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Saharanpur News: हरियाणा बॉर्डर से प्रवेश न मिलने पर लौटे किसान
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संवाद न्यूज एजेंसी
मिर्जापुर। हथिनीकुंड बैराज हरियाणा बॉर्डर पर छठे दिन भी यूपी के किसानों को हरियाणा में धान की ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ प्रवेश नहीं मिल सका। इसके बाद देर शाम किसान मायूस होकर घर लौट गए।
उत्तर प्रदेश के किसान प्रत्येक वर्ष इस सीजन में अपनी धान की फसल को हमेशा से अच्छा दाम मिलने के चलते हरियाणा की मंडी खिदराबाद में बेचने ले जाते हैं। हरियाणा के अधिकारी हर साल अपनी हठधर्मिता दिखाते हुए धान लेने को मना करते हुए यूपी के किसानों को दो या तीन दिन के लिए बैन कर देते थे। बाद में उनकी ट्रैक्टर ट्रॉलियों को प्रवेश मिल जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। भाकियू (लोकशक्ति) कार्यकर्ताओं द्वारा वार्ता कर एसडीएम मानवेंद्र सिंह के माध्यम से शुरू में तो किसानों की धान से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों को प्रवेश मिल गया था।
इस पर अधिक संख्या में किसान दोबारा से धान लेकर हथिनीकुंड बैराज पहुंच गए, लेकिन बाद में हरियाणा के अधिकारियों ने धान से भरे वाहनों को लेने से स्पष्ट इंकार कर दिया। छठे दिन रविवार को काफी संख्या में किसान हरियाणा बॉर्डर की पुलिस चौकी पर अपनी ट्रॉलियों को प्रवेश मिलने की उम्मीद लिए खड़े रहे, परंतु देर शाम तक हरियाणा की तरफ से कोई जवाब न मिलने पर निराश होकर अपने घरों को लौटने लगे थे।
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हालांकि कुछ किसान अभी भी इस उम्मीद से वहीं डटे हैं कि शायद अब उन्हें हरियाणा में प्रवेश मिल जाए।
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मिर्जापुर। हथिनीकुंड बैराज हरियाणा बॉर्डर पर छठे दिन भी यूपी के किसानों को हरियाणा में धान की ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ प्रवेश नहीं मिल सका। इसके बाद देर शाम किसान मायूस होकर घर लौट गए।
उत्तर प्रदेश के किसान प्रत्येक वर्ष इस सीजन में अपनी धान की फसल को हमेशा से अच्छा दाम मिलने के चलते हरियाणा की मंडी खिदराबाद में बेचने ले जाते हैं। हरियाणा के अधिकारी हर साल अपनी हठधर्मिता दिखाते हुए धान लेने को मना करते हुए यूपी के किसानों को दो या तीन दिन के लिए बैन कर देते थे। बाद में उनकी ट्रैक्टर ट्रॉलियों को प्रवेश मिल जाता था, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। भाकियू (लोकशक्ति) कार्यकर्ताओं द्वारा वार्ता कर एसडीएम मानवेंद्र सिंह के माध्यम से शुरू में तो किसानों की धान से भरी ट्रैक्टर ट्रॉलियों को प्रवेश मिल गया था।
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इस पर अधिक संख्या में किसान दोबारा से धान लेकर हथिनीकुंड बैराज पहुंच गए, लेकिन बाद में हरियाणा के अधिकारियों ने धान से भरे वाहनों को लेने से स्पष्ट इंकार कर दिया। छठे दिन रविवार को काफी संख्या में किसान हरियाणा बॉर्डर की पुलिस चौकी पर अपनी ट्रॉलियों को प्रवेश मिलने की उम्मीद लिए खड़े रहे, परंतु देर शाम तक हरियाणा की तरफ से कोई जवाब न मिलने पर निराश होकर अपने घरों को लौटने लगे थे।
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हालांकि कुछ किसान अभी भी इस उम्मीद से वहीं डटे हैं कि शायद अब उन्हें हरियाणा में प्रवेश मिल जाए।