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Saharanpur News: जिले की दो चीनी मिलों पर किसानों के 223.41 करोड़ रुपये बकाया
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- बकाया भुगतान नहीं होने से आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर शासन प्रशासन की तमाम कवायद कदमताल साबित हो रही हैं। जनपद की सात में से दो चीनी मिलों पर अभी भी किसानों का करीब 223.41 करोड रुपये गन्ना मूल्य का बकाया है। इसमें सबसे अधिक बकाया गांगनौली चीनी मिल पर हैं। जबकि दूसरे स्थान पर गागलहेड़ी चीनी मिल है।
बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने के चलते किसान आर्थिक तौर पर परेशान हैं। गन्ना क्रय अधिनियम के अनुसार चीनी मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान कराने का नियम है। इसके बाद बकाया गन्ना मूल्य पर 15 फीसदी की दर से ब्याज देने का प्रावधान है। इसके बावजूद किसानों को ना तो समय पर गन्ना मूल्य भुगतान हो पाता है और ना ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज ही दिलाया जाता है। पेराई सत्र समाप्त होने के करीब चार महीना बाद भी जिले की सात में से दो चीनी मिलों ने पूरा बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। जनपद की गांगनौली चीनी मिल पर 175.76 करोड रुपये और गागलहेडी चीनी मिल पर 47.64 करोड़ रुपये बकाया गन्ना मूल्य है। जबकि अन्य चीनी मिल गन्ना मूल्य का भुगतान कर चुकी हैं।
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-- वर्जन --
जनपद की दो चीनी मिलों पर 223.41 करोड रुपये गन्ना मूल्य के बकाया हैं। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान में कोताही बरत रही चीनी मिलों पर सख्ती की जा रही है। जल्द बकाया भुगतान करने को लेकर चीनी मिलों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। भुगतान करने में कोताही बरतने वाली चीनी मिल के विरुद्ध कडी कार्रवाई की जाएगी।-- - सुशील कुमार, जिला गन्ना अधिकारी।
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बोले किसान--
गांव नन्हेड़ा बुड्ढाखेड़ा निवासी किसान गय्यूर अहमद का कहना है कि उनकी बड़ी भाभी बीमार है, जिसका इलाज हायर मेडीकल सेंटर में चल रहा है। बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने से परिवार आर्थिक संकट में है।
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ग्राम मीरपुर मोहनपुर निवासी किसान हरिश्चंद्र ने बताया कि हाल ही में वे सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उनके इलाज पर काफी पैसा खर्च हुआ है। बकाया भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें इलाज के लिए ब्याज पर पैसा लेना पडा है।
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ग्राम मक्काबांस निवासी किसान जरीफ अहमद का कहना है कि बकाया भुगतान नहीं होने से रोजमर्रा का खर्च भी बडी मुश्किल से चल रहा है। अतिवृष्टि के चलते धान की फसल भी खराब हो गई। बच्चों की स्कूल की फीस तक रुकी हुई है।
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ग्राम चौरादेव निवासी गौरव यादव ने बताया कि जनपद के अधिकांश किसानों की अर्थव्यवस्था गन्ने पर निर्भर है। बकाया भुगतान नहीं होने से बिजली का बिल, बच्चों की स्कूली फीस से लेकर अन्य जरूरत पूरी करने के लिए आर्थिक तंगी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सहारनपुर। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान को लेकर शासन प्रशासन की तमाम कवायद कदमताल साबित हो रही हैं। जनपद की सात में से दो चीनी मिलों पर अभी भी किसानों का करीब 223.41 करोड रुपये गन्ना मूल्य का बकाया है। इसमें सबसे अधिक बकाया गांगनौली चीनी मिल पर हैं। जबकि दूसरे स्थान पर गागलहेड़ी चीनी मिल है।
बकाया गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने के चलते किसान आर्थिक तौर पर परेशान हैं। गन्ना क्रय अधिनियम के अनुसार चीनी मिल में गन्ना सप्लाई करने के 14 दिनों के अंदर गन्ना मूल्य भुगतान कराने का नियम है। इसके बाद बकाया गन्ना मूल्य पर 15 फीसदी की दर से ब्याज देने का प्रावधान है। इसके बावजूद किसानों को ना तो समय पर गन्ना मूल्य भुगतान हो पाता है और ना ही बकाया गन्ना मूल्य पर ब्याज ही दिलाया जाता है। पेराई सत्र समाप्त होने के करीब चार महीना बाद भी जिले की सात में से दो चीनी मिलों ने पूरा बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं किया है। जनपद की गांगनौली चीनी मिल पर 175.76 करोड रुपये और गागलहेडी चीनी मिल पर 47.64 करोड़ रुपये बकाया गन्ना मूल्य है। जबकि अन्य चीनी मिल गन्ना मूल्य का भुगतान कर चुकी हैं।
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जनपद की दो चीनी मिलों पर 223.41 करोड रुपये गन्ना मूल्य के बकाया हैं। बकाया गन्ना मूल्य भुगतान में कोताही बरत रही चीनी मिलों पर सख्ती की जा रही है। जल्द बकाया भुगतान करने को लेकर चीनी मिलों को नोटिस भी जारी किए गए हैं। भुगतान करने में कोताही बरतने वाली चीनी मिल के विरुद्ध कडी कार्रवाई की जाएगी।
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बोले किसान
गांव नन्हेड़ा बुड्ढाखेड़ा निवासी किसान गय्यूर अहमद का कहना है कि उनकी बड़ी भाभी बीमार है, जिसका इलाज हायर मेडीकल सेंटर में चल रहा है। बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने से परिवार आर्थिक संकट में है।
ग्राम मीरपुर मोहनपुर निवासी किसान हरिश्चंद्र ने बताया कि हाल ही में वे सड़क हादसे में घायल हो गए थे। उनके इलाज पर काफी पैसा खर्च हुआ है। बकाया भुगतान नहीं होने के कारण उन्हें इलाज के लिए ब्याज पर पैसा लेना पडा है।
ग्राम मक्काबांस निवासी किसान जरीफ अहमद का कहना है कि बकाया भुगतान नहीं होने से रोजमर्रा का खर्च भी बडी मुश्किल से चल रहा है। अतिवृष्टि के चलते धान की फसल भी खराब हो गई। बच्चों की स्कूल की फीस तक रुकी हुई है।
ग्राम चौरादेव निवासी गौरव यादव ने बताया कि जनपद के अधिकांश किसानों की अर्थव्यवस्था गन्ने पर निर्भर है। बकाया भुगतान नहीं होने से बिजली का बिल, बच्चों की स्कूली फीस से लेकर अन्य जरूरत पूरी करने के लिए आर्थिक तंगी है।