सामने आई कि ढमोला पर हुए कब्जे की वजह से बाढ़ आई। आनन-फानन में जांच कमेटी गठित की गई। जांच कमेटी में कुछ पुराने अफसरों को दोषी भी पाया था। इसके बाद 152 कब्जाधारियों को चिह्नित भी किए गए।
मगर, इच्छाशक्ति के अभाव में अफसरों का यह अभियान फाइलों में दम तोड़ गया। इस बार फिर अच्छे मानसून की उम्मीद के चलते बाढ़ की आशंका जताई जा रही है।
आपको बता दें कि प्रशासन अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट रणनीति नहीं बना पाया है। ऐसे में प्रशासन की मंशा पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण है कि 152 कब्जाधारियों की वजह से शहर के लाखों लोगों का जीवन संकट में है।
विज्ञापन
इन्हें बाकायदा सार्वजनिक नोटिस के जरिए सूचित कर दिया गया है कि एक सप्ताह में अतिक्रमण नहीं हटा तो एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इसके बाद ध्वस्तीकरण कार्रवाई के लिए भी चेतावनी दी गई है।
विज्ञापन
कभी जीवनदायिनी रही ढमोला नदी की जमीन पर निजी हितों में सिंचाई विभाग और प्रशासन के अधिकारियों की सांठगांठ पर कब्जे हो गए। वर्ष 2013 में पहाड़ों पर हुई जोरदार बारिश के चलते ढमोला नदी में उफान आ गया और पूरा शहर बाढ़ की चपेट में आ गया।
विज्ञापन
उस दौरान हुई जांच में यह बात सामने आई कि ढमोला पर हुए कब्जे की वजह से बाढ़ आई। आनन-फानन में जांच कमेटी गठित की गई। जांच कमेटी में कुछ पुराने अफसरों को दोषी भी पाया था। इसके बाद 152 कब्जाधारियों को चिह्नित भी किए गए।
मगर, इच्छाशक्ति के अभाव में अफसरों का यह अभियान फाइलों में दम तोड़ गया। इस बार फिर अच्छे मानसून की उम्मीद के चलते बाढ़ की आशंका जताई जा रही है।
आपको बता दें कि प्रशासन अब तक इस मामले में कोई स्पष्ट रणनीति नहीं बना पाया है। ऐसे में प्रशासन की मंशा पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण है कि 152 कब्जाधारियों की वजह से शहर के लाखों लोगों का जीवन संकट में है।