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अस्पतालों में संक्रमण फैलने का खतरा
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जिला अस्पताल में मरीजो की लगी लंबी कतार
- फोटो : SAHARANPUR
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सहारनपुर। कोरोना संक्रमण के मामले में अस्पताल सबसे खतरनाक जगह माने जा रहे हैं। सहारनपुर के कई मरीज जो अन्य बीमारियों के इलाज के लिए देहरादून के निजी अस्पतालों में गए थे, मगर लौटे तो कोरोना संक्रमित होकर। एक व्यक्ति की तो मात्र अस्थियां ही लौटीं। ऐसे में चिकित्सा विभाग की सलाह है कि बेवजह अस्पतालों में ना जाएं। यदि जाने की मजबूरी हो तो मास्क लगाकर जाएं और पूरी सावधानी बरतें।
बेहट निवासी एक व्यक्ति को कैंसर है। करीब 15 दिन पहले वह कैंसर के इलाज के लिए देहरादून गए थे। वहां कुछ दिन इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई, मगर एहतियातन उनका सैंपल लेकर कोरोना जांच के लिए भेज दिया गया। वह रिपोर्ट का इंतजार किए बिना सहारनपुर लौट आए, मगर उनके पीछे-पीछे देहरादून से चिकित्सा विभाग को फोन कॉल भी आ गया कि कैंसर मरीज की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसी तरह शहर निवासी एक व्यक्ति दिल की बीमारी के इलाज के लिए देहरादून गए थे। वहां इलाज के दौरान वह कोरोना संक्रमित हुए, जिसके चलते उनकी वहीं मौत हो गई। देहरादून ही में उनका अंतिम संस्कार कर परिजनों केे अस्थियां सौंप दी गईं। अस्पताल इस समय सबसे खतरनाक जगहों में से एक है। छोटी मोटी बीमारियों का इलाज अपने डॉक्टर से फोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए कराया जाए तो बेहतर है।
सरकारी अस्पताल में मरीजों की कतार
एसबीडी जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार मरीज विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। फिजीशियन की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 तक मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें ज्यादातर मरीज सामान्य बीमारियों वाले निकल रहे हैं, जो घर रहते हुए भी इलाज करा सकते हैं। जिला महिला अस्पताल में तो बाह्य ओपीडी के बाहर मरीज सोशल डिस्टेंसिंग तक का पालन नहीं कर रहे हैं।
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इसमें कोई दोराय नहीं है कि सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त लोग आते हैं। जिसकी वजह से अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। लोगों को चाहिए कि अभी कुछ दिन बहुत अधिक जरूरी हो तो ही अस्पताल आएं। घर से भी फालतू की भीड़ लेकर ना आएं। लापरवाही ना करें और पूरी सावधानी बरतें।
डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।
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बेहट निवासी एक व्यक्ति को कैंसर है। करीब 15 दिन पहले वह कैंसर के इलाज के लिए देहरादून गए थे। वहां कुछ दिन इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई, मगर एहतियातन उनका सैंपल लेकर कोरोना जांच के लिए भेज दिया गया। वह रिपोर्ट का इंतजार किए बिना सहारनपुर लौट आए, मगर उनके पीछे-पीछे देहरादून से चिकित्सा विभाग को फोन कॉल भी आ गया कि कैंसर मरीज की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसी तरह शहर निवासी एक व्यक्ति दिल की बीमारी के इलाज के लिए देहरादून गए थे। वहां इलाज के दौरान वह कोरोना संक्रमित हुए, जिसके चलते उनकी वहीं मौत हो गई। देहरादून ही में उनका अंतिम संस्कार कर परिजनों केे अस्थियां सौंप दी गईं। अस्पताल इस समय सबसे खतरनाक जगहों में से एक है। छोटी मोटी बीमारियों का इलाज अपने डॉक्टर से फोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए कराया जाए तो बेहतर है।
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सरकारी अस्पताल में मरीजों की कतार
एसबीडी जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब एक हजार मरीज विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। फिजीशियन की ओपीडी में प्रतिदिन 150 से 200 तक मरीज पहुंच रहे हैं, जिनमें ज्यादातर मरीज सामान्य बीमारियों वाले निकल रहे हैं, जो घर रहते हुए भी इलाज करा सकते हैं। जिला महिला अस्पताल में तो बाह्य ओपीडी के बाहर मरीज सोशल डिस्टेंसिंग तक का पालन नहीं कर रहे हैं।
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इसमें कोई दोराय नहीं है कि सरकारी और गैर सरकारी अस्पतालों में विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त लोग आते हैं। जिसकी वजह से अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है। लोगों को चाहिए कि अभी कुछ दिन बहुत अधिक जरूरी हो तो ही अस्पताल आएं। घर से भी फालतू की भीड़ लेकर ना आएं। लापरवाही ना करें और पूरी सावधानी बरतें।
डॉ. बीएस सोढ़ी, सीएमओ।