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... हर एक इंसान पत्थर हो गया
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शेरे नशिस्त में शायरों ने पेश किए कलाम
बेहट। शुक्रवार की रात मोहल्ला कस्साबान में शेरे नशिस्त का आयोजन किया गया, जिसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक उम्दा कलाम पेश कर जमकर वाहवाही लूटी।
शेख गुलफाम के आवास पर आयोजित नशिस्त का आगाज युवा शायर शादाब नियाजी ने नात ए पाक से किया। उन्होंने पढ़ा, ऐसा जलसा कुबूल होता है, जिसमें जिक्रे रसूल होता है। इसके बाद फैयाज अहमद फैयाज ने पढ़ा, मालूम नहीं आपको, हम जैसे दीवाने भागा नहीं करते कभी मैदान छोड़कर। डॉ. साबिर बेहटवी ने कहा कि इस तरह मुल्क के हालात बदल डालेंगे, बुग्ज की आग पे हम प्यार का जला डालेंगे। इसके अलावा उन्होंने पढ़ा तेरे खत तेरी यादें है मेरे पास, अकेला हूं मगर तन्हा नहीं हूं। शादाब नियाजी ने सुनाया, यहां सुनता नहीं कोई किसी की, हर एक इंसान पत्थर हो गया है। इस शेर को जमकर सराहा गया। मेहमान शायर तारीक रामपुरी ने पढ़ा, तुझसे बिछड़ के एक भी शाना नहीं मिला, फिर आंसुओं को कोई ठिकाना नहीं मिला। रागिब मुजफ्फरनगरी ने पढ़ा, मुझे इसका नहीं है गम के तन से रूह निकलेगी, मुझे गम है तेरा तोहफा मेरी उंगली से निकलेगा। नशिस्त की सदारत शेख गुलफाम तथा निजामत फैयाज अहमद ने की। इस मौके पर जाबिर कुरैशी, शेख परवेज आलम, नादिर मामा, आतिफ कुरैशी, राहुल सिंघल, अंशुल कुमार, शावेज अली, अलीजान ठेकेदार आदि मौजूद रहे।
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बेहट। शुक्रवार की रात मोहल्ला कस्साबान में शेरे नशिस्त का आयोजन किया गया, जिसमें शायरों ने एक से बढ़कर एक उम्दा कलाम पेश कर जमकर वाहवाही लूटी।
शेख गुलफाम के आवास पर आयोजित नशिस्त का आगाज युवा शायर शादाब नियाजी ने नात ए पाक से किया। उन्होंने पढ़ा, ऐसा जलसा कुबूल होता है, जिसमें जिक्रे रसूल होता है। इसके बाद फैयाज अहमद फैयाज ने पढ़ा, मालूम नहीं आपको, हम जैसे दीवाने भागा नहीं करते कभी मैदान छोड़कर। डॉ. साबिर बेहटवी ने कहा कि इस तरह मुल्क के हालात बदल डालेंगे, बुग्ज की आग पे हम प्यार का जला डालेंगे। इसके अलावा उन्होंने पढ़ा तेरे खत तेरी यादें है मेरे पास, अकेला हूं मगर तन्हा नहीं हूं। शादाब नियाजी ने सुनाया, यहां सुनता नहीं कोई किसी की, हर एक इंसान पत्थर हो गया है। इस शेर को जमकर सराहा गया। मेहमान शायर तारीक रामपुरी ने पढ़ा, तुझसे बिछड़ के एक भी शाना नहीं मिला, फिर आंसुओं को कोई ठिकाना नहीं मिला। रागिब मुजफ्फरनगरी ने पढ़ा, मुझे इसका नहीं है गम के तन से रूह निकलेगी, मुझे गम है तेरा तोहफा मेरी उंगली से निकलेगा। नशिस्त की सदारत शेख गुलफाम तथा निजामत फैयाज अहमद ने की। इस मौके पर जाबिर कुरैशी, शेख परवेज आलम, नादिर मामा, आतिफ कुरैशी, राहुल सिंघल, अंशुल कुमार, शावेज अली, अलीजान ठेकेदार आदि मौजूद रहे।