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कभी भी हो सकता है मौत का धमाका
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देवबंद एमबीडी चौक पर मोबिल ऑयल और ज्वलनशील पदार्थों की कई दुकानें है। यह घनी आबादी वाला इलाका है।
- फोटो : SAHARANPUR
सहारनपुर। जिले भर में बड़ी संख्या में मोबिल ऑयल, पेंट और ज्वलनशील पदार्थों की दुकानों हैं, लेकिन इन दुकानों पर आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। वहीं, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गोदाम भी बना रखे हैं, जहां फायर ब्रिगेड का पहुंचना भी मुश्किल है। ऐसे में कभी हादसा हो जाए तो जानमाल की बड़ी हानि होगी।
जनपद मेरठ के मवाना में मोबिल ऑयल की दुकान में आग लगने के बाद हुए धमाके में तीन लोगों की मौत हो गई। इसके बाद अमर उजाला ने जनपद की स्थिति देखी तो जगह-जगह खतरे नजर आए। महानगर में अंबाला रोड, खाताखेड़ी, देहरादून रोड, चिलकाना रोड, दिल्ली रोड, किशनपुरा, बेदी गली, नवादा रोड, गलीरा रोड, चकराता मार्ग क्षेत्रों में मोबिल ऑयल, पेंट और ज्वलनशील पदार्थों की दुकानें हैं, लेकिन इन दुकानों पर कहीं पर भी आग बुझाने के व्यवस्था नहीं है।
वहीं, घनी आबादी वाले इलाके पुरानी मंडी, ढोलीखाल, शारदानगर, खलासी लाइन, किशनपुरा, खानआलमपुरा में व्यापारियों ने गोदाम भी बना रखे हैं। यहां पर भी आग से बचाव के इंतजाम नहीं है। इन जगहों पर आग लग जाए तो तंग गलियां होने की वजह से दमकल की गाड़ियों का पहुंचना भी मुश्किल है।
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इसी तरह बेहट में मोबाइल ऑयल की करीब 15 दुकानें है। इसके अलावा पेंट की भी दस दुकानें हैं, जिन पर ग्राहकों की भीड़ रहती है। इनमें ज्यादातर दुकानें हाईवे किनारे हैं। कुछ अतिव्यस्त इलाके शाकंभरी रोड पर है। किसी भी दुकान में अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं। देवबंद में भी भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबिल ऑयल, पेंट समेत अन्य ज्वलनशील पदार्थों की सैकड़ों दुकानें हैं, लेकिन किसी ने भी आग बुझाने के उपकरण नहीं लगाए हैं। इसी तरह गंगोह, नकुड़, रामपुर मनिहारान, छुटमलपुर, बिहारीगढ़, नागल और चिलकाना में भी ऐसी स्थिति है।
हादसों के बाद भी नहीं ले रहे सबक
जिले में पहले भी कई जगहों पर आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी व्यापारी सबक लेने को तैयार नहीं है। कई बार आतिशबाजी की दुकानों में भी आग लगी हैं, लेकिन आग से बचाव के इंतजाम फिर भी नहीं किए।
हो चुकी हैं यह घटनाएं
-- थाना कुुतुबशेर के सामने मोबिल ऑयल के गोदाम में आग लगी
-- देहरादून रोड पर स्पेयर पार्ट्स की मार्केट में आग लगी
-- मोहल्ला आतिशबाजान में पटाखों के गोदाम में आग लगने से हुई थी दो की मौत
-- राकेश सिनेमा पटरी पर गोदाम में आग लगने से छह श्रमिकों की हुई थी मौत
-- चिलकाना रोड पर पटाखों के गोदाम में आग लगने से दस श्रमिक झुलसे।
विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। इसके लिए चेकिंग अभियान भी चलाया जाता है। आग लगने की घटनाओं पर टीमें मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य करती हैं, जिन व्यापारियों ने आग से बचाव के उपकरण नहीं लगवाए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।----तेजवीर सिंह, सीएफओ
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जनपद मेरठ के मवाना में मोबिल ऑयल की दुकान में आग लगने के बाद हुए धमाके में तीन लोगों की मौत हो गई। इसके बाद अमर उजाला ने जनपद की स्थिति देखी तो जगह-जगह खतरे नजर आए। महानगर में अंबाला रोड, खाताखेड़ी, देहरादून रोड, चिलकाना रोड, दिल्ली रोड, किशनपुरा, बेदी गली, नवादा रोड, गलीरा रोड, चकराता मार्ग क्षेत्रों में मोबिल ऑयल, पेंट और ज्वलनशील पदार्थों की दुकानें हैं, लेकिन इन दुकानों पर कहीं पर भी आग बुझाने के व्यवस्था नहीं है।
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वहीं, घनी आबादी वाले इलाके पुरानी मंडी, ढोलीखाल, शारदानगर, खलासी लाइन, किशनपुरा, खानआलमपुरा में व्यापारियों ने गोदाम भी बना रखे हैं। यहां पर भी आग से बचाव के इंतजाम नहीं है। इन जगहों पर आग लग जाए तो तंग गलियां होने की वजह से दमकल की गाड़ियों का पहुंचना भी मुश्किल है।
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इसी तरह बेहट में मोबाइल ऑयल की करीब 15 दुकानें है। इसके अलावा पेंट की भी दस दुकानें हैं, जिन पर ग्राहकों की भीड़ रहती है। इनमें ज्यादातर दुकानें हाईवे किनारे हैं। कुछ अतिव्यस्त इलाके शाकंभरी रोड पर है। किसी भी दुकान में अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं। देवबंद में भी भीड़भाड़ वाले इलाकों में मोबिल ऑयल, पेंट समेत अन्य ज्वलनशील पदार्थों की सैकड़ों दुकानें हैं, लेकिन किसी ने भी आग बुझाने के उपकरण नहीं लगाए हैं। इसी तरह गंगोह, नकुड़, रामपुर मनिहारान, छुटमलपुर, बिहारीगढ़, नागल और चिलकाना में भी ऐसी स्थिति है।
हादसों के बाद भी नहीं ले रहे सबक
जिले में पहले भी कई जगहों पर आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन इसके बाद भी व्यापारी सबक लेने को तैयार नहीं है। कई बार आतिशबाजी की दुकानों में भी आग लगी हैं, लेकिन आग से बचाव के इंतजाम फिर भी नहीं किए।
हो चुकी हैं यह घटनाएं
-- थाना कुुतुबशेर के सामने मोबिल ऑयल के गोदाम में आग लगी
-- देहरादून रोड पर स्पेयर पार्ट्स की मार्केट में आग लगी
-- मोहल्ला आतिशबाजान में पटाखों के गोदाम में आग लगने से हुई थी दो की मौत
-- राकेश सिनेमा पटरी पर गोदाम में आग लगने से छह श्रमिकों की हुई थी मौत
-- चिलकाना रोड पर पटाखों के गोदाम में आग लगने से दस श्रमिक झुलसे।
विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती है। इसके लिए चेकिंग अभियान भी चलाया जाता है। आग लगने की घटनाओं पर टीमें मौके पर पहुंचकर बचाव कार्य करती हैं, जिन व्यापारियों ने आग से बचाव के उपकरण नहीं लगवाए हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।----तेजवीर सिंह, सीएफओ

बेहट में हाइवे किनारे पेंट व ज्वलनशील पदार्थों की दुकानों पर खड़े लोग- फोटो : SAHARANPUR