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वाजिद फरारी प्रकरण में दोनों सिपाही सस्पेंड
ब्यूरो/अमर उजाला, सहारनपुर
Updated Thu, 17 Mar 2016 12:42 AM IST
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वाजिद उर्फ काला की फरारी के मामले में दोनों लापरवाह सिपाहियों से पूछताछ करते सीओ। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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हिमाचल प्रदेश के विकास नगर कोर्ट में पेशी के बाद सहारनपुर लौटते समय रास्ते में मिर्जापुर थाना क्षेत्र के नौगजा पीर के पास से कैदी वाजिद काला के फरारी प्रकरण में दोनों सिपाहियों दीपक कुमार और नवजोत सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
एसपी देहात जगदीश शर्मा के मुताबिक कैदी को छुड़वाने की घटना के बाद पुलिस लाइन के आरआई ताहिर हुसैन की ओर से थाना मिर्जापुर में सिपाही दीपक कुमार और नवजोत सिंह के अलावा कैदी वाजिद काला सहित अन्य अज्ञात बदमाशों के खिलाफ आईपीसी की धारा 223, 224 और 225 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
लापरवाही के आरोप में दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके बाद, बुधवार को आरोपी सिपाहियों को कोर्ट में पेश किया गया. जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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खाकी के दावे पर कौन करेगा यकीन ः कुख्यात कैदी वाजिद काला को छुड़वाने की घटना में सामने आ रही कहानी में कई झोल के साथ ही नए पेंच फंसते जा रहे हैं।
मंगलवार को घटना के दौरान थाना पुलिस से लेकर अन्य पुलिस अफसरों की ओर से की गई प्राथमिक छानबीन में बस में सवार बदमाशों के सिपाहियों पर तमंचा तानने, बस से कूदकर साथियों के साथ भागने से पहले कैदी की ओर से उल्टी का बहाना बनाने, बस के पीछे बाइक सवार बदमाशों के पीछा करने, सिपाहियों की रायफल से एक फायरिंग ही होना और एक का मिस होना बताया गया था।
अब पुलिस की ओर से सामने लाई जा रही कहानी में नए झोल आ गए हैं। अब बताया जा रहा है कि बस में एक या दो बदमाश पहले से सवार तो थे, लेकिन उनके पास तमंचा नहीं था।नौगजा पीर की पुलिया पर बस का इंतजार किया जा रहा था और घटनास्थल पर कोई भी नेटवर्क काम नहीं करता है। कैदी को ले जाते समय रायफल से एक फायरिंग मिस हुआ है। मगर, कारतूस और भी थे।
आखिर साजिश किसने रची
विकास नगर से सहारनपुर तक बस में कुख्यात वाजिद काला को लाते समय पेशी वाले रूट की रेकी और कैदी को छुड़वाने के लिए आखिर साजिश किसने कहने पर रची गई। इस सवाल का जवाब पुलिस महकमे को तलाशना ही होगा। कहीं जेल में बंद वाजिद के आका मुकीम काला ने ही इसकी स्क्रिप्ट तो तैयार नहीं कराई।
जंगल से मैदान तक खंगाला
वाजिद काला को पुलिस अभिरक्षा से छुड़ाने की घटना के समय मंगलवार शाम चार बजे से लेकर बुधवार तक शिवालिक पहाड़ियों के जंगल से लेकर सहारनपुर की ओर आने वाले मैदानी इलाकों तक को पुलिस टीमों ने खूब खंगाला। एसपी देहात जगदीश शर्मा, सीओ चरण सिंह समेत अन्य अफसर भी रात में कांबिंग कराते रहे। मगर, कोई हाथ नहीं आया।
घटना की छानबीन जारी : एसएसपी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरपीएस यादव का कहना है कि कैदी को छुड़वाने के मामले में बदमाशों के इरादों, उनके प्लान, रेकी के तरीके और उसके स्थल से लेकर सिपाहियों की भूमिका की गहनता से छानबीन की जा रही है। बदमाशों द्वारा तमंचा तानने की बात सामने आई थी। हालांकि यह भी संदिग्ध लग रहा है।
सरफराज ने भी उगले थे डील के राज
शहर की दीवानी कचहरी में पिछले माह पेशी के दौरान फरार हुए डबल मर्डर के आरोपी सरफराज के मामले में भी डील का सच सामने आ चुका है। कोर्ट से फरार हुए सरफराज ने असोम से गिरफ्तार होने के बाद एसएसपी आरपीएस यादव के सामने ही खुलासा किया था कि फरार होने का प्लान एक महीना पहले ही बन चुका था।
कोर्ट में पेशी वाले दिन सिपाही शीशपाल सिंह से 200 रुपये में मोबाइल पर बातचीत कराने की डील हुई थी। इतना ही नहीं, उसके पिता की ओर से एसएसपी को दिए गए पत्र में आरोप लगाया गया था कि पेशी वाली टीम पर दस हजार रुपये के सौदे की बात तक कही थी।
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एसपी देहात जगदीश शर्मा के मुताबिक कैदी को छुड़वाने की घटना के बाद पुलिस लाइन के आरआई ताहिर हुसैन की ओर से थाना मिर्जापुर में सिपाही दीपक कुमार और नवजोत सिंह के अलावा कैदी वाजिद काला सहित अन्य अज्ञात बदमाशों के खिलाफ आईपीसी की धारा 223, 224 और 225 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
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लापरवाही के आरोप में दोनों सिपाहियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके बाद, बुधवार को आरोपी सिपाहियों को कोर्ट में पेश किया गया. जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
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खाकी के दावे पर कौन करेगा यकीन ः कुख्यात कैदी वाजिद काला को छुड़वाने की घटना में सामने आ रही कहानी में कई झोल के साथ ही नए पेंच फंसते जा रहे हैं।
मंगलवार को घटना के दौरान थाना पुलिस से लेकर अन्य पुलिस अफसरों की ओर से की गई प्राथमिक छानबीन में बस में सवार बदमाशों के सिपाहियों पर तमंचा तानने, बस से कूदकर साथियों के साथ भागने से पहले कैदी की ओर से उल्टी का बहाना बनाने, बस के पीछे बाइक सवार बदमाशों के पीछा करने, सिपाहियों की रायफल से एक फायरिंग ही होना और एक का मिस होना बताया गया था।
अब पुलिस की ओर से सामने लाई जा रही कहानी में नए झोल आ गए हैं। अब बताया जा रहा है कि बस में एक या दो बदमाश पहले से सवार तो थे, लेकिन उनके पास तमंचा नहीं था।नौगजा पीर की पुलिया पर बस का इंतजार किया जा रहा था और घटनास्थल पर कोई भी नेटवर्क काम नहीं करता है। कैदी को ले जाते समय रायफल से एक फायरिंग मिस हुआ है। मगर, कारतूस और भी थे।
आखिर साजिश किसने रची
विकास नगर से सहारनपुर तक बस में कुख्यात वाजिद काला को लाते समय पेशी वाले रूट की रेकी और कैदी को छुड़वाने के लिए आखिर साजिश किसने कहने पर रची गई। इस सवाल का जवाब पुलिस महकमे को तलाशना ही होगा। कहीं जेल में बंद वाजिद के आका मुकीम काला ने ही इसकी स्क्रिप्ट तो तैयार नहीं कराई।
जंगल से मैदान तक खंगाला
वाजिद काला को पुलिस अभिरक्षा से छुड़ाने की घटना के समय मंगलवार शाम चार बजे से लेकर बुधवार तक शिवालिक पहाड़ियों के जंगल से लेकर सहारनपुर की ओर आने वाले मैदानी इलाकों तक को पुलिस टीमों ने खूब खंगाला। एसपी देहात जगदीश शर्मा, सीओ चरण सिंह समेत अन्य अफसर भी रात में कांबिंग कराते रहे। मगर, कोई हाथ नहीं आया।
घटना की छानबीन जारी : एसएसपी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरपीएस यादव का कहना है कि कैदी को छुड़वाने के मामले में बदमाशों के इरादों, उनके प्लान, रेकी के तरीके और उसके स्थल से लेकर सिपाहियों की भूमिका की गहनता से छानबीन की जा रही है। बदमाशों द्वारा तमंचा तानने की बात सामने आई थी। हालांकि यह भी संदिग्ध लग रहा है।
सरफराज ने भी उगले थे डील के राज
शहर की दीवानी कचहरी में पिछले माह पेशी के दौरान फरार हुए डबल मर्डर के आरोपी सरफराज के मामले में भी डील का सच सामने आ चुका है। कोर्ट से फरार हुए सरफराज ने असोम से गिरफ्तार होने के बाद एसएसपी आरपीएस यादव के सामने ही खुलासा किया था कि फरार होने का प्लान एक महीना पहले ही बन चुका था।
कोर्ट में पेशी वाले दिन सिपाही शीशपाल सिंह से 200 रुपये में मोबाइल पर बातचीत कराने की डील हुई थी। इतना ही नहीं, उसके पिता की ओर से एसएसपी को दिए गए पत्र में आरोप लगाया गया था कि पेशी वाली टीम पर दस हजार रुपये के सौदे की बात तक कही थी।